सीतापुर में कांग्रेस के भीतर शुरू हुआ घमासान, सांसद के सुरक्षा घेरे में तैनात कर्मियों पर हाथापाई करने का आरोप
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले सीतापुर जनपद से कांग्रेस पार्टी के भीतर की
- सांसद और युवा प्रवक्ता के बीच गहराया आपसी विवाद, पार्टी की अंदरूनी कलह आई सार्वजनिक रूप से सामने,
- संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची अनुशासनहीनता की शिकायत, गुटबाजी के कारण आगामी राजनीतिक जमीन पर संकट के आसार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले सीतापुर जनपद से कांग्रेस पार्टी के भीतर की एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली संगठनात्मक कलह खुलकर सबके सामने आ गई है। स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूती देने का दावा करने वाले वरिष्ठ नेताओं के बीच का आपसी तालमेल इस कदर बिगड़ चुका है कि अब यह सीधे तौर पर आपसी टकराव और विवाद का रूप ले चुका है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, सीतापुर लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा कांग्रेस सांसद राकेश राठौर और युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता के बीच किसी विषय को लेकर तीखी बहस हो गई, जिसने देखते ही देखते एक बड़े हंगामे का रूप धारण कर लिया। यह पूरा विवाद उस समय और अधिक बढ़ गया जब दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक स्थान पर ही मर्यादित आचरण की सीमाएं टूट गईं। इस अप्रत्याशित घटना ने न केवल स्थानीय कांग्रेस कमेटी के भीतर व्याप्त गुटबाजी को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरी पार्टी की छवि पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक और संगठनात्मक कार्यक्रम के दौरान तैयार हुई, जहाँ जनपद के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए थे। बैठक के दौरान जब युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ने स्थानीय मुद्दों, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान की धीमी गति को लेकर अपनी बात रखनी शुरू की, तो वहाँ उपस्थित सांसद राकेश राठौर इस बात पर पूरी तरह से भड़क गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांसद ने युवा प्रवक्ता की बातों को अपने व्यक्तिगत राजनीतिक वर्चस्व और कार्यशैली पर एक सीधे हमले के रूप में लिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहसबाजी शुरू हो गई और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। सांसद ने अपने पद और रसूख का हवाला देते हुए युवा नेता को सार्वजनिक रूप से कड़ी फटकार लगानी शुरू कर दी, जिससे बैठक में मौजूद अन्य कार्यकर्ता भी हतप्रभ रह गए और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी।
बात केवल शाब्दिक बहस और फटकार तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इस मामले ने तब और अधिक हिंसक रूप ले लिया जब सांसद के निजी सुरक्षा घेरे में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर युवा नेता के साथ अभद्रता और शारीरिक मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा। पीड़ित युवा प्रवक्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, जब उन्होंने सांसद की नाराजगी और तीखे व्यवहार का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया, तो सांसद के इशारे पर उनके अंगरक्षकों ने उन्हें जबरन धक्का दिया और उनके साथ हाथापाई की। सार्वजनिक रूप से एक सम्मानित पदाधिकारी के साथ सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई इस तरह की बदसलूकी के कारण कार्यक्रम स्थल पर भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। युवा कांग्रेस के अन्य समर्थकों ने इस कृत्य का कड़ा विरोध किया, जिसके कारण दोनों गुटों के बीच धक्का-मुक्की और टकराव की स्थिति और अधिक उग्र हो गई। इस घटना के तुरंत बाद पीड़ित युवा कांग्रेस नेता ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मिलकर स्थानीय पुलिस प्रशासन और पार्टी के प्रदेश मुख्यालय को इस पूरे मामले की लिखित जानकारी साझा की है, जिससे यह आंतरिक कलह अब एक आधिकारिक विवाद बन चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने सीतापुर जिले में कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही उस पुरानी और गहरी गुटबाजी को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है, जिसे अब तक दबाने का प्रयास किया जा रहा था। जिले के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा पिछले काफी समय से इस बात को लेकर असंतुष्ट चल रहा था कि क्षेत्र में नए आए नेताओं और उनके करीबियों को संगठन में जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, युवा कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि वे जमीनी स्तर पर संघर्ष करके पार्टी का आधार मजबूत कर रहे हैं, लेकिन जब वे अपनी बात शीर्ष स्तर पर रखते हैं, तो उनके साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार किया जाता है। इस घटना के बाद से जिले के तमाम युवा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए हैं, जिससे पूरी जिला इकाई दो धड़ों में विभाजित होती नजर आ रही है।
सीतापुर में घटित हुई इस गंभीर अनुशासनहीनता की गूंज अब देश की राजधानी दिल्ली और प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित कांग्रेस के शीर्ष सांगठनिक कार्यालयों तक भी पहुंच चुकी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर के प्रभारियों ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए स्थानीय नेतृत्व से पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट तलब की है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, आलाकमान इस बात से बेहद नाराज है कि सार्वजनिक रूप से इस तरह के विवादों के कारण विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए सरकार विरोधी अभियानों से ध्यान भटकाने का एक बड़ा मुद्दा मिल जाता है। संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान को शांत करने के लिए एक विशेष जांच समिति के गठन पर भी विचार किया जा रहा है, जो दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज करके अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह रोका जा सके।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यदि इस पूरे प्रकरण का विश्लेषण किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि इस तरह की आंतरिक कलह आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को बेहद नुकसान पहुंचा सकती है। सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने एक लंबे अंतराल और कड़े संघर्ष के बाद अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस हासिल किया था, लेकिन नेताओं के बीच का यह अहम् और टकराव कार्यकर्ताओं के मनोबल को पूरी तरह से तोड़ने का काम कर रहा है। जब जमीनी स्तर का कार्यकर्ता अपने ही वरिष्ठ नेताओं को आपस में लड़ते और एक-दूसरे पर शारीरिक हमला करते हुए देखता है, तो उसका चुनावी जनसंपर्क और जनता के बीच जाने का उत्साह समाप्त हो जाता है। यदि समय रहते इस विवाद को सुलझाया नहीं गया, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ विपक्षी दलों को मिलना तय है, जो पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी खोई हुई पकड़ को मजबूत करने की फिराक में बैठे हैं।
What's Your Reaction?




