जब 15 साल बाद मिली लापता मां... घुटनों के बल बैठकर रो पड़ा इकलौता बेटा, मां के सीने से लिपटकर फूट-फूटकर रोई बेटी।

राजस्थान के कोटा शहर में स्थित 'अपना घर आश्रम' परिसर से एक बेहद मार्मिक, हृदयस्पर्शी और मानवीय संवेदनाओं से

Jun 2, 2026 - 12:50
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जब 15 साल बाद मिली लापता मां... घुटनों के बल बैठकर रो पड़ा इकलौता बेटा, मां के सीने से लिपटकर फूट-फूटकर रोई बेटी।
जब 15 साल बाद मिली लापता मां... घुटनों के बल बैठकर रो पड़ा इकलौता बेटा, मां के सीने से लिपटकर फूट-फूटकर रोई बेटी।
  • डेढ़ दशक का लंबा इंतजार खत्म, कोटा के अपना घर आश्रम में 15 साल बाद हुआ बिछड़े परिवार का अभूतपूर्व और भावुक मिलन
  • मानसिक अस्वस्थता के कारण उत्तर प्रदेश से लापता हुई थी महिला, रेस्क्यू टीम और काउंसिलिंग के प्रयास से मिला जीवन का सबसे बड़ा चमत्कार

राजस्थान के कोटा शहर में स्थित 'अपना घर आश्रम' परिसर से एक बेहद मार्मिक, हृदयस्पर्शी और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत कर देने वाला वाकया सामने आया है। पिछले पंद्रह वर्षों से अपने परिवार, बच्चों और आशियाने से दूर गुमनामी और मानसिक अस्वस्थता का जीवन जी रही एक बेबस महिला को आखिरकार उसका खोया हुआ संसार वापस मिल गया है। जब वह बुजुर्ग महिला आश्रम के मुख्य हॉल में दाखिल हुई और उसके सामने उसका पति, जवान हो चुका बेटा और ब्याही जा चुकी बेटी आए, तो वहां एक ऐसा भावुक दृश्य उपस्थित हुआ जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति, आश्रम के स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों को आंसुओं से सराबोर कर दिया। डेढ़ दशक के लंबे इंतजार, निराशा और अंतहीन तलाश के बाद हुए इस पुनर्मिलन को पूरे परिवार ने साक्षात ईश्वर के किसी बड़े चमत्कार की संज्ञा दी है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि करीब पंद्रह साल पहले उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिले से शुरू होती है, जहां यह महिला अपने हंसते-खेलते परिवार के साथ रहा करती थी। अचानक आई मानसिक अस्वस्थता और डिप्रेशन के चलते एक दिन वह चुपचाप घर से निकल गई और रास्ता भटकने के कारण वापस नहीं लौट सकी। उस समय बच्चे बहुत छोटे थे और मां के अचानक गायब हो जाने से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पति ने अपनी सीमित आर्थिक क्षमताओं के बावजूद अपनी पत्नी को तलाशने के लिए हर संभव प्रयास किया, जिसमें रिश्तेदारों के घरों से लेकर विभिन्न शहरों के रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और धार्मिक स्थलों के चक्कर काटना शामिल था। समय बीतने के साथ-साथ जब कोई सुराग नहीं मिला, तो धीरे-धीरे उम्मीद की किरणें धुंधली पड़ने लगी थीं, लेकिन बच्चों के मन में यह विश्वास हमेशा जिंदा था कि उनकी मां एक दिन जरूर वापस आएगी।

घर से बिछड़ने के बाद यह असहाय महिला भटकते हुए राजस्थान के कोटा संभाग में पहुंच गई थी, जहां कई दिनों तक सड़कों के किनारे अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन करने के बाद आश्रम की रेस्क्यू टीम की नजर उस पर पड़ी। आश्रम के स्वयंसेवकों ने महिला को सड़क से रेस्क्यू किया और उसे अपने केंद्र पर लेकर आए, जहां उसकी चिकित्सा, मानसिक उपचार और उचित खान-पान की व्यवस्था की गई। शुरुआती दिनों में महिला की मानसिक स्थिति इतनी अधिक खराब थी कि वह अपना नाम, पता या अपने परिवार के बारे में कुछ भी बताने में पूरी तरह से असमर्थ थी। आश्रम के डॉक्टरों और काउंसिलर्स की एक विशेष टीम ने लगातार कई वर्षों तक धैर्यपूर्वक उसका इलाज किया, जिससे उसकी याददाश्त में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हुआ। हाल ही में एक रूटीन काउंसिलिंग सत्र के दौरान महिला के दिमाग पर पड़े धुंधलके साफ हुए और उसने टूटे-फूटे शब्दों में उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक गांव का नाम और अपने पति का नाम साझा किया। इस महत्वपूर्ण जानकारी के मिलते ही आश्रम प्रशासन ने बिना कोई समय गंवाए उत्तर प्रदेश की स्थानीय पुलिस और सोशल मीडिया नेटवर्क की मदद से संबंधित परिवार को ट्रैक किया, जिसके बाद पंद्रह साल पुराना यह सस्पेंस पूरी तरह खत्म हो गया।

जैसे ही उत्तर प्रदेश में रह रहे परिवार को यह सूचना मिली कि उनकी लापता मां कोटा के एक आश्रम में पूरी तरह सुरक्षित है, वैसे ही पति अपने दोनों बच्चों को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गया। आश्रम के मिलन कक्ष में जैसे ही दोनों पक्षों का आमना-सामना हुआ, तो समय जैसे कुछ पलों के लिए ठहर सा गया। पंद्रह साल पहले जिस बेटे को मां गोद में छोड़कर गई थी, वह अब एक जिम्मेदार युवक बन चुका था, उसने जैसे ही अपनी मां को देखा वह तुरंत उनके पैरों में गिर पड़ा और उनके कदमों को पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगा। वहीं, शादीशुदा हो चुकी बेटी अपनी मां के सीने से इस कदर लिपट गई कि काफी देर तक दोनों ओर से सिर्फ सिसकियों की आवाजें ही गूंजती रहीं।

इस बेहद भावुक पुनर्मिलन के दौरान बुजुर्ग पति की स्थिति भी देखने लायक थी, जो अपनी पत्नी के जीवित और सुरक्षित होने की बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था। उसने आश्रम के प्रबंधन, डॉक्टरों और निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले सभी कर्मचारियों के प्रति हाथ जोड़कर अपना गहरा आभार व्यक्त किया। परिवार ने साझा किया कि उन्होंने इतने वर्षों में हर उस दरवाजे को खटखटाया था जहां से मदद की उम्मीद थी, लेकिन जब हार मान ली थी, तब इस सेवा केंद्र ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी खुशी लौटा दी है। महिला को अब सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सम्मानपूर्वक उसके परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के लिए विदा कर दिया गया है।

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