सहारनपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान: टोल प्लाजा पर 33 बसों की जांच, यात्रियों से सीधा संवाद
सहारनपुर में एसएसपी के नेतृत्व में यातायात पुलिस का सघन जांच अभियान। टोल प्लाजा पर 33 स्लीपर व रोडवेज बसों के सुरक्षा उपकरणों की जांच कर यात्रियों को किया जागरूक।
यात्रियों के सुगम एवं सुरक्षित सफर को सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से सहारनपुर यातायात पुलिस ने एक व्यापक 'मीट एंड ग्रीट' अभियान चलाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनन्दन के नेतृत्व और यातायात प्रभारी अमित तोमर के संयोजन में पुलिस टीमों ने जिले के प्रमुख टोल प्लाजा पर अंतरराज्यीय स्लीपर और सरकारी डिपो की बसों की सघन जांच की। इस विशेष अभियान के तहत सरसावा टोल प्लाजा, जैनपुरा टोल प्लाजा और सय्यद माजरा टोल प्लाजा पर कुल 33 बसों को रोककर उनके तकनीकी और सुरक्षा मानकों का गहन परीक्षण किया गया।
जांच प्रक्रिया के दौरान पुलिस टीम ने बसों के भीतर स्थापित अग्निशामक यंत्रों (फायर एक्स्टिंग्विशर) की क्रियाशीलता, आपातकालीन खिड़कियों व निकास द्वारों (इमरजेंसी एग्जिट), प्राथमिक चिकित्सा किट (फर्स्ट एड बॉक्स) और सीट बेल्ट की वास्तविक स्थिति को बारीकी से परखा। पुलिस अधिकारियों ने बसों में यात्रा कर रहे नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय सुरक्षा उपायों का उपयोग करने के तरीके समझाए। यात्रियों को बताया गया कि यात्रा के दौरान किसी भी आकस्मिक दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में आपातकालीन निकास का उपयोग कैसे किया जाता है।
यातायात प्रभारी अमित तोमर ने बस चालकों और परिचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से निर्धारित वर्दी पहनें और गति सीमा का कड़ाई से पालन करें। इसके अतिरिक्त लंबी दूरी की बसों में नींद की झपकी और थकान से बचने के लिए उचित अंतराल पर विश्राम लेने तथा शराब पीकर वाहन न चलाने की सख्त हिदायत दी गई। चालकों को हिदायत दी गई कि बसों में क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाएं और किसी भी स्थिति में सुरक्षा मानकों के साथ समझौता न करें।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक यात्री को उसके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाना परिवहन तंत्र और पुलिस दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य केवल चालान काटना या दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बस संचालकों, चालकों और आम जनता में सुरक्षा के प्रति व्यवहारिक जागरूकता पैदा करना है। आपातकालीन परिस्थितियों में बरती गई थोड़ी सी पूर्व सावधानी किसी भी बड़े सड़क हादसे को टाल सकती है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की जीवन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के औचक जांच अभियान निरंतर जारी रहेंगे।
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