सीतापुर में बोले अपर मुख्य सचिव बीएल मीना: किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, सरकारी योजनाओं का करें व्यापक प्रचार
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव बीएल मीना ने सीतापुर के सिधौली में बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण किया। किसानों को जोड़ने के निर्देश दिए।
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
सिधौली में अपर मुख्य सचिव बीएल मीना का स्थलीय निरीक्षण, ड्रिप सिंचाई और सहजन की आधुनिक खेती देख जताई प्रसन्नता, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
उत्तर प्रदेश में कृषि, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बदलाव लाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी सिलसिले में उद्यान, रेशम एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीना ने प्रशासनिक अमले के साथ सीतापुर जिले के सिधौली क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने इलाके में संचालित विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं और बागवानी से जुड़े कार्यों का जमीन पर उतरकर बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए परिसर में पौधरोपण भी किया। अधिकारियों संग समीक्षा करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी नीतियों और योजनाओं का फायदा हर हाल में अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
सफर के दौरान अपर मुख्य सचिव ने वित्त नियंत्रक संजय कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर दीक्षा जोशी और सिधौली के एसडीएम अवनीश कुमार के साथ सलेमपुर और मनवा गांव का रुख किया। वहां उन्होंने राज्य सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत अनुदान पाकर स्थापित हुई हिलेरी फ्लफ प्राइवेट लिमिटेड नामक इकाई की कार्यप्रणाली को देखा। इसके बाद उन्होंने मनवा गांव में ही 'ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के जरिए विवेक सिंह चौहान द्वारा आधुनिक ड्रिप सिंचाई तकनीक से तैयार किए गए अमरूद के विशाल बाग का जायजा लिया और उन्नत तौर-तरीकों की सराहना की।
निरीक्षण की इसी कड़ी में अधिकारी गाजीपुर गांव पहुंचे, जहां एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत जेवीकेएस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर सहजन की खेती की जा रही थी। वहां लगी सहजन प्रसंस्करण इकाई को देखकर उन्होंने ग्रामीण रोजगार की दिशा में इसे बेहतर कदम बताया। बीएल मीना ने जिला उद्यान अधिकारी सहित सभी मौजूद जिम्मेदारों को सख्त निर्देश दिए कि वे ग्रामीण इलाकों में चौपाल और बैठकों के जरिए विभागीय योजनाओं का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक खेती की जगह जब तक आम किसान आधुनिक तकनीकों और नई सरकारी योजनाओं को नहीं अपनाएगा, तब तक उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होगी, इसलिए कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया जाए।
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