Special Article: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद की आड़ में हिंदू धर्म का अपमान
विगत 31 जुलाई 2026 को राजनीतिक विरोध के अधिकार के नाम पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र धारणकर संसद भवन के
लेखक: मृत्युंजय दीक्षित
विगत 31 जुलाई 2026 को राजनीतिक विरोध के अधिकार के नाम पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र धारणकर संसद भवन के परिसर में नाटक खेला; राहुल, अखिलेश, डिंपल, अवधेश आदि ने उसमें विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं और अन्य विरोधी दलों के सांसदों ने हंसते हुए तालियां बजाकर इस नाटक का आनंद लिया। यह घटना हिंदू धर्म व सनातन प्रतीकों का अत्यंत निर्लज्ज अपमान है। इस नाटक के दौरान प्रभु श्रीराम लला का जो चित्र पप्पू यादव के हाथ में था उसे उन्होंने सपा सांसद अवधेश प्रसाद के जूतों के पास रखा और जमीन पर रगड़ा। यह सब तब किया गया जब राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच सुपीम कोर्ट की सलाह से बनाई गई एसआईटी कर रही है।
पिछले कुछ समय से मुस्लिम तुष्टिकरण में संलिप्त रहने वाले इंडी गठबंधन के नेताओं ने हिंदू समाज पर हमलों को तीव्र कर दिया है। इन दलों व नेताओं को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि हिंदू सनातन व भगवा वस्त्र के अपमान पर खून का घूँट पी लेता है, सड़क पर उतार कर अराजकता नहीं करता किंतु उचित समय आने पर ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखा देता है। एक बार वामपंथी लेखक /नाटककार मुद्राराक्षस से गोस्वामी तुलसीदास का मजाक बनाया था उसके बाद मुद्राराक्षस साहित्यिक मंचों के अछूत पुरूष हो गये थे। महान चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन की पेटिंग्स करोड़ों में बिकती थी किंतु जब उन्होंने हिंदू देवी -देवताओं की नग्न व अश्लील पेंटिंग्स बनाईं तो भागकर एक अरब देश की शरण में जाकर गुमनाम जीवन जीना पड़ा।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर देश भर के करोड़ों पुजारियों और संतों का घोर अपमान किया है। हमारे भगवाधारी आद्य ऋषियों से लेकर आज तक की समस्त भगवाधारी परंपरा का अपमान किया है। यही कारण है कि आज केवल संत समाज ही नहीं अपितु सपूर्ण हिंदू समाज आहत है। इस घटना से आहत व आक्रोशित संत समाज का कहना है कि इस प्रहसन से राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद जैसे सांसदों की घटिया मानसिकता उजागर हुई है। जगद्गुरू परमहंस आचार्य कहा कि इन लोगों को ऐसी जगह दिखा देनी चाहिए जहाँ से वे कभी देश की सर्वोच्च पंचायत तक पहुँचने का सपना भी न देख सकें। संत समाज का कहना है कि संत समाज ने अभी तक गैर भाजपा दलों के प्रति उदारता दिखाई लेकिन अब यह सिद्ध हो गया है कि विपक्ष हमेशा सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है। जिन सांसदों ने पप्पू यादव का सहयोग किया वो भी देश के लिए दुर्भाग्य हैं। संत समाज ऐसे सांसदों के संसद में प्रवेश प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है।
यहां पर एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या ये लोग पादरी या मौलाना की वेशभूषा धारण करके या क्रॉस, बुर्का आदि पहन करके अन्य धर्मों का मजाक बना सकते हैं ? नहीं कर सकते हैं। अगर किसी ने गलती से कभी कर भी दिया तो ”सिर तन से जुदा” हो सकता है। यह सभी दल मुस्लिम व अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के दलदल में इतना धंस चुके हैं कि शायद वापसी का रास्ता ही नहीं बचा है और उन सभी लोगों को प्रसन्न रखने के लिए इनको हिंदू सनातन समाज को अपमानित करने के लिए प्रहसन खेलते ही रहने होंगे।
चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाते हुए यह लोग इतना बहक गये हैं कि समस्त मर्यादा ही भूल गये हैं। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने विरोध करते -करते ये पूछ लिया कि,“ मोदी की सीता कौन हैं?“ इस प्रश्न से वो किसका अपमान कर रहे थे? क्या हिंदुओें की सहिष्णुता को उनकी कमजोरी मानकर उनके प्रतीकों पर हमले किये जाते रहेंगे? आज सपा विधायक विधानसभा में सवाल पूछ रहे हैं कि चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, किंतु हिंदू समाज को वह बयान भी याद है जब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ”अयोध्या दीपोत्सव” में दीपक जलाने का विरोध किया था और मजाक बनाते हुए कहा था कि दीपक नहीं मोमबत्ती जलानी चाहिए।
भारत का हिंदू समाज हजारों वर्षों से अपनी आस्था,परंपरा और संस्कृति को लेकर जीता आया है। उसने बहुत कुछ सहा है फिर भी अपनी संस्कृति, परंपरा और आराध्यों के प्रति उसकी श्रद्धा अटूट बनी रही किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि हर दिन उसकी सहनशीलता की परीक्षा ली जाए। हिंदू समाज समय आने पर ऐसे अराजक तत्वों को सही उत्तर अवश्य देगा। चढ़ावा चोरी से हिंदू समाज आहत अवश्य है किन्तु मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है। हिन्दू समाज अपने देश की न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास करता है। इस मामले की आड़ में विरोधी दल जो कर रहे हैं वह विकृत राजनीति से परे और कुछ नहीं हैं।
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