Moradabad: मेयर के भाई की फैक्ट्री पर अटका फ्लाईओवर प्रोजेक्ट, PWD और मेयर आमने-सामने, सियासत गरमाई। 

शहर के विकास से जुड़ा पंडित नगला बाईपास फ्लाईओवर प्रोजेक्ट इन दिनों प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव

Mar 4, 2026 - 00:19
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Moradabad: मेयर के भाई की फैक्ट्री पर अटका फ्लाईओवर प्रोजेक्ट, PWD और मेयर आमने-सामने, सियासत गरमाई। 
मेयर के भाई की फैक्ट्री पर अटका फ्लाईओवर प्रोजेक्ट, PWD और मेयर आमने-सामने, सियासत गरमाई। 

मुरादाबाद। शहर के विकास से जुड़ा पंडित नगला बाईपास फ्लाईओवर प्रोजेक्ट इन दिनों प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव का कारण बन गया है। सर्विस रोड निर्माण को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब खुलकर सियासी बहस का विषय बन चुका है। मामला उस जमीन से जुड़ा है, जहां सर्विस रोड प्रस्तावित है और वहीं पर बीजेपी मेयर विनोद अग्रवाल के भाई की फैक्ट्री स्थित बताई जा रही है।

क्या है पूरा विवाद?

लोक निर्माण विभाग (PWD) का दावा है कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और अन्य प्रभावित भू-स्वामियों से जमीन पहले ही खाली कराई जा चुकी है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि जब जमीन सरकारी है तो मुआवजे का प्रश्न ही नहीं उठता।

वहीं दूसरी ओर मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि यह उनकी पारिवारिक संपत्ति है और बिना उचित मुआवजे के जमीन नहीं दी जाएगी। इसी असहमति के चलते फ्लाईओवर से जुड़ी सर्विस रोड का निर्माण कार्य अटका हुआ है।

प्रभारी मंत्री की बैठक में गरमाया मामला

हाल ही में प्रभारी मंत्री अनिल चौधरी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक का उद्देश्य शहर के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था, लेकिन अधिकांश समय इसी विवाद पर चर्चा होती रही।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान तीखी नोकझोंक भी हुई। मेयर ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि फ्लाईओवर की तकनीकी ड्राइंग तैयार करते समय उनसे राय नहीं ली गई। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तकनीकी स्वीकृति प्रक्रिया में मेयर की मंजूरी अनिवार्य नहीं होती।

बताया जाता है कि मेयर ने यह भी शिकायत की कि संबंधित अधिकारी उनके फोन कॉल तक रिसीव नहीं करते। उन्होंने प्रभारी मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

मंत्री की टिप्पणी से बढ़ी हलचल

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री अनिल चौधरी की एक टिप्पणी भी चर्चा में आ गई। उन्होंने कहा कि शहर ने मेयर परिवार को कई अवसर दिए हैं, ऐसे में शहरहित में थोड़ी सी जमीन बिना मुआवजे के देने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

सियासी गलियारों में बढ़ी सरगर्मी

सूत्रों के मुताबिक, मेयर के विरोधी इस मामले को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस परियोजना को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

शहर के ट्रैफिक और विकास के लिहाज से अहम माने जा रहे पंडित नगला बाईपास फ्लाईओवर प्रोजेक्ट का भविष्य फिलहाल प्रशासनिक निर्णय और राजनीतिक सहमति पर टिका नजर आ रहा है।

अब देखना यह है कि विकास की राह में खड़ा यह विवाद आपसी सहमति से सुलझता है या फिर सियासी टकराव और गहराता है।

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