Hapur : भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बहस तेज, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने जारी किया बयान
सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इससे निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर बासमती चाव
भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम ट्रेड डील या फ्रेमवर्क को लेकर राजनीति और किसान संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि अभी कोई अंतिम समझौता तय नहीं हुआ है। वार्ता में रोज बदलाव हो रहे हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष पवन हूण ने बताया कि 6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में 10 फरवरी को बड़े संशोधन किए गए। कृषि उत्पादों की सूची से दालों का नाम भी हटा दिया गया। आधी-अधूरी जानकारी पर हंगामा खड़ा करना सही नहीं है।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जब तक डील पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक लाभ-हानि पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने विपक्षी दलों और कुछ किसान संगठनों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अंतिम समझौते के बाद ही पता चलेगा कि किसानों को कितना फायदा या नुकसान होगा।
सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इससे निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पिछले साल 304.78 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ था। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह अच्छा अवसर हो सकता है। मसाला निर्यात भी 36,765 करोड़ रुपये के स्तर पर है। हल्दी, मिर्च, जीरा और इलायची जैसे उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
हालांकि सोयाबीन तेल और अन्य खाद्य तेलों के आयात को लेकर चिंताएं हैं। संगठन ने कहा कि भारत पहले से ही 60 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करता है। पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल बड़ी मात्रा में बाहर से आते हैं। संतुलित और सीमित आयात से घबराने की जरूरत नहीं बशर्ते एमएसपी और आयात शुल्क जैसे सुरक्षा उपाय मजबूत रहें।
यूनियन ने चेतावनी दी कि गैर-शुल्क बाधाओं पर कोई समझौता न हो। सरकार के पास किसानों की सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार यही है। टैरिफ कोटा, मात्रात्मक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक आधार पर प्रतिबंध जैसे विकल्प खुले रखे जाएं।
यह डील निर्यात उन्मुख बड़े किसानों के लिए अवसर बन सकती है लेकिन दलहन-तेलहन उगाने वाले छोटे किसानों के लिए जोखिम भी है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने केंद्र सरकार से मांग की है कि किसान हितों पर किसी भी कीमत पर समझौता न हो।
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