दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पैर टूटे मरीज को घसीटने का मामला, वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में मरीज के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
- DMCH Darbhanga: दरभंगा मेडिकल कॉलेज में मरीज के साथ कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
- डीएमसीएच दरभंगा में मरीज के साथ कथित बदसलूकी: वीडियो सामने आते ही मचा बवाल, जांच समिति गठित
- डीएमसीएच दरभंगा में मरीज के साथ कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल, अस्पताल प्रशासन ने शुरू की जांच
उत्तर बिहार के प्रमुख चिकित्सा केंद्र दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में एक उपचाराधीन मरीज के साथ अस्पताल कर्मियों द्वारा कथित रूप से अनुचित व्यवहार किए जाने का वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर दृश्य प्रसारित होने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य कर्मियों के संवेदनहीन रवैये को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि वीडियो की सत्यता और घटना में संलिप्त कर्मियों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। वीडियो में दिख रहा है कि एक पैर टूटे मरीज को वहां का गार्ड जमीन पर घसीटता नजर आ रहा है।
दरभंगा स्थित प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच के परिसर से एक मरीज के साथ कथित दुर्व्यवहार और तीखी नोकझोंक से जुड़ा वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में मरीज और उसके परिजनों के साथ अस्पताल के कुछ कर्मियों द्वारा अभद्र भाषा और असंवेदनशील व्यवहार करते हुए देखा जा रहा है।
अस्पताल में उपचार की आस लेकर पहुंचे पीड़ित पक्ष के साथ हुई इस कथित घटना का वीडियो किसी प्रत्यक्षदर्शी द्वारा रिकॉर्ड कर ऑनलाइन साझा किया गया, जिसके बाद से ही नागरिक समाज और स्थानीय लोगों में गहरा रोष देखा जा रहा है। मामले के तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य महकमे ने स्थिति का संज्ञान लिया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार एक मरीज अपने स्वास्थ्य संबंधी उपचार के लिए डीएमसीएच के संबंधित वार्ड में भर्ती था। उपचार प्रक्रिया अथवा चिकित्सीय सहायता प्राप्त करने के दौरान किसी बात को लेकर मरीज के तीमारदारों और ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कथित रूप से मरीज के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
घटनास्थल पर मौजूद अन्य लोगों के अनुसार मरीज की स्थिति नाजुक होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों का रवैया असहयोगात्मक रहा। विवाद के दौरान ही किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा कर दिया। वीडियो के व्यापक प्रसार के बाद अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और कर्मचारियों के व्यवहारिक आचरण को लेकर बहस छिड़ गई है।
मामला संज्ञान में आने के बाद डीएमसीएच प्रशासन ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि अस्पताल में मरीजों के सम्मान और उचित देखभाल के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार वायरल वीडियो के सभी पहलुओं और समय की पुष्टि की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ अथवा सुरक्षा कर्मी की प्रत्यक्ष संलिप्तता या दुर्व्यवहार प्रमाणित होता है, तो विभागीय नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर मरीज के परिजनों ने पूरे मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य असहाय मरीज के साथ इस प्रकार का व्यवहार न हो।
उत्तर बिहार के सबसे बड़े रेफरल अस्पतालों में गिने जाने वाले डीएमसीएच में प्रतिदिन हजारों की संख्या में दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस प्रकार की कथित घटनाओं से आम जनता के मन में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के प्रति अविश्वास की भावना पैदा होती है।
इस घटना के बाद अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा व सम्मान को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी स्वास्थ्य केंद्रों में मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।
अस्पताल प्रशासन ने प्रकरण की विस्तृत पड़ताल के लिए एक आंतरिक जांच दल का गठन किया है, जो वार्ड के सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का संकलन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक और सुधारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
इसके साथ ही भविष्य में मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने तथा विवाद की स्थितियों को टालने के लिए अस्पताल परिसर में हेल्प डेस्क और ग्रीवेंस सेल की सक्रियता को और अधिक सुदृढ़ करने की योजना बनाई जा रही है।
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