Lucknow : समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 महाभियान में जनता की भारी भागीदारी, 63 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त
पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक 63,38,511 फीडबैक मिले हैं। इनमें 50,12,139 ग्रामीण क्षेत्रों से और 13,26,376 नगरीय क्षेत्रों से आए। आयु वर्ग के
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान में जनता की व्यापक भागीदारी हो रही है। 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्ध लोगों ने छात्रों, शिक्षकों, व्यापारियों, उद्यमियों, किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संघों, मीडिया और आम लोगों से भ्रमण कर पिछले आठ वर्षों की विकास यात्रा की जानकारी दी। विकास के रोडमैप पर चर्चा कर फीडबैक लिया गया।
पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक 63,38,511 फीडबैक मिले हैं। इनमें 50,12,139 ग्रामीण क्षेत्रों से और 13,26,376 नगरीय क्षेत्रों से आए। आयु वर्ग के अनुसार 31,04,842 सुझाव 31 वर्ष से कम उम्र वालों से, 29,33,449 सुझाव 31 से 60 वर्ष के लोगों से और 3,00,224 सुझाव 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों से प्राप्त हुए। विभिन्न क्षेत्रों से सुझाव इस प्रकार हैं: कृषि से 16,31,196, पशुपालन एवं डेयरी से 2,51,545, उद्योग से 2,27,239, आईटी एवं तकनीक से 1,77,629, पर्यटन से 1,50,019, ग्रामीण विकास से 12,50,409, आधारभूत ढांचे से 56,995, संतुलित विकास से 89,948, समाज कल्याण से 4,90,532, नगरीय एवं स्वास्थ्य से 4,30,759, शिक्षा से 14,63,471 तथा सुरक्षा से 1,18,775। जनपदों के आधार पर शीर्ष पांच में जौनपुर (5,71,449), संभल (5,05,719), गाजीपुर (2,55,776), हरदोई (1,95,411) और प्रतापगढ़ (1,80,692) हैं। न्यूनतम सुझाव वाले पांच जनपद इटावा (21,093), हापुर (29,863), महोबा (30,020), ललितपुर (31,207) और गौतम बुद्ध नगर (31,979) हैं।
सीतापुर के प्रदीप कुमार शर्मा का सुझाव है कि लखनऊ से प्राचीन तीर्थ नैमिषारण्य के लिए कोई ट्रेन नहीं है। जोन की राजनीति के कारण लखनऊ-सीतापुर-बालामऊ के लिए रिंग रेल सेवा का प्रस्ताव नहीं बना। सीतापुर राजधानी लखनऊ का पड़ोसी जिला है। यह लखनऊ को सीतापुर-शाहजहांपुर रूट से दिल्ली, देहरादून, जयपुर आदि राजधानियों और हरिद्वार, मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, कोलकाता, गुवाहाटी जैसे बड़े शहरों से जोड़ता है। जोन की राजनीति के कारण सीतापुर से गोरखपुर और पंजाब को छोड़कर कहीं सीधी ट्रेन नहीं चलती। सीतापुर का दुर्भाग्य है कि NER के पास केवल लखनऊ से सीतापुर तक का रेलखंड है। दोनों जोन एक-दूसरे के प्रति सौतेला व्यवहार करते हैं और इस महत्वपूर्ण रेलखंड को लावारिस बना दिया है।
सहारनपुर के अनुराग मलिक कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और सुशासन को मजबूत बनाने के लिए पुलिस को स्मार्ट (सख्त, नैतिक, जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीक सक्षम) बनाया जाए। अपराध नियंत्रण के लिए सीसीटीवी निगरानी, डायल 112, ड्रोन और अपराध डेटा विश्लेषण को व्यापक बनाया जाए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष तंत्र और फास्ट ट्रैक व्यवस्था सुनिश्चित हो। सुशासन के लिए सभी सरकारी सेवाओं को डिजिटल और समयबद्ध किया जाए। ई-गवर्नेंस, जनसुनवाई पोर्टल, आरटीआई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। हर स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। जनता की भागीदारी, तकनीक का उपयोग और प्रशासन की संवेदनशीलता ही सुरक्षित और सुशासित उत्तर प्रदेश की नींव बन सकती है।
चंदौली के अमर प्रकाश ज्योति का सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का अभाव गंभीर समस्या है। इसे सुधारने के उपाय: स्कूलों की इमारत, शौचालय और पुस्तकालयों का विकास हो। शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण मिले। ऑनलाइन कक्षाओं, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और शिक्षा ऐप्स का उपयोग हो। ग्रामीण समुदायों में शिक्षा के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं और कार्यक्रम हों। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता मिले। अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग के लिए प्रेरित किया जाए। समुदाय में स्कूलों की स्थापना या सामुदायिक शिक्षण केंद्र बनें। लड़कियों और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाए। बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान हो। स्थानीय लोगों को शिक्षा कार्य में शामिल किया जाए। इन उपायों से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा स्तर सुधरेगा।
महाभियान के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायतों पर बैठकें, सम्मेलन और गोष्ठियां हो रही हैं। अब तक 215 नगर पालिकाओं में बैठकें और 228 में सम्मेलन-गोष्ठियां, 18 नगर निगमों में बैठकें और 18 में सम्मेलन-गोष्ठियां, 64 जिला पंचायतों में सम्मेलन-गोष्ठियां और 61 में बैठकें, 557 नगर पंचायतों में बैठकें और 578 में सम्मेलन-गोष्ठियां, 767 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन-गोष्ठियां और 767 में बैठकें तथा 51,012 ग्राम पंचायतों में बैठकें हो चुकी हैं। इन आयोजनों से नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागों के बीच संवाद मजबूत हुआ है। प्राप्त सुझावों के आधार पर विजन दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। यह प्रयास सामूहिक भागीदारी और समन्वित विकास सुनिश्चित कर रहा है।
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