Anil Menon ISS Mission: नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 8 महीने के मिशन पर ISS रवाना, रूस के दो जांबाज भी साथ

Anil Menon ISS Mission: नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और दो रूसी अंतरिक्ष यात्री सोयूज एमएस-29 यान के जरिए 8 महीने के मिशन पर आईएसएस के लिए रवाना हो गए हैं।

Jul 15, 2026 - 12:37
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Anil Menon ISS Mission: नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 8 महीने के मिशन पर ISS रवाना, रूस के दो जांबाज भी साथ
Soyuz MS-29 Launch
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  • Space Launch: बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक रवाना, नासा के अनिल मेनन और दो रूसी अंतरिक्ष यात्री सवार

अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए नासा (NASA) के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और दो रूसी अंतरिक्ष यात्री मंगलवार (14 जुलाई 2026) को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हो गए हैं। यह महत्वपूर्ण उड़ान कजाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज एमएस-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान के जरिए भरी गई। भारतीय समयानुसार रात आठ बजकर 17 मिनट पर हुए इस सफल प्रक्षेपण के साथ ही तीनों अंतरिक्ष यात्रियों का आठ महीने लंबा मिशन आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। इस मिशन का उद्देश्य आईएसएस पर वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाना है। आगे की राह में, यह यान कुछ ही घंटों में अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचेगा, जहां पहले से मौजूद क्रू मेंबर्स इनका स्वागत करेंगे और नए वैज्ञानिक प्रयोगों की शुरुआत होगी।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के मानवीय मिशनों की कड़ी में यह एक बेहद प्रतिष्ठित प्रक्षेपण है। नासा के चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल अनिल मेनन के साथ रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोसमोस (Roscosmos) के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना इस दल का हिस्सा हैं। सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान इन तीनों वैज्ञानिकों को लेकर पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित अंतरिक्ष प्रयोगशाला की ओर बढ़ रहा है। यह मिशन इस मायने में बेहद खास है क्योंकि यह आठ महीने तक चलेगा, जो सामान्य छह महीने के मिशन की तुलना में अधिक लंबा है। इस दौरान तीनों अंतरिक्ष यात्री भारहीनता (Microgravity) के वातावरण में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और भविष्य के मंगल मिशनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयोगों को अंजाम देंगे।

मंगलवार की शाम कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम पर तकनीकी और मौसम संबंधी सभी मानक पूरी तरह अनुकूल पाए जाने के बाद उल्टी गिनती शुरू हुई। भारतीय समय के मुताबिक रात ठीक 8:17 बजे सोयूज बूस्टर रॉकेट ने गर्जना के साथ रात के आसमान को चीरते हुए उड़ान भरी। प्रक्षेपण के कुछ ही मिनटों बाद रॉकेट के विभिन्न चरण सफलतापूर्वक अलग हो गए और यान ने अपनी निर्धारित कक्षा में प्रवेश कर लिया। कंट्रोल रूम में मौजूद नासा और रोसकोसमोस के वैज्ञानिकों ने मिशन के शुरुआती चरण को पूरी तरह सफल घोषित किया है। अब यह अंतरिक्ष यान आईएसएस के साथ डॉकिंग (जुड़ने) की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष में आगे बढ़ रहा है, जिसे तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासनिक अधिकारियों ने दल को बधाई देते हुए कहा कि अनिल मेनन और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री विज्ञान की नई सीमाओं को छूने जा रहे हैं, जो पूरी मानवता के लिए मददगार साबित होगा। वहीं रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोसमोस ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि भू-राजनीतिक मोर्चों पर जारी वैश्विक बदलावों के बावजूद अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पूरी मजबूती और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत में भी अनिल मेनन की इस यात्रा को लेकर विज्ञान प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि भारतीय मूल के वैज्ञानिकों का वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में नेतृत्व करना हमेशा से देश के लिए गर्व का विषय रहा है।

इस लंबे अंतरिक्ष मिशन का सीधा प्रभाव भविष्य के सुदूर अंतरिक्ष अभियानों पर पड़ेगा। आठ महीने की लंबी अवधि के दौरान अनिल मेनन और उनकी टीम अंतरिक्ष स्टेशन पर उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम, जैव प्रौद्योगिकी और खगोलीय भौतिकी से जुड़े दर्जनों नए प्रयोगों को पूरा करेगी। यह डेटा नासा के आगामी आर्टेमिस (Artemis) मून मिशन और भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने की तैयारियों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा। इसके अतिरिक्त, इस सफल लॉन्चिंग ने वैश्विक स्तर पर यह संदेश दिया है कि शांतिपूर्ण वैज्ञानिक सहभागिता के लिए अंतरिक्ष एक ऐसा मंच है जहां दुनिया के अग्रणी देश साझा हितों के लिए एक साथ काम कर सकते हैं।

सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान अब आईएसएस के साथ स्वचालित डॉकिंग प्रक्रिया को अंजाम देने के करीब है। अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने के बाद हैच (दरवाजा) खोला जाएगा और अनिल मेनन, प्योत्र डुब्रोव तथा अन्ना किकिना वहां पहले से तैनात अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिलकर कार्यभार संभालेंगे। यह आठ महीने का मिशन अगले वर्ष की शुरुआत में पूरा होगा, जिसके बाद यह दल सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटेगा। इस दौरान पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर लगातार उनके स्वास्थ्य और अंतरिक्ष स्टेशन की प्रणालियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए रखेगा।

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