ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी चेतावनी, CJP के आंदोलनों से दूर रहने का आह्वान किया

देश की राजधानी दिल्ली में इस समय विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी

Jun 6, 2026 - 12:17
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी चेतावनी, CJP के आंदोलनों से दूर रहने का आह्वान किया
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी चेतावनी, CJP के आंदोलनों से दूर रहने का आह्वान किया
  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन पर धार्मिक गुरु का बड़ा बयान, युवाओं के भविष्य को लेकर जताई गंभीर चिंता
  • सोशल मीडिया के बहकावे में न आने की नसीहत, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम नौजवानों को कानून के दायरे में रहने की दी सलाह

देश की राजधानी दिल्ली में इस समय विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी पृष्ठभूमि में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रमुख इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देश के मुस्लिम युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अपील जारी की है। मौलाना रजवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच तेजी से पैर पसार रहे एक नए संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शनों और उनकी गतिविधियों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा है कि इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय कुछ ताकतें अपने छिपे हुए एजेंडे और राजनीतिक फायदों के लिए देश के भोले-भले नौजवानों को मोहरा बनाने का प्रयास कर रही हैं, जिससे हर किसी को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।

धार्मिक गुरु ने अपनी इस विस्तृत अपील में स्पष्ट रूप से कहा है कि मुस्लिम युवाओं को ऐसे किसी भी संगठन या आंदोलन का हिस्सा बनने से पूरी तरह बचना चाहिए, जिनकी नीतियां और इरादे पूरी तरह स्पष्ट न हों। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले विभिन्न प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए जिस तरह से युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए लामबंद किया जा रहा है, वह चिंताजनक है। मौलाना का मानना है कि युवाओं का मुख्य ध्यान अपनी शिक्षा, करियर और समाज की बेहतरी पर होना चाहिए, न कि किसी अनाम या सोशल मीडिया पर रातों-रात खड़े हुए संगठनों के बहकावे में आकर अपनी ऊर्जा को नष्ट करने में। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे आंदोलनों में शामिल होने वाले युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है, जिससे उनके पूरे परिवार को भारी मानसिक और सामाजिक कष्ट झेलना पड़ता है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया है कि डिजिटल मंचों पर दिए जाने वाले आक्रामक और तीखे नारों से प्रभावित होकर कोई भी कदम उठाना आत्मघाती साबित हो सकता है। कानून-व्यवस्था का सम्मान करना और शांतिपूर्ण जीवन जीना ही किसी भी सभ्य समाज की पहली पहचान होती है, इसलिए किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का हिस्सा बनने से युवाओं को पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

इस्लामी विद्वान ने आगे कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण ढंग से असहमति जताने का अधिकार देता है, परंतु इसके लिए स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं और मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य है। जब कोई संगठन अपनी गतिविधियों के जरिए व्यवस्था को चुनौती देने या समाज में टकराव पैदा करने का प्रयास करता है, तो उसके परिणाम हमेशा गंभीर होते हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज के अभिभावकों और बुजुर्गों से भी यह जिम्मेदारी उठाने की बात कही है कि वे अपने बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें यह समझाएं कि वे किसी भी ऐसे डिजिटल बहकावे का शिकार न बनें, जो उनके करियर में कानूनी अड़चनें पैदा कर सकता हो।

इस पूरे मामले के राजनीतिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए मौलाना ने साफ तौर पर कहा कि आज के दौर में कुछ ताकतें युवाओं के असंतोष और उनकी भावनाओं को भुनाने की ताक में रहती हैं। परीक्षाओं में गड़बड़ी या अन्य सामाजिक मुद्दों के नाम पर युवाओं को सड़कों पर उतारना और फिर उन्हें राजनीतिक सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल करना एक पुरानी रणनीति रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने युवाओं से यह अपील की है कि वे अपनी बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल करें और किसी भी संगठन की सदस्यता लेने या उनके प्रदर्शनों में शामिल होने से पहले उनके वास्तविक उद्देश्यों और उनके नेतृत्व की पृष्ठभूमि की अच्छे से जांच-परख कर लें, ताकि बाद में पछताना न पड़े।

मौलाना रजवी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि देश में शिक्षा, रोजगार और तरक्की के कई नए रास्ते खुल रहे हैं और मुस्लिम समाज के युवाओं को अपनी पूरी ताकत इन सकारात्मक क्षेत्रों में लगानी चाहिए। प्रशासनिक सेवाओं, तकनीकी क्षेत्रों और व्यापार जगत में युवा अपनी काबिलियत के दम पर आगे बढ़ रहे हैं, जो पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। ऐसे में किसी भी प्रकार के अनियोजित और विवादित आंदोलनों का हिस्सा बनकर अपनी छवि खराब करना या कानूनी पचड़ों में पड़ना किसी भी समझदारी का संकेत नहीं हो सकता। उन्होंने शांति, सौहार्द और देश की तरक्की में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने को ही युवाओं का असली लक्ष्य बताया है।

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