गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित 'औद्योगिक गलियारे' के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सम्भल: जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) को लेकर विरोध की आग सुलग

Jun 15, 2026 - 17:05
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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित 'औद्योगिक गलियारे' के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित 'औद्योगिक गलियारे' के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

उवैस दानिश, सम्भल

सम्भल: जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) को लेकर विरोध की आग सुलग उठी है। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान और खेतिहर मजदूर जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे और इस परियोजना का कड़ा विरोध जताया।

  • ​उपजाऊ जमीन छीनकर बेरोजगार बना रही सरकार

​प्रदर्शनकारी किसानों का मुख्य आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ खेती योग्य भूमि हड़प रही है। संगठन के नेता हरेंद्र सिंह ने कहा, सम्भल में भूमि अत्यंत उपजाऊ है, जहाँ किसान साल में तीन फसलें उगाकर न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, बल्कि सैकड़ों मजदूरों को रोजगार भी प्रदान करते हैं। सरकार द्वारा यह जमीन उद्योगपतियों को सौंपने से किसान और मजदूर दोनों ही पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे।

  • ​सरकारी दावों पर सवालिया निशान

​किसान नेताओं ने सरकार के रोजगार सृजन के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि सरकार के पास बेरोजगारों को देने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपजाऊ जमीन छीनी गई, तो आने वाले समय में किसानों के बच्चों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।

  • ​उद्योगपति जमीन बेचकर हो जाते हैं फरार

​हरेंद्र सिंह ने अतीत के उदाहरण देते हुए कहा, पहले भी कई उद्योग स्थापित किए गए थे, लेकिन उद्योगपति जमीन का लाभ उठाकर और कारखाने बंद करके चले गए। वर्ष 2024 में ही देश में डेढ़ लाख से अधिक कारखाने बंद हुए, जिससे लाखों मजदूरों की छंटनी हुई। औद्योगिक गलियारे के नाम पर वही इतिहास दोहराया जा रहा है; उद्योगपति कुछ समय के लिए उद्योग चलाएंगे और फिर जमीन बेचकर निकल जाएंगे, जिसका खामियाजा केवल किसान को भुगतना पड़ेगा।

  • ​चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

​विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन को पूंजीपतियों के हवाले नहीं होने देंगे और इसके लिए वे अपना आंदोलन तेज करेंगे।

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