MP : पुलिस का गजब कारनामा- 1000 से ज्यादा मामलों में केवल 6 गवाह बार-बार इस्तेमाल, ड्राइवर ने 500 केस में दी गवाही, इन पर गिरी गाज

CCTNS पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड्स से यह पैटर्न स्पष्ट हुआ है कि अलग-अलग तारीखों, स्थानों और घटनाओं में एक ही गवाहों के नाम बार-बार दर्ज हैं। कानून के अनुसार गवाह निष्पक्ष

By INA News Desk
Jan 15, 2026 - 00:55
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MP : पुलिस का गजब कारनामा- 1000 से ज्यादा मामलों में केवल 6 गवाह बार-बार इस्तेमाल, ड्राइवर ने 500 केस में दी गवाही, इन पर गिरी गाज
MP : पुलिस का गजब कारनामा- 1000 से ज्यादा मामलों में केवल 6 गवाह बार-बार इस्तेमाल, ड्राइवर ने 500 केस में दी गवाही, इन पर गिरी गाज
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  • लौर और नईगढ़ी थानों के CCTNS रिकॉर्ड से खुलासा, चुनिंदा 6 लोगों को सैकड़ों FIR में सरकारी गवाह बनाया गया
  • मऊगंज जिले में पुलिस गवाह सिंडिकेट का खुलासा, एक ड्राइवर और रसोइया 500 मामलों में गवाह, जांच में थाना प्रभारी हटाए गए

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज 1000 से अधिक मामलों में महज 6 व्यक्तियों को ही बार-बार सरकारी गवाह बनाया गया है, जिसमें थाने के ड्राइवर और रसोइए जैसे लोग शामिल हैं और एक व्यक्ति ने 500 से अधिक मामलों में गवाही दी बताई गई है। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज 1000 से अधिक आपराधिक मामलों में केवल 6 व्यक्तियों को सरकारी गवाह के रूप में बार-बार इस्तेमाल किया गया है। यह चौंकाने वाला खुलासा पुलिस के अपने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) पोर्टल के रिकॉर्ड्स की जांच से सामने आया है। इन मामलों में आबकारी एक्ट, मारपीट, चोरी, NDPS जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं और गवाहों को एक ही दिन में 6-7 अलग-अलग घटनाओं में चश्मदीद दिखाया गया है।

इन 6 गवाहों में सबसे प्रमुख नाम अमित कुशवाहा का है, जो नईगढ़ी थाने का वाहन चालक है और 500 से अधिक मामलों में गवाह के रूप में दर्ज किया गया है। अन्य गवाहों में दिनेश कुशवाहा शामिल है, जो सब्जी विक्रेता है और थाने में खाना बनाने का काम करता है, उसका नाम 100 से अधिक मामलों में आया है। राहुल विश्वकर्मा और अन्य व्यक्ति भी दर्जनों मामलों में गवाह बताए गए हैं। कई गवाहों ने बताया कि उन्हें केस की पूरी जानकारी नहीं दी गई और उन्होंने जहां कहा गया वहां हस्ताक्षर कर दिए, जबकि कुछ को यह तक पता नहीं था कि वे किस मामले में गवाह हैं।

CCTNS पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड्स से यह पैटर्न स्पष्ट हुआ है कि अलग-अलग तारीखों, स्थानों और घटनाओं में एक ही गवाहों के नाम बार-बार दर्ज हैं। कानून के अनुसार गवाह निष्पक्ष और स्वतंत्र होने चाहिए, लेकिन यहां चुनिंदा व्यक्तियों को 'प्रोफेशनल गवाह' या 'पॉकेट विटनेस' की तरह इस्तेमाल किया गया है। इस प्रथा से पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और मामलों की वैधता संदिग्ध हो गई है।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी की शिकायत पर हुआ, जिन्होंने 2022 में शिकायत दर्ज की और दिसंबर 2025 में विस्तृत सबूत साझा किए। शिकायत में 145 FIRs का जिक्र है जहां सामान्य गवाह हैं। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर को पद से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया है। मऊगंज एसपी दिलीप कुमार सोनी ने मामले की जांच एसडीओपी को सौंपी है और जांच जारी बताई है। रिकॉर्ड्स के अनुसार यह पैटर्न वर्ष 2000 से अब तक के मामलों में देखा गया है। गवाहों में सफाईकर्मी और अन्य थाने से जुड़े लोग भी शामिल हैं। कई मामलों में गवाहों की एक साथ कई जगह मौजूदगी असंभव लगती है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ऐसे गवाहों का इस्तेमाल कैसे और क्यों किया गया?

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