मुजफ्फरपुर में खूनी गैंगवार से दहला अमर सिनेमा रोड, पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड के मुख्य शूटर गोविंद शर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के नगर थाना क्षेत्र में रविवार की देर रात एक बेहद सनसनीखेज और दुस्साहसिक वारदात सामने

By INA News Desk
Jun 1, 2026 - 14:46
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मुजफ्फरपुर में खूनी गैंगवार से दहला अमर सिनेमा रोड, पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड के मुख्य शूटर गोविंद शर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या।
मुजफ्फरपुर में खूनी गैंगवार से दहला अमर सिनेमा रोड, पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड के मुख्य शूटर गोविंद शर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या।
  • पटना से लौटते ही घात लगाए अपराधियों ने आइकॉन टावर्स के पास शूटर को खदेड़कर मारी आधी दर्जन से ज्यादा गोलियां, इलाके में भारी हड़कंप
  • कुख्यात शूटर गोविंद शर्मा के अंत से उत्तर बिहार के आपराधिक सिंडिकेट में बड़ी हलचल, हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष मर्डर केस का भी था मुख्य आरोपी

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के नगर थाना क्षेत्र में रविवार की देर रात एक बेहद सनसनीखेज और दुस्साहसिक वारदात सामने आई है, जिसने पूरे शहर की कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। शहर के व्यस्त और पॉश रिहायशी इलाकों में शुमार अमर सिनेमा रोड पर स्थित आइकॉन टावर्स के परिसर में अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर कुख्यात शूटर गोविंद शर्मा को मौत के घाट उतार दिया। इस खूनी खेल के बाद पूरे इलाके में अचानक भगदड़ और चीख-पुकार मच गई, जिससे आसपास की दुकानों के शटर आनन-फानन में गिर गए और लोग दहशत के मारे अपने घरों में दुबक गए। इस वारदात की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया, जिसने तुरंत पूरे परिसर को अपने घेरे में लेकर तफ्तीश शुरू कर दी।

जिस गोविंद शर्मा की इस गैंगवार में बेरहमी से हत्या की गई है, उसका नाम उत्तर बिहार के सबसे बड़े और खूंखार अपराधियों की सूची में दर्ज था। वह मुजफ्फरपुर के बेहद चर्चित और हाई-प्रोफाइल पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड का मुख्य शूटर और नामजद अभियुक्त था, जिसने कुछ साल पहले शहर के बीचों-बीच एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर पूर्व मेयर को मौत की नींद सुला दिया था। इसके अलावा, जमीन कारोबार से जुड़े शहर के नामी प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष कुमार और उनके अंगरक्षक की हत्या में भी गोविंद शर्मा को ही मुख्य शूटर के तौर पर चिन्हित किया गया था। इस तरह के कई संगीन और खूनी मामलों का मुख्य आरोपी होने के कारण वह लंबे समय से पुलिस और विरोधी गुटों के निशाने पर था, जिसके अपराध का अंत आखिरकार उसी के अंदाज में गोलियों की गूंज के साथ हुआ।

वारदात के संदर्भ में पुलिस द्वारा की गई शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि गोविंद शर्मा मुजफ्फरपुर के अमर सिनेमा रोड पर स्थित आलीशान आइकॉन टावर्स में एक किराए का फ्लैट लेकर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। घटना वाले दिन यानी रविवार की शाम को वह किसी निजी काम के सिलसिले में राजधानी पटना गया हुआ था और देर रात ही वहां से वापस मुजफ्फरपुर लौटा था। चश्मदीदों और सुरक्षा गार्डों के अनुसार, गोविंद शर्मा जैसे ही अपनी गाड़ी से उतरकर टावर के मुख्य प्रवेश द्वार से होते हुए अंदर अपने फ्लैट की तरफ कदम बढ़ा रहा था, वैसे ही वहां पहले से घात लगाकर बैठे हथियारबंद अपराधियों ने उसे घेर लिया। अचानक सामने मौत को देखकर गोविंद ने भागने का प्रयास किया, लेकिन हमलावरों ने उसे संभलने का कोई मौका नहीं दिया। अपराधियों ने गोविंद शर्मा को चारों तरफ से घेरकर बेहद करीब से खदेड़ना शुरू किया और उस पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी। इस खूनी हमले के दौरान हमलावरों ने बेहद ठंडे दिमाग से काम लेते हुए उसके शरीर को छलनी कर दिया, जिससे वह खून से लथपथ होकर वहीं जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही तड़प-तड़प कर उसकी जान चली गई।

फॉरेंसिक टीम और डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अपराधियों ने इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए आधुनिक और प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल किया था ताकि गोविंद के बचने की कोई गुंजाइश न रहे। शूटआउट के दौरान घात लगाए अपराधियों ने गोविंद शर्मा के सिर, छाती और पेट को निशाना बनाते हुए आधा दर्जन से ज्यादा गोलियां मारीं, जिससे उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने तुरंत काम करना बंद कर दिया। घटनास्थल से पुलिस को कई खोखे और जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि हमलावरों की संख्या तीन से चार के बीच रही होगी और वे पूरी तैयारी के साथ गोविंद की रेकी कर रहे थे। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) भेज दिया है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने शहर के सभी निकास द्वारों और सीमाओं पर नाकेबंदी कर अपराधियों की धरपकड़ के लिए सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। आइकॉन टावर्स और उसके आसपास के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि हमलावरों के चेहरे, उनकी गाड़ियों के नंबर और भागने के रूट का सुराग लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस हत्याकांड के तार सीधे तौर पर जमीन विवाद, ठेकेदारी के वर्चस्व और पूर्व के मेयर हत्याकांड के प्रतिशोध से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस की कई विशेष टीमें अलग-अलग संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और गोविंद के करीबियों से भी पूछताछ की जा रही है।

अपराध जगत से जुड़े इस मामले ने शहर में एक बार फिर पुराने बड़े हत्याकांडों की यादें ताजा कर दी हैं, जिससे व्यापारियों और जमीन कारोबारियों के बीच भारी असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है। पूर्व मेयर समीर कुमार और प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष की हत्याओं के बाद शहर के कई सफेदपोश और बड़े सिंडिकेट के नाम सामने आए थे, और माना जा रहा है कि गोविंद की हत्या के पीछे किसी बहुत बड़े गिरोह का हाथ है जो अपने राज दफन रखना चाहता था। इस वारदात ने यह भी साबित कर दिया है कि जेल से बाहर आने या जमानत मिलने के बाद भी इन अपराधियों की जान सुरक्षित नहीं रहती है और गैंगवार की आग कभी भी शांत नहीं होती। स्थानीय निवासियों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की मांग की है।

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