Chandrashekhar Azad News: डॉ. रोहिणी घावरी लौटीं भारत, नगीना सांसद पर फिर उठाए सवाल; सियासी पारा चढ़ा

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर आरोप लगाने वाली डॉ. रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड से भारत लौट आई हैं। स्वदेश आते ही उन्होंने सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर बयान दिया है।

By INA News Desk
Sep 12, 2026 - 13:23
10 Views
Chandrashekhar Azad News: डॉ. रोहिणी घावरी लौटीं भारत, नगीना सांसद पर फिर उठाए सवाल; सियासी पारा चढ़ा
  • Chandrashekhar Azad News: डॉ. रोहिणी घावरी लौटीं भारत, नगीना सांसद पर फिर उठाए सवाल; सियासी पारा चढ़ा
  • Rohini Ghavari Returns: स्विट्जरलैंड से भारत लौटते ही रोहिणी घावरी का बड़ा बयान, चंद्रशेखर आजाद और भीम आर्मी पर लगाए आरोप
  • UP Politics: सांसद चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा विवाद फिर गरमाया, भारत लौटीं डॉ. रोहिणी घावरी ने सुरक्षा को लेकर कही यह बात
  • Nagina MP Chandrashekhar Azad: रोहिणी घावरी की स्वदेश वापसी से चर्चा तेज, जानिए क्या है पूरा मामला और नया घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पिछले वर्ष सांसद पर गंभीर आरोप लगाने वाली दलित अधिकार कार्यकर्ता और शोधकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड से भारत लौट आई हैं। भारत आगमन के बाद उन्होंने सार्वजनिक माध्यमों पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव या भय के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने किसी का प्रत्यक्ष नाम लिए बिना यह भी रेखांकित किया कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी सीधी जवाबदेही नगीना सांसद और उनके संगठन भीम आर्मी की होगी। उनके इस नए वक्तव्य के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

  • स्वदेश वापसी पर दिया कड़ा संदेश

भारत लौटने के बाद डॉ. रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह डरकर घर बैठने वालों में से नहीं हैं और न ही वह किसी से सुरक्षा की गुहार लगाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगी और न ही किसी प्रभाव में बिकेंगी।

रोहिणी ने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जाहिर करते हुए यह बात सार्वजनिक रूप से कही कि यदि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो उसके लिए संबंधित पक्ष को ही जिम्मेदार माना जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने हालिया संक्षिप्त बयान में सीधे तौर पर नाम लेने से परहेज किया, लेकिन संदर्भ और पूर्व में दिए गए बयानों के आधार पर यह स्पष्ट माना जा रहा है कि उनका इशारा नगीना सांसद और उनसे जुड़े संगठनों की तरफ ही था।

  • क्या था पूरा विवाद?

यह विवाद करीब एक वर्ष पुराना है, जब डॉ. रोहिणी घावरी ने चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर व्यक्तिगत और सामाजिक आरोप लगाए थे। उस समय रोहिणी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय थीं और संयुक्त राष्ट्र (UN) के सम्मेलनों में भागीदारी को लेकर चर्चा में आई थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों में रुकावट डालने की कोशिश की गई और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

दूसरी तरफ, उस दौरान चंद्रशेखर आजाद के समर्थकों और भीम आर्मी से जुड़े पदाधिकारियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। आजाद समाज पार्टी के प्रतिनिधियों का कहना था कि यह सब एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि उनके नेता की सामाजिक छवि और बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को नुकसान पहुंचाया जा सके। पार्टी नेताओं का यह भी तर्क था कि चुनावी और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से विरोधियों द्वारा इस प्रकार के व्यक्तिगत आक्षेप लगाए जाते रहे हैं।

  • राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में प्रतिक्रियाएं

डॉ. रोहिणी घावरी की स्वदेश वापसी ऐसे समय में हुई है जब चंद्रशेखर आजाद संसद में नगीना क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पार्टी का विस्तार करने में जुटे हैं। 2024 के आम चुनावों में नगीना सीट से मिली जीत के बाद चंद्रशेखर आजाद का सियासी कद राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुआ है। ऐसे में इस पुराने विवाद के दोबारा सक्रिय होने से राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं। रोहिणी घावरी के भारत आने के बाद उनके समर्थक इसे न्याय और सच की लड़ाई बता रहे हैं, जबकि सांसद के समर्थक इसे उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने की निरंतर कोशिश करार दे रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच की तनातनी आने वाले दिनों में सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकती है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डॉ. रोहिणी घावरी इस मामले में औपचारिक रूप से पुलिस प्रशासन या अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। पूर्व में लगे आरोपों के संदर्भ में किसी औपचारिक कानूनी जांच या ठोस कानूनी कार्रवाई की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक कोई पक्ष आधिकारिक रूप से पुलिस में प्राथमिकी (FIR) या सक्षम अदालत में परिवाद दाखिल नहीं करता, तब तक ऐसे मामलों में कानूनी जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

वहीं, सांसद चंद्रशेखर आजाद अथवा उनकी पार्टी की ओर से रोहिणी के ताजा बयान पर अभी तक कोई नई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि यदि यह मामला आगे बढ़ता है या कोई विधिक कदम उठाया जाता है, तो प्रशासन और जांच एजेंसियों को दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना होगा। फिलहाल, रोहिणी के भारत लौटने और कड़े तेवर दिखाने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

Also Read- Mayawati Action on Akash Anand: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती का बड़ा एक्शन, आकाश आनंद को बसपा से किया 'मुक्त'

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow