'मैं ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करता', बृजभूषण शरण सिंह और कंगना रनौत के बयानों पर बाबा रामदेव का पलटवार
योग गुरु बाबा रामदेव ने बृजभूषण शरण सिंह और कंगना रनौत के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह ओछे लोगों पर टिप्पणी कर विवाद नहीं बढ़ाना चाहते।
- बृजभूषण और कंगना के तीखे हमलों पर बोले बाबा रामदेव: पूरा देश जानता है मैं क्या हूं, विवाद नहीं बढ़ाना चाहता
- बृजभूषण और कंगना के बयानों पर बाबा रामदेव का करारा जवाब: कहा- 'मैं ओछे लोगों पर नहीं करता टिप्पणी'
- बाबा रामदेव का तीखा पलटवार: बृजभूषण शरण सिंह और कंगना रनौत के बयानों पर टिप्पणी करने से किया इनकार
योग गुरु बाबा रामदेव ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और भाजपा सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा उनके खिलाफ दिए गए बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं द्वारा हाल ही में की गई तीखी बयानबाजी को लेकर जब मीडिया कर्मियों ने उनसे सवाल पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे ऐसे ओछे लोगों पर टिप्पणी करके किसी विवाद को तूल नहीं देना चाहते। बाबा रामदेव ने कहा कि पूरा देश भली-भांति जानता है कि वे क्या हैं और उनका जीवन किस उद्देश्य के लिए समर्पित है। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है।
हाल के दिनों में सार्वजनिक मंचों पर विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। इस कड़ी में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने अलग-अलग प्रसंगों में योग गुरु बाबा रामदेव पर तीखे जुबानी हमले किए थे। इन बयानों के व्यापक प्रसार के बाद जब मीडिया प्रतिनिधियों ने बाबा रामदेव से उनकी राय जाननी चाही, तो उन्होंने दोनों नेताओं का सीधे तौर पर नाम लिए बिना कड़े शब्दों में जवाब दिया।
बाबा रामदेव ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि वे अनावश्यक विवादों में उलझने के बजाय अपने रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित रखना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनकी सच्चाई और उनके कार्यों से परिचित है, इसलिए वे ओछी मानसिकता वाली टिप्पणियों का उत्तर देकर किसी भी व्यर्थ की बहस को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि कुछ दिन पहले तब शुरू हुई जब बाबा रामदेव ने प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी और सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के पुराने आंदोलनों, स्वदेशी उत्पादों और पतंजलि के सामानों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तीखा तंज कसा था।
दूसरी तरफ, एक अन्य विषय पर की गई टिप्पणी को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बाबा रामदेव पर निशाना साधा था और उनके पुराने विवादों तथा विज्ञापनों से जुड़े अदालती मामलों का हवाला देते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। दोनों प्रमुख हस्तियों की ओर से आए इन हमलों को लेकर जब बाबा रामदेव से सवाल किया गया, तो उन्होंने पूरे प्रकरण को खारिज करते हुए अपनी संक्षिप्त और दो-टूक प्रतिक्रिया दी।
बाबा रामदेव के समर्थकों और संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि योग गुरु ने हमेशा राष्ट्र निर्माण, स्वदेशी आंदोलन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका मानना है कि कुछ लोग मात्र सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं, जिसका उत्तर देना समय की बर्बादी है।
वहीं दूसरी ओर, बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों का तर्क है कि वे अपने सार्वजनिक बयानों में सदैव बेबाक रहे हैं और उन्होंने मुद्दों के आधार पर ही अपनी बात रखी थी। कंगना रनौत के पक्ष के लोगों का कहना है कि उनकी प्रतिक्रिया उनके आत्मसम्मान और विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति थी। इस प्रकार तीनों पक्षों के अपने-अपने तर्क और दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
इस जुबानी जंग का असर न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से देखा जा रहा है। अलग-अलग खेमों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के बयानों का वीडियो और पोस्ट साझा कर एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक टकराव से पार्टी और संगठनों के भीतर की असहजता उजागर होती है, विशेषकर तब जब बयान देने वाले अधिकांश चेहरे एक ही विचारधारा या निकटवर्ती पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं।
इसके साथ ही यह घटनाक्रम दर्शाता है कि सार्वजनिक जीवन में बयानबाजी की सीमाएं किस तरह लगातार संवेदनशील होती जा रही हैं, जहां किसी एक मुद्दे पर कही गई बात तेजी से व्यक्तिगत आक्षेपों में तब्दील हो जाती है।
बाबा रामदेव के इस पलटवार के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बृजभूषण शरण सिंह या कंगना रनौत की तरफ से कोई नई प्रतिक्रिया आती है या फिर यह विवाद यहीं शांत हो जाएगा। फिलहाल बाबा रामदेव ने अपनी ओर से विषय को विराम देने का संकेत दे दिया है। हालांकि, सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों में इस मुद्दे पर चर्चा अभी कुछ समय तक जारी रहने की संभावना है।
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