Government Action on Meta: मार्क जुकरबर्ग और मेटा ने भारत सरकार से मांगी माफी, 3 दिन के अल्टीमेटम के बाद बैकफुट पर कंपनी 

Government Action on Meta: संसद समिति के अल्टीमेटम के बाद मेटा ने भारत सरकार और आईटी मंत्रालय से माफी मांग ली है। पीएम मोदी के वीडियो हटाने पर कंपनी बैकफुट पर है।

By INA News Desk
Aug 10, 2026 - 14:45
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Government Action on Meta: मार्क जुकरबर्ग और मेटा ने भारत सरकार से मांगी माफी, 3 दिन के अल्टीमेटम के बाद बैकफुट पर कंपनी 
  • Government Action on Meta: संसद समिति के अल्टीमेटम के बाद मेटा ने भारत सरकार से मांगी माफी, जानें पूरा मामला
  • संसदीय समिति के कड़े रुख के बाद झुकी मेटा, मार्क जुकरबर्ग और कंपनी ने पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर भारत सरकार से मांगी माफी
  • Meta Controversy: संसद समिति के अल्टीमेटम के बाद मेटा ने भारत सरकार से मांगी माफी, आईटी मंत्रालय को दिया स्पष्टीकरण

भारत सरकार द्वारा सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग पर कसे गए कड़े शिकंजे के बाद कंपनी बैकफुट पर आ गई है। सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसद की स्थायी समिति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश को फेसबुक से हटाने और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) व डीपफेक के प्रसार पर तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद, मेटा के शीर्ष अधिकारियों ने केंद्र सरकार से औपचारिक रूप से माफी मांग ली है। कंपनी ने इसे तकनीकी खामी करार देते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने का आश्वासन दिया है। 

संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी स्थायी समिति, जिसके प्रमुख भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे हैं, ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा सुधारों और पेपर लीक पर छात्रों को संबोधित करने वाले वीडियो संदेश को फेसबुक से अस्थायी रूप से हटाए जाने से जुड़ा था। संसदीय समिति ने इस लापरवाही को अत्यंत गंभीर मानते हुए मेटा और उसके सीईओ मार्क जुकरबर्ग से सीधे माफी की मांग की थी। समिति की कड़ी चेतावनी और अल्टीमेटम के बाद मेटा के वैश्विक प्रतिनिधियों ने आईटी मंत्रालय से संपर्क कर कंपनी की ओर से खेद प्रकट किया और माफी मांगी है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब जुलाई के अंत में पोस्ट किए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक महत्वपूर्ण वीडियो संदेश को फेसबुक के ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा 5 से 6 घंटे के लिए प्रतिबंधित/ब्लॉक कर दिया गया था। यद्यपि आलोचना के बाद कंपनी ने इसे रिस्टोर कर दिया, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) और संसदीय समिति ने इस सफाई को नाकाफी माना। संसदीय समिति की बैठक के बाद लोक सभा सचिवालय के माध्यम से आईटी मंत्रालय को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि यदि मार्क जुकरबर्ग और मेटा इस गंभीर चूक पर औपचारिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो आईटी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour Protection) को समाप्त कर दिया जाएगा। इस अल्टीमेटम के बाद मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कपलान (Joel Kaplan) के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने केंद्रीय मंत्री और आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और इस भूल के लिए खेद जताते हुए औपचारिक माफी प्रस्तुत की।

सेफ हार्बर (Safe Harbour Protection) का महत्व

आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स) को एक 'मध्यस्थ' (Intermediary) माना जाता है।

इसके अंतर्गत, यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई किसी भी गैर-कानूनी सामग्री के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार या कानूनी रूप से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता।

यदि यह कानूनी संरक्षण वापस ले लिया जाता है, तो मेटा एक 'प्रकाशक' (Publisher) मान ली जाएगी, जिससे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली प्रत्येक आपत्तिजनक सामग्री के लिए कंपनी और उसके अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकेंगे।

संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के वीडियो को बिना वजह हटाना और एल्गोरिदम में गड़बड़ी एक गंभीर विषय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में व्यापार करने वाली विदेशी टेक कंपनियों को देश के संप्रभु कानूनों और पारदर्शी मानकों का शत-प्रतिशत पालन करना ही होगा। वहीं, मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान ने कहा कि प्रधानमंत्री के पोस्ट पर लगाई गई पाबंदी एक ऑटोमेटेड सिस्टम की गलती के कारण हुई थी और इसके लिए कंपनी भारत सरकार व संबंधित मंत्रालय से माफी मांगती है। मेटा ने यह भी आश्वस्त किया है कि भारत में वीआईपी खातों और संवेदनशील सार्वजनिक बयानों के लिए रिव्यू सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

मेटा द्वारा माफी मांगे जाने से यह साफ हो गया है कि भारत डिजिटल संप्रभुता और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही के मामले में बेहद सख्त रुख अपना रहा है। इस घटनाक्रम ने भारत में काम कर रही अन्य बिग-टेक कंपनियों को भी कड़ा संदेश दिया है कि भारतीय कानूनों और संवैधानिक पदों की गरिमा की अनदेखी भारी पड़ सकती है। यदि सेफ हार्बर सुरक्षा पर कोई आंच आती, तो भारत में मेटा का व्यापारिक स्वरूप पूरी तरह बदल जाता। अल्टीमेटम और माफीनामे के बाद अब आईटी मंत्रालय और संसदीय समिति मेटा द्वारा दी गई तकनीकी सफाई की समीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही, प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और एआई जनरेटेड डीपफेक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए मेटा द्वारा उठाए गए कदमों की निगरानी की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य में किसी भी ऑटोमेटेड एल्गोरिदम के कारण ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।

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