पहले ऑनलाइन प्यार, धोखा और फिर... आखिर सोशल मीडिया क्यों बना आज के युवाओं की मौत का सौदागर

पढ़ने की उम्र में घंटों मोबाइल चलाते रहते हैं फिर एक समय ऐसा आता है कि मोबाइल हमारे बच्चों को चलाना शुरू कर देता है। यहीं से शुरू हो जाते हैं उनके बर्बादी के दिन। फिर जब बच्चा नौकरी करने लायक हो जाता है तो हम सरकार को कोसते हैं, घर में सोफे पर बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हुए सरकारी...

Jan 15, 2025 - 00:09
Jan 15, 2025 - 00:47
 0  122
पहले ऑनलाइन प्यार, धोखा और फिर... आखिर सोशल मीडिया क्यों बना आज के युवाओं की मौत का सौदागर

Reported By Vijay Laxmi Singh(Editor- In- Chief)
Edited By Saurabh Singh

INA News On Social Media Activities And Harmfulness.

कहते हैं कि इंसान का जीवन बड़ा ही कीमती होता है। वर्तमान में हर व्यक्ति 2 जिंदगियां जी रहा है। एक तो वह जिंदगी, जिसके बारे में उसके घर वाले, आसपास के लोग, रिश्तेदार, दोस्त आदि जानते हैं और दूसरी वह जिंदगी जो पूरी तरह से डिजिटल है। इन दोनों जिंदगियों को Actual life और Vertual life कह सकते हैं। Actual लाइफ का मतलब वास्तविक जीवन और Vertual लाइफ का मतलब काल्पनिक, गुप्त या ऑनलाइन लोगों के साथ जुड़ा जीवन। साइंस के विकास के साथ-साथ इसके नुकसान भी काफी हो रहे हैं।

वास्तविक कारण यह है कि आज का युवा वर्ग साइंस से होने वाले लाभों को कम और नुकसानों की तरफ अधिक झुक चला है। आज के समय में युवाओं का अधिकांश समय मोबाइल पर ही बीतता है। इसमें भी सबसे अधिक समय रील्स, वीडियोज देखने और चैटिंग करने में खर्च होता है। आज के माता-पिता भी अंधी दौड़ में अपने बच्चों को 'किसी से कम' न दिखाने की चाहत में कब एक दूसरी और खतरनाक जिंदगी अपने बच्चे के हाथ में थमा देते हैं, इसका पता नहीं चलता। पहले समय में जब कोई बच्चा कोई अच्छा काम करता था तो मिठाइयां बांटी जाती थीं, उसकी कोई मनपसंद चीज जैसे साईकिल, कोई वीडियो गेम या फिर कहीं घूमने जाना आदि ख्वाहिशें पूरी की जाती थीं।Whatsapp logo png, Whatsapp logo transparent png, Whatsapp icon transparent  free png 23986974 PNGहोता आज भी यही है लेकिन फर्क इतना है कि ज्यादातर बच्चों की पसंद अब 'मोबाइल का हाथ में होना' रह गयी है। यही मोबाइल कुछ बच्चों की जिंदगी के सफर की सफलता में सहायक बनता है तो ज्यादातर बच्चों की जिंदगी में यह एक क्रिमिनल बनकर उभरता है। इस वजह से अधिकांश बच्चे दोहरी जिंदगी जीना शुरू कर देते हैं। उन्हें वास्तविक जीवन से ज्यादा मोबाइल के भीतर का जीवन सुहावना और लजीज़ लगने लगता है। व्हाट्सअप, फेसबुक से शुरू होकर न जाने कब बात चैटिंग, मीटिंग और लव तक पहुंच जाती है, पता नहीं चलता। अब आप ही सोंचिये कि अगर एक 14-15 साल का बच्चा पढ़ाई से ज्यादा मोबाइल को टाइम देने लगे। होनहार बनने की बजाय प्यार ऑनलाइन प्यार पाने को अपना लक्ष्य बना ले। अपने माता-पिता और घर वालों को छोड़कर ऑनलाइन दुनिया के किसी शख्स को अपना हितैषी या सबकुछ मान बैठे तो सोंचा जा सकता है कि इसका अंजाम क्या होगा।

हमारे देश की प्रतिभाएं तो मरती ही हैं, साथ में कई परिवार भी तबाह होते हैं। आये दिन इस डिजिटल दुनिया के कारण हुई मौतों को हम सुर्खियों में पढ़ते हैं लेकिन हम पर जूं तक नहीं रेंगती क्यों, वो इसलिए कि हमें यह अंधा विश्वास होता है कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं करेगा। अरे भाई करता कोई बच्चा नहीं है लेकिन डिजिटल दुनिया की अंधी दौड़ में बच्चे इतने आगे निकल चुके होते हैं कि उन्हें सही और गलत की समझ नहीं रह जाती और वो गलत को ही सही मानकर खौफनाक कदम उठा लेते हैं। नतीजन, अपने बच्चे का सहारा पाने की उम्र में उसकी अर्थी उठाने की नौबत आ जाती है। इसके सबसे बड़े 2 कारण हैं-
पहला यह कि हम बिना सोंचे समझे ही बिना किसी परिपक्वता के, बिना किसी नसीहत के अपने बच्चों को मोबाइल थमा देते हैं क्योंकि हमें भी तो अपने बच्चे को सभी के सामने स्मार्ट दिखाना है, दुनिया को यह भी दिखाना है न कि हमारे बच्चे के हाथ में भी हजारों का एंड्राइड या iPhone रहता है।Updated Messenger logo from Facebookदूसरा कारण यह कि यदि आपने उसकी पढ़ाई में सहायता के लिए मोबाइल दिया है तो उस पर नजर नहीं रखते, किसी भी पेरेंट्स का कंट्रोल नहीं होता इस पर क्योंकि हमें तो अंधा विश्वास होता है अपने बच्चों पर, यह तो वही बात हो गई कि लंबे और गहरे समुद्र में अपने बच्चे बच्चे को नाव पर अकेले बिठाकर छोड़ देना तो नतीजा भी आप भुगतेंगे ही। किसी भी चीज को अपने बच्चों के हाथ में देने से पहले उसका सही इस्तेमाल तो सिखा और समझा दीजिए ताकि बच्चा उसका सही उपयोग समझे और उस पर स्ट्रिक्ट रहिए ताकि वह मोबाइल से कोई गलत काम करने से पहले डरे। माता-पिता को बच्चों का दोस्त बनना सही है लेकिन इतना स्ट्रिक्ट भी रहना चाहिए कि हमें पता रहे कि हमारी संतान क्या कर रही है, क्या नहीं।

आज के बच्चों के पास मंहगा मोबाइल, बाइक, पर्स में कुछ पैसे हों तो इनमें से अधिकांश मौज उड़ाना ही सीखेंगे क्योंकि हमने उन्हें चीजों का सही उपयोग बताया ही नहीं, हमारी नजर उनकी हरकतों पर है ही नहीं। क्योंकि हम बिजी हैं और कामों में, हमारे पास टाइम और प्यार ही नहीं है अपने बच्चों को देने के लिए। ऐसे में बच्चे दूसरी दुनिया में प्यार खोजेंगे ही। रोजाना ही हम खबरों में सुसाइड की सुर्खियां पढ़ रहे हैं, इनमें से ज्यादातर युवा ही होते हैं, जिनकी उम्र पढ़ने और कुछ अच्छा बनने की होती है लेकिन वो बिना किसी लगाम के गलत रास्ते पर जाते हैं और जो सही लगता है वही करते हैं। जो युवा सुसाइड नहीं भी कर रहे हैं लेकिन अपना जीवन तो बर्बाद कर ही रहे हैं।Instagram Logo Images – Browse 49,436 Stock Photos, Vectors, and Video |  Adobe Stockपढ़ने की उम्र में घंटों मोबाइल चलाते रहते हैं फिर एक समय ऐसा आता है कि मोबाइल हमारे बच्चों को चलाना शुरू कर देता है। यहीं से शुरू हो जाते हैं उनके बर्बादी के दिन। फिर जब बच्चा नौकरी करने लायक हो जाता है तो हम सरकार को कोसते हैं, घर में सोफे पर बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हुए सरकारी योजनाओं को कोसते हैं, कहते हैं कि सरकार ढंग की जॉब नहीं निकाल रही है, ये है, वो है। क्योंकि कोई न कोई एक्सक्यूज़ तो देना ही है न। सीधे शब्दों में समझिए कि हम अपने घर, समाज और देश के भविष्य और प्रतिभाओं को जहर रूपी मोबाइल देकर उनकी हत्या कर रहे हैं। अब भी समय है चेत जाइए, नहीं तो वह समय दूर नहीं, जब आप भी अपने किसी जानने वाले बच्चे की खबर अखबार या किसी चैनल की सुर्खियों में पढ़ रहे होंगे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow