NEET UG पेपर लीक: CBI का सनसनीखेज खुलासा, परीक्षा से 72 घंटे पहले ही सॉल्वर गैंग के पास पहुंच गए थे सवाल
NEET UG पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट से बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार परीक्षा से तीन दिन पहले ही प्रश्न पत्र लीक कर हल कराया गया था।
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दायर चार्जशीट ने हलचल मचा दी है। जांच एजेंसी द्वारा अदालत में दाखिल औपचारिक दस्तावेजों से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि परीक्षा आयोजित होने से लगभग तीन दिन पहले ही प्रश्न पत्र आरोपियों के हाथ लग गया था। पटना सहित कई प्रमुख केंद्रों से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में आरोपियों ने संगठित गिरोह बनाकर पेपर को हासिल किया और परीक्षा से पहले विशेष सॉल्वर गैंग की मदद से इसे हल करवाया। सीबीआई की इस चार्जशीट के सामने आने के बाद अब पूरे नेटवर्क में शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं की कानूनी जवाबदेही तय करने और मामले की आगे की अदालती सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) में हुई धांधली और पेपर लीक मामले में अपनी विस्तृत चार्जशीट अदालत के समक्ष पेश कर दी है। दाखिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार, जांच एजेंसी ने जांच में पाया है कि 5 मई को आयोजित हुई परीक्षा से ठीक तीन दिन पहले ही यानी मई के शुरुआती दिनों में प्रश्न पत्र लीक कर दिया गया था। इस मामले में जांच एजेंसी ने संगठित अपराध गिरोह के प्रमुख साजिशकर्ताओं, सॉल्वर गैंग के सदस्यों और पेपर एक्सेस करने वाले आरोपियों को नामजद किया है। सीबीआई द्वारा जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों से साफ हो गया है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसे काफी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था।
सीबीआई की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने एक मजबूत ढांचा तैयार किया था। परीक्षा से तीन दिन पहले जैसे ही प्रश्न पत्र लीक हुआ, उसे विशेष सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया। वहां पहले से मौजूद विषय विशेषज्ञों और एमबीबीएस छात्रों के सॉल्वर गैंग ने पूरे प्रश्न पत्र को हल किया। इसके बाद चुनिंदा अभ्यर्थियों को मोटी रकम के बदले उत्तर रटवाने के लिए विशेष सेंटरों पर बुलाया गया था।
जांच एजेंसी ने अपनी पड़ताल में डिजिटल साक्ष्यों, जले हुए प्रश्न पत्रों के अवशेषों, बैंक खातों के लेनदेन और मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग का सहारा लिया। शुरुआती स्तर पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मामले की शुरुआती कड़ियों को जोड़ा था, जिसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देशों पर मामला सीबीआई को सौंपा गया था। सीबीआई ने अपनी जांच का दायरा बिहार, झारखंड, गुजरात और राजस्थान तक बढ़ाते हुए दर्जनों ठिकानों पर छापेमारी की और प्रमुख मास्टरमाइंड्स को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की, जिसके आधार पर ही यह चार्जशीट तैयार की गई है।
चार्जशीट के खुलासे के बाद इस पूरे मामले पर अलग-अलग पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं आई हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी का कहना है कि उन्होंने निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर सबूत जुटाए हैं, जिससे अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में मदद मिलेगी। जांच अधिकारियों का मानना है कि चार्जशीट दाखिल होने से इस गिरोह के अंतिम छोर तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज होगी।
वहीं दूसरी ओर, लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों में इस खुलासे के बाद गहरा रोष है। छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा से तीन दिन पहले पेपर लीक होना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर नाकामी को दर्शाता है। अभ्यर्थियों के वकीलों का तर्क है कि इस तरह के बड़े लीक से ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। हालांकि, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का रुख यह रहा है कि वे व्यवस्था में सुधार के लिए जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दे रहे हैं और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के पक्षधर हैं।
सीबीआई की इस चार्जशीट के सार्वजनिक होने से देश की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की साख और उनकी सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर बनी धारणा पर पड़ा है। लाखों मेधावी छात्रों के मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करने के पीछे इस तरह के संगठित गिरोहों की भूमिका पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
इसके अलावा, इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली सभी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, क्वेश्चन पेपर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डिजिटल लॉकिंग सिस्टम की समीक्षा शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने भी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समितियों का गठन कर नियमों को सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही अब इस मामले में अदालती सुनवाई का दौर तेजी से शुरू होगा। विशेष अदालत में नामजद आरोपियों के खिलाफ आरोपों के तय होने (चार्ज फ्रेमिंग) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया है कि मामले में पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) भी दाखिल की जा सकती है, क्योंकि कुछ अन्य संदिग्धों और वित्तीय साक्ष्यों की जांच अभी भी जारी है।
दूसरी तरफ, इस मामले से सबक लेते हुए भविष्य में NEET UG सहित अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई-आधारित निगरानी और प्रश्न पत्र वितरण के नए तकनीकी मानकों को लागू करने की तैयारी की जा रही है। अदालत के अंतिम फैसले और सजा से यह तय होगा कि देश में पेपर लीक जैसी बुराई पर अंकुश लगाने में यह कानूनी कार्रवाई कितनी नजीर साबित होती है।
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