महाशिवरात्रि : शिव-पार्वती विवाह नहीं, ज्योतिर्लिंग प्राकट्य और आध्यात्मिक जागरण के साथ विवाह से ज्यादा अनंत ज्योतिर्लिंग और योग साधना की पावन रात्रि

महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी 2026 को पड़ रहा है। चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन

Feb 15, 2026 - 10:53
 0  3
महाशिवरात्रि : शिव-पार्वती विवाह नहीं, ज्योतिर्लिंग प्राकट्य और आध्यात्मिक जागरण के साथ विवाह से ज्यादा अनंत ज्योतिर्लिंग और योग साधना की पावन रात्रि
महाशिवरात्रि : शिव-पार्वती विवाह नहीं, ज्योतिर्लिंग प्राकट्य और आध्यात्मिक जागरण के साथ विवाह से ज्यादा अनंत ज्योतिर्लिंग और योग साधना की पावन रात्रि

 

महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज मनाया जा रहा है, जो भगवान शिव की आराधना, शिव-शक्ति के मिलन और आध्यात्मिक जागरण की रात के रूप में जाना जाता है। यह दिन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि शिव के अनंत स्वरूप, तांडव नृत्य और योग साधना की महत्ता को समझने का अवसर प्रदान करता है।

महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी 2026 को पड़ रहा है। चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि का मुख्य उत्सव 15 फरवरी की रात्रि में मनाया जाता है, विशेषकर निशीथ काल में। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है। सामान्य धारणा है कि महाशिवरात्रि महादेव और माता पार्वती के विवाह का दिन है। कई मान्यताओं में इसे शिव-पार्वती के विवाह के रूप में देखा जाता है, जो शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है। यह मिलन पुरुष (चेतना) और प्रकृति (ऊर्जा) के संतुलन को दर्शाता है।

हालांकि महाशिवरात्रि केवल शिव-पार्वती के विवाह का दिन नहीं है। यह शिव के अनंत ज्योतिर्लिंग स्वरूप के प्राकट्य की रात भी है। लिंग पुराण और शिव पुराण के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद के दौरान भगवान शिव एक अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। यह ज्योतिर्लिंग निराकार, अनंत और अविनाशी है, जिसका कोई आरंभ या अंत नहीं। यह घटना लिंगोद्भव के नाम से जानी जाती है, जहां शिवलिंग की अवधारणा सामने आई। शिवलिंग मूर्ति नहीं, बल्कि उस अनंत चेतना का प्रतीक है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था। यह नृत्य सृष्टि, पालन और संहार के चक्र का प्रतीक है। तांडव सृष्टि के विस्तार, संरक्षण और विनाश को दर्शाता है। कुछ कथाओं में कहा गया है कि इस रात शिव ने ब्रह्मांड में तांडव किया, जो सृष्टि के चक्र को दर्शाता है।

यह पर्व योग साधना और त्याग की महत्ता को भी रेखांकित करता है। महाशिवरात्रि आध्यात्मिक जागरण की रात है। इस रात जागरण, ध्यान, मंत्र जाप और साधना से मन की शुद्धि होती है। भक्त व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और चार प्रहर में पूजा करते हैं। निशीथ काल विशेष महत्वपूर्ण है, जहां शिव की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति संभव मानी जाती है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और अन्य सामग्री चढ़ाई जाती है। उपवास रखा जाता है और शिव मंत्रों का जाप किया जाता है। इस दिन की साधना हजार गुना फलदायी मानी जाती है।

कुछ कथाओं में समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को शिव ने ग्रहण किया, जिससे वे नीलकंठ बने। हालांकि मुख्य रूप से महाशिवरात्रि ज्योतिर्लिंग प्राकट्य और शिव-शक्ति मिलन से जुड़ी है। यह पर्व शिव के विभिन्न रूपों को समर्पित है - वैरागी से गृहस्थ तक, रुद्र से शांत तक। महाशिवरात्रि पर भक्त शिव की कृपा से अहंकार का नाश, संयम और आंतरिक शांति प्राप्त करते हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष संयोग बन रहे हैं, जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग और अन्य राजयोग, जो साधना को और फलदायी बनाते हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow