UP के शामली में उच्च शिक्षित हिंदू युवक के सुनियोजित धर्मांतरण से हड़कंप, जिम ट्रेनर युवती की आड़ में रची गई बड़ी साजिश
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित शामली जनपद में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक
- पाकिस्तानी धर्मगुरुओं के वीडियो से किया गया 'ब्रेनवॉश', करोड़ों की पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए दिल्ली में कराया गया था सीक्रेट निकाह
- पुलिस ने मुख्य आरोपी पिता-पुत्री को किया गिरफ्तार, दिल्ली और मुंबई के मौलानाओं समेत दस पर मुकदमा दर्ज कर एसआईटी गठित
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित शामली जनपद में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक प्रतिष्ठित हिंदू दवा कारोबारी के इकलौते और उच्च शिक्षित पुत्र आयुष मलिक को एक सोची-समझी रणनीति के तहत जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराने का प्रयास किया गया। इस सनसनीखेज घटनाक्रम की भनक जब पीड़ित परिवार और स्थानीय सामाजिक संगठनों को लगी, तो पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्राथमिक जांच के अनुसार, यह कोई सामान्य प्रेम प्रसंग का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठित नेक्सस काम कर रहा था जिसका मुख्य उद्देश्य युवक का मानसिक रूप से पूर्ण धर्मांतरण कराकर उसे अपने परिवार और मूल समाज से पूरी तरह अलग करना था। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और इस पूरे नेक्सस की परतों को खोलने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है।
इस पूरी साजिश की शुरुआत शामली शहर के एक स्थानीय फिटनेस सेंटर यानी जिम से हुई थी, जहां पीड़ित युवक आयुष मलिक नियमित रूप से जाता था। वहां उसकी मुलाकात एक महिला जिम ट्रेनर और फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी से हुई, जिसने एक सोची-समझी और पूर्व नियोजित साजिश के तहत युवक से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं। पीड़ित के पिता, जो स्थानीय मेडिकल एसोसिएशन के सम्मानित अध्यक्ष भी हैं, द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के मुताबिक, चांदनी और उसके पिता ने मिलकर उनके बेटे को पूरी तरह से अपने प्रभाव में ले लिया था। युवक को जाल में फंसाने के बाद उसका मानसिक रूप से इस कदर ब्रेनवॉश किया गया कि उसने धीरे-धीरे अपनी मूल धार्मिक पहचान को छोड़ना शुरू कर दिया, जिसकी जानकारी उसके सगे परिजनों को बहुत देर से हुई।
साजिशकर्ताओं ने युवक को पूरी तरह से बदलने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लिया, जिसका सीधा संबंध सीमा पार की ताकतों से जुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आयुष मलिक को पाकिस्तान के कुछ बेहद कट्टरपंथी और भड़काऊ धर्मगुरुओं के वीडियो और ऑडियो क्लिप्स लगातार दिखाए और सुनाए जाते थे। इन विदेशी वीडियो के माध्यम से युवक के मन में उसके अपने धर्म और परिवार के प्रति गहरी नफरत और दूरी पैदा की गई। मानसिक प्रताड़ना और लगातार किए गए ब्रेनवॉश का असर यह हुआ कि युवक ने अपनी दाढ़ी बढ़ानी शुरू कर दी और घर के भीतर ही छिप-छिपकर नमाज पढ़नी शुरू कर दी। जब परिजनों ने उसकी बदलती जीवनशैली और हरकतों पर आपत्ति जताई, तो उसने अपने ही माता-पिता से दूरी बना ली और घर छोड़कर जाने की धमकियां देने लगा।
विदेशी फंडिंग और नेक्सस की जांच
पुलिस प्रशासन को संदेह है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल और सुनियोजित धर्मांतरण मामलों के पीछे बड़े पैमाने पर अवैध वित्तीय लेन-देन और विदेशी फंडिंग शामिल हो सकती है। पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के डिजिटल लिंक सामने आने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियां और राज्य की एटीएस (एंटी टेरर स्क्वाड) भी सक्रिय हो गई हैं, जो इस पूरे नेटवर्क के बैंक खातों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहराई से स्क्रूटनी कर रही हैं।
इस पूरे खेल का जो सबसे भयावह और आर्थिक पहलू सामने आया है, वह पीड़ित परिवार की करोड़ों रुपये मूल्य की अचल और पैतृक संपत्ति को पूरी तरह से हड़पने का एक गुप्त एजेंडा था। दवा कारोबारी का बेटा होने के नाते आयुष अपने माता-पिता की विशाल संपत्ति और पारिवारिक व्यवसाय का इकलौता वारिस है। आरोपी युवती और उसके पिता की नजर इसी भारी-भरकम संपत्ति पर थी, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली की एक सुदूरवर्ती मस्जिद में ले जाकर आयुष का नाम बदलकर 'मोहम्मद अली' रख दिया और बेहद गोपनीय तरीके से एक 'सीक्रेट' निकाह संपन्न करा लिया। इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए कूट रचित और जाली दस्तावेजों का सहारा लिया गया, ताकि भविष्य में इस निकाहनामे के आधार पर परिवार की सभी संपत्तियों पर कानूनी रूप से दावा ठोका जा सके।
मामले की गंभीरता और चौतरफा बढ़ते सामाजिक दबाव को देखते हुए शामली के पुलिस अधीक्षक ने त्वरित और बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी जिम ट्रेनर चांदनी और उसके पिता को काजीवाड़ा इलाके से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके साथ ही, इस पूरे अवैध मतांतरण और जालसाजी के खेल में शामिल दिल्ली और मुंबई के तीन प्रभावशाली मौलवियों समेत कुल दस नामजद और कई अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम की बेहद सख्त और गैर-जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस विशाल रैकेट और अंतर-राज्यीय नेक्सस का पूरी तरह से पर्दाफाश करने के लिए पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है, जो दिल्ली और मुंबई में छापेमारी कर रही है।
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद शामली और उसके आस-पास के मुजफ्फरनगर और बागपत जिलों में भी सामाजिक संगठनों का गुस्सा पूरी तरह से भड़क उठा है। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक और विभिन्न रक्षा दलों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त गैंगस्टर एक्ट लगाने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी पीड़ित दवा कारोबारी के समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखकर सामूहिक एकजुटता प्रदर्शित की है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ समय रहते कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह क्षेत्र की सामाजिक समरसता, शांतिपूर्ण माहौल और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर संकट बन जाएगा।
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