UP Politics: सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ पर क्यों भड़के अखिलेश? मायावती के बयान से गरमाई यूपी की राजनीति 

UP Politics: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है, जबकि अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। जानें इस पर सपा की प्रतिक्रिया।

Aug 10, 2026 - 14:57
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UP Politics: सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ पर क्यों भड़के अखिलेश? मायावती के बयान से गरमाई यूपी की राजनीति 
  • Mayawati Praises Yogi Adityanath: मायावती ने की सीएम योगी की सराहना, अखिलेश यादव पर साधा निशाना; जानें पूरा मामला 
  • मायावती ने की सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ, अखिलेश यादव पर भड़कते हुए खोला पुराना राज; जानें यूपी में क्यों मची खलबली
  • UP Political News: मायावती ने की योगी सरकार की सराहना, अखिलेश यादव बोले- 'अंदरूनी सांठगांठ आई सामने'

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के एक ताजा बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नीत राज्य सरकार की सराहना करते हुए दलित स्मारकों और पार्कों के रखरखाव के लिए टिकटों से प्राप्त राजस्व का सही उपयोग करने पर उनका आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही मायावती ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा और उन पर दलित महापुरुषों के स्मारकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मायावती के इस रुख पर पलटवार करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीएसपी और बीजेपी के बीच 'अंदरूनी सांठगांठ' होने का दावा किया है। 

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तीखी हो गई है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने लखनऊ में बने दलित स्मारकों और पार्कों के टिकट से एकत्र हुए धन का उपयोग उनके जीर्णोद्धार और रखरखाव में किया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने बसपा के आग्रह पर ध्यान दिया और धन को सही मद में खर्च किया। इसके विपरीत, मायावती ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर टिकट का पैसा दबाकर रखने और स्मारकों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। 

यह पूरा विवाद लखनऊ स्थिति मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के रख-रखाव से जुड़ा हुआ है। मायावती ने आरोप लगाया कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इन ऐतिहासिक स्थलों के प्रवेश टिकटों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल इनके रखरखाव पर नहीं किया गया। मायावती के अनुसार, सपा शासन के दौरान देख-रेख के अभाव में स्मारकों की स्थिति जर्जर हो गई थी।

बसपा प्रमुख ने कहा कि जब उनकी पार्टी ने वर्तमान भाजपा सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वस्त किया कि टिकट बिक्री से प्राप्त पूरी राशि को केवल इन्हीं स्थलों की मरम्मत और रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। सरकार ने अपने वादे के मुताबिक धनराशि जारी की और मरम्मत कार्य करवाया, जिसके लिए मायावती ने योगी सरकार का आभार प्रकट किया। इसके साथ ही मायावती ने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता से बाहर होने पर ही समाजवादी पार्टी को दलित और पिछड़ा वर्ग याद आता है, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने दलित महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों और जिलों के नाम तक बदल दिए थे।

मायावती का मुख्य बयान

"वर्तमान भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती सपा सरकार की तरह टिकटों के पैसे को दबाकर नहीं रखा, बल्कि हमारे आग्रह पर स्मारकों की मरम्मत पर पूरा खर्च किया। इसके लिए हमारी पार्टी राज्य सरकार की आभारी है।"

मायावती के इस बयान के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच अंदरूनी सांठगांठ अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान लखनऊ के सभी प्रमुख पार्कों और स्मारकों के समुचित रखरखाव के निर्देश दिए गए थे और उनकी देख-रेख के लिए बजट का प्रावधान किया गया था।

अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार में ऐतिहासिक पत्थरों और उद्यानों की हालत खराब हुई है और रखरखाव के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बसपा और भाजपा मिलकर समाजवादी पार्टी के जनसमर्थन को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

मायावती द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ और अखिलेश यादव पर सीधे हमले से उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। राज्य में दलित वोट बैंक को लेकर हमेशा से बसपा और सपा आमने-सामने रही हैं। लोकसभा चुनावों के बाद से ही समाजवादी पार्टी अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए दलित मतदाताओं को साधने में जुटी हुई है। ऐसे में मायावती का यह आक्रामक रुख सपा के दलित आउटरीच अभियानों को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान अपने पारंपरिक कैडर को यह संदेश देने की कोशिश है कि समाजवादी पार्टी दलित हितैषी नहीं है। वहीं, भाजपा के लिए मायावती का यह बयान राजनीतिक रूप से राहत देने वाला है, क्योंकि इससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं और सपा के हमलों की धार कुंद होती है। आगामी समय में उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला और तेज होने की उम्मीद है। बहुजन समाज पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और कैडर को एकजुट रखने के लिए राज्यभर में बैठकों का दौर जारी रखेगी। वहीं, समाजवादी पार्टी भी मायावती के आरोपों का जवाब देने और दलित समाज के बीच अपनी पैठ बनाए रखने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाएगी। भाजपा इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने और विपक्ष के बिखराव को उजागर करने की रणनीति पर काम कर सकती है।

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