सहारनपुर में मेला बहिष्कार पर गरमाई राजनीति: पार्षद मंसूर बदर की भूमिका पर उठे सवाल
सहारनपुर में मेला बहिष्कार को लेकर पार्षद मंसूर बदर की भूमिका पर सवाल उठे हैं। छड़ी पूजन और कांवड़ यात्रा के बाद मेले पर अलग रुख को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
जनपद में इन दिनों स्थानीय मेला बहिष्कार का प्रकरण राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस का कारण बना हुआ है। मेले को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच अब नगर निगम के पार्षद मंसूर बदर की भूमिका को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। नगर क्षेत्र में इस बात को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है कि छड़ी पूजन और कांवड़ यात्रा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान आगे बढ़कर सक्रियता दिखाने वाले पार्षद का मेले के बहिष्कार को लेकर अलग और असमंजस भरा रुख क्यों दिखाई दे रहा है।
स्थानीय स्तर पर एक अन्य पार्षद द्वारा सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया गया है कि एक तरफ जहां मेला बहिष्कार की बातें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मंसूर बदर के करीबी साथी पार्षद मेले की गतिविधियों और व्यवस्थाओं में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस विरोधाभासी स्थिति के सामने आने के बाद आम नागरिकों और राजनीतिक जानकारों के बीच तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब पूर्व के सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में समन्वय और सक्रिय भागीदारी निभाई गई थी, तो अब मेले के विषय पर यह भिन्न दृष्टिकोण किस मंशा से अपनाया जा रहा है।

पूरा विवाद अब इस बिंदु पर केंद्रित हो गया है कि क्या मेला बहिष्कार को लेकर सभी पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की राय एक समान है अथवा इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आगामी स्थानीय राजनीति, शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक समीकरणों की अलग गोटियां बिछाई जा रही हैं। इस दोहरे रुख को लेकर क्षेत्र में असंतोष और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि इन तमाम आरोपों और उठ रहे सवालों को लेकर पार्षद मंसूर बदर अथवा उनके सहयोगी पार्षदों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका विधिवत पक्ष आने के बाद ही इस पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।
What's Your Reaction?