लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2022 के दौरान चुनाव लड़ने वाले 6 अभ्यर्थियों को भारत निर्वाचन आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। इन अभ्यर्थियों ने अपने निर्वाचन व्यय का लेखा निर्धारित नियमों के अनुसार जमा नहीं किया था, जिसके चलते आयोग ने यह कार्रवाई की है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों ने चुनाव खर्च का विवरण समय पर और नियमानुसार प्रस्तुत नहीं किया, उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के तहत अयोग्य घोषित किया गया है। आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 25 फरवरी 2026 से अगले तीन वर्षों तक ये अभ्यर्थी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत प्रत्येक अभ्यर्थी को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनाव खर्च का पूरा ब्यौरा और उससे संबंधित वाउचर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करना अनिवार्य होता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को आयोग की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद भी उन्होंने न तो कोई संतोषजनक कारण बताया और न ही कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। इसके चलते आयोग को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
आयोग द्वारा अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थियों में शामिल हैं:
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प्रज्ञा यशोदा – 112 बिसौली (अजा) विधानसभा क्षेत्र, जनपद बदायूं
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सुरेन्द्र – 112 बिसौली (अजा) विधानसभा क्षेत्र, जनपद बदायूं
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अनिल कुमार – 113 सहसवान विधानसभा क्षेत्र, जनपद सम्भल
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ममता देवी – 116 शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र, जनपद बदायूं
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ओमवीर – 117 दातागंज विधानसभा क्षेत्र, जनपद बदायूं
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मुन्ना लाल – 117 दातागंज विधानसभा क्षेत्र, जनपद बदायूं/लखनऊ
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए व्यय लेखा समय पर जमा करना प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अनिवार्य है और नियमों के उल्लंघन पर इसी प्रकार की कार्रवाई की जाती रहेगी।
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