Hapur: ग्रामीणों की सजगता से उजागर हुआ यूरिया कालाबाजारी का खेल, 225 कट्टे सीज
सरकार की सख्ती और निगरानी के बावजूद सब्सिडी वाले नीम लेपित यूरिया के अवैध इस्तेमाल और कालाबाजारी का खेल
हापुड़। सरकार की सख्ती और निगरानी के बावजूद सब्सिडी वाले नीम लेपित यूरिया के अवैध इस्तेमाल और कालाबाजारी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को ग्रामीणों की सजगता ने किसानों के हक पर डाका डालने की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। देहात क्षेत्र के ग्राम असरा मुरादपुर में यूरिया से भरा एक ट्रक पलटने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। सूचना पर पहुंची कृषि विभाग की टीम ने सब्सिडी वाले यूरिया के 225 कट्टों को कब्जे में लेकर सीज कर दिया।
जानकारी के अनुसार, मेरठ से निकला एक ट्रक प्रधानमंत्री जन उर्वरक परियोजना के तहत मिलने वाले भारत यूरिया (नीम लेपित यूरिया) के कट्टे लेकर जा रहा था। शुक्रवार सुबह असरा मुरादपुर गांव के पास चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया और ट्रक सड़क किनारे पलट गया। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
ग्रामीणों ने जब ट्रक में लदे कट्टों की जांच की तो उन पर भारत यूरिया नीम लेपित यूरिया लिखा मिला, जिसे यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया जाता है। इससे ग्रामीणों को आशंका हुई कि किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद को अवैध रूप से कहीं और पहुंचाया जा रहा है।
बताया जाता है कि मामले की भनक लगते ही ट्रक चालक ने संबंधित फर्म मालिक को सूचना दी। इसके बाद करीब 15-16 मजदूरों की मदद से यूरिया के कट्टों को दूसरे वाहन में स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता के चलते इसकी सूचना कृषि विभाग तक पहुंच गई।
सूचना मिलते ही जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कराई। जांच में सामने आया कि यूरिया का परिवहन बिना वैध बिल और आवश्यक दस्तावेजों के किया जा रहा था। इसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 225 कट्टे यूरिया को सीज कर दिया। साथ ही मामले में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने ग्रामीणों की जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि किसानों के लिए उपलब्ध सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं किसान मनवीर ने बताया कि संदेह होने पर उन्होंने तुरंत विभाग को सूचना दी थी।
अब ग्रामीणों और किसानों की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि यह यूरिया खेप कहां से आई थी और इसे किस उद्देश्य से तथा किस ठिकाने पर पहुंचाया जा रहा था। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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