बकरीद के दिन आपसी विवाद में सरेआम खेला गया था खूनी खेल, अब बुलडोजर एक्शन के बीच पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले सघन आबादी क्षेत्र खोड़ा में हाल ही में घटित हुए एक खूनी घटनाक्रम ने

Jun 2, 2026 - 12:54
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बकरीद के दिन आपसी विवाद में सरेआम खेला गया था खूनी खेल, अब बुलडोजर एक्शन के बीच पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद।
बकरीद के दिन आपसी विवाद में सरेआम खेला गया था खूनी खेल, अब बुलडोजर एक्शन के बीच पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद।
  • बकरीद के दिन आपसी विवाद में सरेआम खेला गया था खूनी खेल, सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक अमले का सख्त एक्शन
  • आरोपी के अवैध निर्माण पर बुलडोजर नोटिस चश्मा होने के बाद खोड़ा में पसरा सन्नाटा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले सघन आबादी क्षेत्र खोड़ा में हाल ही में घटित हुए एक खूनी घटनाक्रम ने पूरे इलाके की सामाजिक शांति और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। बकरीद के पावन त्योहार के दिन 17 वर्ष के एक निर्दोष किशोर सूर्या प्रताप चौहान की कुछ स्थानीय असामाजिक तत्वों द्वारा बेहद बेरहमी से की गई हत्या के बाद से शुरू हुआ तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस दुस्साहसिक वारदात ने जहां एक तरफ पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों के भीतर गहरे आक्रोश और गम का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन की त्वरित और दंडात्मक जवाबी कार्रवाई के बाद समूचे खोड़ा क्षेत्र की संकरी गलियों में एक अजीब और भारी सन्नाटा पसरा हुआ है।

इस सनसनीखेज आपराधिक मामले की शुरुआत त्योहार के दिन एक बेहद मामूली बात पर हुए आपसी कहासुनी और विवाद से हुई थी, जिसने देखते ही देखते एक खूनी संघर्ष का रूप धारण कर लिया। पीड़ित किशोर सूर्या प्रताप चौहान अपने घर के पास मौजूद था, तभी इलाके के कुख्यात और मनबढ़ किस्म के युवक असद ने अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर उसे घेर लिया। पुरानी रंजिश और तात्कालिक विवाद के आवेश में आकर इन अपराधियों ने धारदार हथियारों और अवैध असलहों का इस्तेमाल करते हुए सरेआम सूर्या पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस बर्बर हमले में गंभीर रूप से घायल हुए किशोर ने अस्पताल ले जाने के दौरान बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जिसके बाद त्योहार की खुशियां अचानक मातम और चीख-पुकार में बदल गईं।

इस जघन्य हत्याकांड के बाद स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा और न्याय की मांग को लेकर लोगों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक ताना-बाने के बिगड़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों ने तुरंत कई विशेष टीमों और स्वाट (SWAT) दस्ते को आरोपियों की धरपकड़ के लिए सक्रिय किया। पुलिस टीमें लगातार संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं, इसी दौरान मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने मुख्य अभियुक्त असद को घेरने का प्रयास किया, जिसके बाद यह पूरा मामला एक मुठभेड़ में तब्दील हो गया। पुलिस की घेराबंदी देखकर मुख्य आरोपी असद ने आत्मसमर्पण करने के बजाय सरकारी टीम पर सीधे फायरिंग झोंक दी और भागने की कोशिश की। आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई में पुलिस की तरफ से की गई फायरिंग में असद को गंभीर गोलियां लगीं, जिसके बाद उसे तुरंत नजदीकी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में कुछ पुलिसकर्मियों को भी आंशिक चोटें आई हैं।

मुख्य आरोपी के पुलिस एनकाउंटर में ढेर होने की खबर जैसे ही खोड़ा और उसके आसपास के इलाकों में फैली, वैसे ही सुरक्षा के मद्देनजर पूरे प्रशासनिक अमले को हाई-अलर्ट पर डाल दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई का सिलसिला जारी रखते हुए इस हत्याकांड में शामिल अन्य सह-आरोपियों को भी अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। कानून के इस कड़े इकबाल के बावजूद प्रशासन यहीं नहीं रुका, बल्कि अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उनके आर्थिक और अवैध साम्राज्य को भी निशाना बनाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई।

इसी कड़ी में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और स्थानीय नगर पालिका प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मृतक मुख्य आरोपी असद और उसके परिवार द्वारा अवैध रूप से निर्मित किए गए मकान और दुकानों का भौतिक सर्वेक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन और बिना वैध नक्शे के सरकारी जमीन पर किए गए निर्माण को चिन्हित करते हुए भवन के मुख्य द्वार पर आधिकारिक 'बुलडोजर एक्शन' का नोटिस चश्मा कर दिया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा के भीतर यदि अवैध निर्माण को स्वतः नहीं हटाया गया, तो प्रशासनिक स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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