अंगरक्षकों के सनसनीखेज कबूलनामे से मची खलबली, क्या वाकई सलाखों के पीछे जाएंगे सोशल मीडिया के स्टार खान सर?
बिहार की राजधानी पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका, जो देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं
- कोचिंग हब पटना में भारी बवाल, सुरक्षाकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद कानूनी शिकंजे में फंसे मशहूर शिक्षक
- हथियार जब्त और नई प्राथमिक दर्ज, पुलिसिया तफ्तीश के दायरे में आए देश के सबसे चर्चित एजुकेटर
बिहार की राजधानी पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका, जो देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के सपनों का केंद्र माना जाता है, इस समय एक भीषण और अप्रत्याशित कानूनी विवाद के केंद्र में आ गया है। देश के सबसे लोकप्रिय और सोशल मीडिया पर करोड़ों प्रशंसकों वाले ऑनलाइन शिक्षक के कोचिंग संस्थान 'खान ग्लोबल स्टडीज' के बाहर हुई हिंसक घटना ने अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे मामले में तब खलबली मच गई जब पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संस्थान की सुरक्षा में तैनात दो निजी अंगरक्षकों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटनाक्रम ने न केवल शिक्षा जगत को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि कानूनी गलियारों में भी इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या इस मामले की आंच अब सीधे तौर पर संस्थान के मुख्य संचालक तक पहुंचने वाली है।
इस विवाद की शुरुआत जून महीने की शुरुआत में हुई थी, जब देर रात करीब पंद्रह से बीस असामाजिक तत्वों के एक समूह ने कोचिंग संस्थान के परिसर पर अचानक धावा बोल दिया था। हमलावरों ने न केवल दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की और पथराव किया, बल्कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट भी की। इस घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो तेजी से प्रसारित होने लगे, जिसमें अफरा-तफरी के माहौल के बीच हवा में गोलियां चलाई जाती हुई दिख रही थीं। शुरुआत में इस घटना को केवल प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थानों के बीच की आपसी रंजिश और ईर्ष्या के रूप में देखा जा रहा था, क्योंकि पीड़ित शिक्षक का हमेशा से यह दावा रहा है कि वे बेहद कम फीस में रिकॉर्ड परिणाम देते हैं, जिससे अन्य व्यापारिक प्रतियोगी उनसे बुरी तरह चिढ़े हुए हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों निजी अंगरक्षकों ने पूछताछ के दौरान एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दिया है जिसने पूरे मामले का रुख ही बदल दिया है। सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया है कि परिसर के बाहर जब स्थिति अनियंत्रित हो रही थी, तब उन्होंने स्वयं अपनी मर्जी से नहीं बल्कि अपने मालिक यानी मुख्य शिक्षक के सीधे और स्पष्ट आदेश पर अपनी लाइसेंसी राइफलों से हवाई फायरिंग की थी।
सुरक्षाकर्मियों द्वारा किए गए इस बड़े खुलासे के बाद पटना पुलिस प्रशासन ने मामले की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर कदमकुआन थाना पुलिस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए दोनों अंगरक्षकों, जिनकी पहचान प्रदीप कुमार और तालेश्वर सिंह के रूप में हुई है, को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ये दोनों सुरक्षाकर्मी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और इन्हें नोएडा की एक सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से तैनात किया गया था। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई .315 बोर की दो लाइसेंसी राइफलों को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया है और दागी गई गोलियों की पुष्टि के लिए इन्हें फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री जांच के लिए भेज दिया है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।
इस मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम तब उठाया गया जब पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस बात की पुष्टि की कि मुख्य शिक्षक को भी इस संबंध में दर्ज की गई नई प्राथमिक रिपोर्ट (एफआईआर) में नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून की नजर में किसी को भी, चाहे वह कितना ही प्रतिष्ठित क्यों न हो, सरेआम हवाई फायरिंग करने या इसके लिए उकसाने का अधिकार नहीं है। पुलिस की एक विशेष टीम ने कोचिंग सेंटर के भीतर जाकर मुख्य शिक्षक से प्रारंभिक पूछताछ भी की है और उन्हें बहुत जल्द विस्तृत जांच और बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने में तलब किए जाने की तैयारी चल रही है, जिसके चलते उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती हुई दिखाई दे रही है।
इस पूरे हिंसक टकराव के पीछे पटना के विशाल कोचिंग उद्योग में चल रही आंतरिक और गलाकाट प्रतिस्पर्धा को मुख्य वजह माना जा रहा है। इस घटना के बाद एक अन्य नजदीकी और प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान 'ज्ञान बिंदु' के निदेशक रोशन आनंद और उनके कुछ सहयोगियों को भी पुलिस ने हिंसा भड़काने और हमला करने के आरोप में गिरफ्तार कर बेउर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में हजारों की संख्या में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर कैंडल मार्च निकाला और प्रदर्शन किया, जिससे स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। इस बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य के शिक्षा विभाग ने भी कड़ा रुख अपनाया है और घोषणा की है कि कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती इस हिंसक प्रतिद्वंद्विता और कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आगामी तीन महीनों के भीतर एक बेहद सख्त और व्यापक नियामक नीति तैयार की जाएगी।
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