बेगूसराय अस्पताल में बड़ी लापरवाही: टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ता, जांच के आदेश

बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में एक घायल युवक के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन बांधने का वीडियो वायरल हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

By INA News Desk
Aug 7, 2026 - 17:45
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बेगूसराय अस्पताल में बड़ी लापरवाही: टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ता, जांच के आदेश
बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती घायल मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह बंधा कार्टन
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  • बिहार स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: बेगूसराय के मंझौल अस्पताल का वीडियो वायरल, गत्ते से किया इलाज
  • बिहार के सरकारी अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर: घायल युवक के पैर में प्लास्टर की जगह बांध दिया कार्टन
  • बेगूसराय: मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही, मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह गत्ता बांधा, हड़कंप

बिहार के बेगूसराय जिले से राज्य की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को उजागर करने वाली एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में सड़क दुर्घटना का शिकार होकर इलाज कराने पहुंचे एक घायल युवक के टूटे पैर पर चिकित्सकीय प्लास्टर लगाने के बजाय कार्डबोर्ड (गत्ता) बांध दिया गया। अस्पताल परिसर में बने इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य महकमे की इस गंभीर लापरवाही पर अब प्रशासन की नींद टूटी है और उच्च अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और अनुमंडलीय अस्पतालों में बुनियादी संसाधनों की उपलब्धता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल से चिकित्सा व्यवस्था की घोर लापरवाही का एक वीडियो तेजी से इंटरनेट पर प्रसारित हो रहा है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर पहुंचे एक युवा मरीज को प्राथमिक इलाज देने के नाम पर अस्पताल कर्मियों ने उसके क्षतिग्रस्त पैर में खपच्ची या प्लास्टर की जगह एक कागज़ का कार्टन यानी गत्ता लपेटकर पट्टी से बांध दिया। जब मरीज के परिजनों और वहां मौजूद लोगों ने इस अमानवीय और गैर-पेशेवर तरीके को देखा, तो उसका वीडियो बना लिया। वीडियो के सामने आते ही जिले से लेकर राज्य स्तर के स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई, जिसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल जांच टीम गठित करने का फैसला किया।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित युवक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था, जिसके बाद उसके पैर में गंभीर चोट आई और हड्डी में फ्रैक्चर होने की आशंका जताई गई। स्थानीय लोग उसे तत्काल प्राथमिक उपचार और बेहतर देखभाल की उम्मीद में मंझौल स्थित अनुमंडलीय अस्पताल लेकर आए। इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज को संभालने के दौरान मानक मेडिकल प्रक्रिया अपनाने के बजाय शॉर्टकट रास्ता चुना।

अस्पताल में उचित मेडिकल सपोर्ट स्ट्रक्चर या कॉटन-प्लास्टर की कमी का हवाला देते हुए अथवा घोर लापरवाही बरतते हुए, कर्मचारियों ने एक पुराना पैकेजिंग कार्टन का टुकड़ा काटा और उसे युवक के पैर के नीचे रखकर कपड़े की पट्टी से कस दिया। मरीज दर्द से कराहता रहा, लेकिन जिम्मेदार कर्मियों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर करने से पहले गत्ते का ही सहारा लिया। अस्पताल परिसर में मौजूद किसी प्रत्यक्षदर्शी ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जो देखते ही देखते व्यापक रूप से वायरल हो गया।

वीडियो के वायरल होते ही इस पर चौतरफा प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। जनमानस में इस बात को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है कि एक अनुमंडलीय स्तर के अस्पताल में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय सामग्रियां तक उपलब्ध नहीं हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को मानवाधिकारों का उल्लंघन और मरीजों के जीवन से खिलवाड़ बताया है।

मामला तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आए। जिला सिविल सर्जन ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और किसी भी स्थिति में ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अस्पताल प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब करते हुए जांच समिति का गठन किया है। सिविल सर्जन कार्यालय के अनुसार, जांच रिपोर्ट में यदि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। कागजों में और सरकारी दावों में भले ही अनुमंडलीय अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की बातें कही जाती हों, लेकिन हकीकत यह है कि बुनियादी प्राथमिक उपचार के सामान के लिए भी मरीजों को जूझना पड़ रहा है।

इस प्रकार की घटनाएं आम जनता का सरकारी अस्पतालों और वहां की चिकित्सा व्यवस्था से भरोसा कम करती हैं। प्राथमिक उपचार में इस तरह की लापरवाही से घायल व्यक्ति के अंग को स्थायी नुकसान पहुँचने अथवा संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इस वीडियो ने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं, पट्टियों और आपातकालीन उपकरणों की कमी के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

घटना के बाद पीड़ित मरीज को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल (सदर अस्पताल) में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां उसका समुचित इलाज शुरू किया गया है। दूसरी ओर, गठित जांच टीम मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल के स्टोर रजिस्टर, ड्यूटी रोस्टर और घटना के समय तैनात कर्मियों के बयानों की पड़ताल कर रही है।

उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन और विभागीय जांच जैसी ठोस कार्रवाई होगी। साथ ही, जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है कि बेगूसराय के सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में आवश्यक मेडिकल सप्लाई की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में किसी भी मरीज के साथ इस प्रकार की घटना न दोहराई जाए।

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