Uma Shankar Singh Story: जब रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने बच्चों के क्रिकेट के लिए रातों-रात हटवा दिया था बालू, पढ़ें पुराना किस्सा
रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का एक पुराना किस्सा सामने आया है, जब उन्होंने ठेकेदारी के दिनों में बच्चों के क्रिकेट पिच से रातों-रात बालू हटवाकर अपना वादा निभाया था।
- Rasra MLA Uma Shankar Singh: पूर्व जिला पंचायत सदस्य से विधायक बनने तक का सफर, बच्चों से किया वादा निभाने का दिलचस्प किस्सा
- 'बच्चों का खेल नहीं रुकना चाहिए': जब रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने पूरा किया बच्चों से किया वादा, जानें बहादुरपुर का अनसुना किस्सा
- Unheard Story: रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का जनसेवा और आत्मीयता से भरा पुराना किस्सा आया सामने
By Vijay Laxmi Singh (Editor- In- Chief)
उत्तर प्रदेश की राजनीति और बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में अपनी खास पहचान रखने वाले बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह के जनसेवा और सहज व्यक्तित्व से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। वर्ष 2007-08 के दौरान जब उमाशंकर सिंह विधायक नहीं थे और पूर्व जिला पंचायत सदस्य के रूप में लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारी करते थे, तब बहादुरपुर स्थित उनके आवासीय परिसर के पास बच्चों के खेलने की जगह बाधित हो गई थी। स्थानीय बच्चों के आग्रह पर उन्होंने न केवल उनकी बात संजीदगी से सुनी, बल्कि 24 घंटे के भीतर निर्माण सामग्री हटवाकर अपना वादा पूरा किया। यह वाकया उनके सार्वजनिक जीवन में जनता के साथ जुड़ाव और निष्ठा की एक अनूठी मिसाल के रूप में देखा जाता है।
राजनीतिक जीवन में कई बार बड़े-बड़े वादों और दावों के बीच छोटी-छोटी बातें नेताओं के असल व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। बलिया के रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह के शुरुआती दिनों का एक संस्मरण स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में है। यह घटना करीब दो दशक पुरानी (वर्ष 2007-08) है, जब उमाशंकर सिंह बहादुरपुर में अपने मकान के दूसरे तल का निर्माण करवा रहे थे। उस समय उनके मकान के निर्माण कार्य के लिए आई गिट्टी और बालू पास स्थित एक छोटे से पार्क में गिरा दी गई थी। यह पार्क स्थानीय बच्चों का प्राथमिक क्रिकेट ग्राउंड हुआ करता था। बालू सीधे पिच पर गिर जाने के कारण बच्चों का खेलना बंद हो गया था। जब बच्चों की टोली ने झिझकते हुए उनसे गुहार लगाई, तो उमाशंकर सिंह ने सहजता दिखाते हुए अगले ही दिन वहां से बालू हटवा दिया।
पूरा घटनाक्रम बहादुरपुर आवासीय कॉलोनी से जुड़ा है, जो स्थानीय विधायक उमाशंकर सिंह का तत्कालीन कार्यक्षेत्र और निवास स्थल हुआ करता था। उस दौर में उमाशंकर सिंह पूर्व जिला पंचायत सदस्य थे और लोक निर्माण विभाग में एक ठेकेदार के रूप में अपनी पहचान बना रहे थे। उनके मकान के निर्माण कार्य के लिए एक ट्रक गिट्टी और एक ट्रक बालू मंगवाई गई थी, जिसे खाली जगह की कमी के चलते पार्क के भीतर गिरा दिया गया। इत्तेफाक से बालू की पूरी ढेरी बच्चों के बनाए गए क्रिकेट पिच के ठीक ऊपर गिर गई।
नतीजतन, बहादुरपुर और आसपास के 10 से 13 वर्ष की आयु के 15-20 बच्चों का रोज शाम को होने वाला क्रिकेट मैच रुक गया। दो-तीन दिनों तक बच्चे मैदान पर आते और खेल न पाने के कारण निराश होकर लौट जाते। चौथे दिन जब बच्चों को पता चला कि उमाशंकर सिंह अपने आवास पर मौजूद हैं, तो वे अपनी बात रखने उनके मुख्य द्वार पर पहुंचे। वहां गाड़ियों का काफिला खड़ा था और सुरक्षाकर्मियों व सहयोगियों के बीच उमाशंकर सिंह बैठक कर रहे थे। बच्चे अंदर जाने से झिझक रहे थे और कई बार बाहर से ही झांककर वापस लौट जा रहे थे।
इसी बीच, मोहल्ले के ही एक व्यक्ति जो उमाशंकर सिंह के साथ मौजूद थे, बाहर आए और बच्चों की हिचकिचाहट देखकर कारण पूछा। जब बच्चों ने बताया कि पिच से बालू हटवाना है ताकि वे फिर से क्रिकेट खेल सकें, तो यह बात हंसते हुए उमाशंकर सिंह तक पहुंचाई गई। बच्चों की मासूमियत देखकर वहां मौजूद सभी लोग मुस्कुरा दिए। उमाशंकर सिंह ने बच्चों को देखते हुए आश्वासन दिया कि वे जल्द ही बालू हटवा देंगे। बच्चों से किया गया यह वादा महज़ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि अगले ही दिन शाम तक पूरी बालू वहां से हटवा दी गई और बच्चों का खेल फिर से शुरू हो गया।
इस पुराने किस्से को याद करते हुए स्थानीय लोगों का कहना है कि उमाशंकर सिंह का जनता से जुड़ाव बहुत पुराना है। बहादुरपुर के निवासियों का मानना है कि जो व्यक्ति छोटे बच्चों की छोटी सी समस्या को इतनी संजीदगी से ले सकता है, वही आगे चलकर एक सफल जनप्रतिनिधि बनता है। जब इस घटना के करीब चार साल बाद वे पहली बार विधायक चुने गए, तो पूरे क्षेत्र और मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ गई थी। स्थानीय लोग उन्हें अपने परिवार और पड़ोस के एक भरोसेमंद सदस्य के रूप में देखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमाशंकर सिंह की कार्यशैली ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनके साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों का काफिला कोई नया नहीं है, बल्कि 20-30 सालों से उनके साथ मजबूती से खड़ा है। आज के राजनीतिक दौर में जहां नेता और कार्यकर्ता तेजी से पाला बदलते हैं, वहीं उमाशंकर सिंह के समर्थकों की यह दीर्घकालिक निष्ठा उनकी जनस्वीकार्यता और व्यवहारकुशलता का सीधा प्रमाण है।
यह संस्मरण दर्शाता है कि किसी नेता का अपने जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के साथ आत्मीय संबंध कैसे बनता है। बहादुरपुर क्षेत्र का इतिहास दो बड़े नेताओं के सानिध्य से समृद्ध रहा है, जहां एक ओर सिकंदरपुर विधानसभा से विधायक रहे स्व. राजधारी सिंह का निवास स्थान था, तो वहीं दूसरी ओर उमाशंकर सिंह का घर भी मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। बचपन से इन जनप्रतिनिधियों को काम करते देखने वाली पीढ़ी पर इनके सकारात्मक कार्यों का गहरा प्रभाव पड़ा है। इस तरह के वाकये यह साबित करते हैं कि जमीनी राजनीति में जनता का दिल जीतने के लिए किसी पद का होना आवश्यक नहीं है, बल्कि नीयत और संवेदनशीलता सबसे ज्यादा मायने रखती है।
उमाशंकर सिंह आज रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके सामाजिक और राजनीतिक जीवन के ऐसे अनेक किस्से हैं जो आज भी उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों के बीच उत्साहपूर्वक सुने और सुनाए जाते हैं। बहादुरपुर की उस छोटी सी घटना से शुरू हुआ विश्वास का यह सिलसिला आज पूरे रसड़ा और बलिया जिले में एक मजबूत राजनीतिक आधार बन चुका है। आने वाले समय में भी उनकी यह छवि उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पूंजी बनी रहेगी।
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