नालंदा में मानवता शर्मसार: महिला से सरेराह बदसलूकी मामले में पुलिस का बड़ा प्रहार, 6 और उपद्रवी गिरफ्तार।
बिहार के नालंदा जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। नूरसराय
- कानून का शिकंजा: वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को दबोचा, मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान पुख्ता
- बिहार में सुरक्षा पर सवाल: सरेआम हुई घिनौनी हरकत के बाद प्रशासन सख्त, स्पीडी ट्रायल के जरिए कठोर सजा दिलाने की तैयारी
बिहार के नालंदा जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। नूरसराय थाना क्षेत्र के एक गांव में एक विवाहित महिला के साथ सरेराह हुई बदसलूकी और छेड़खानी के मामले में पुलिस ने अब अपनी कार्रवाई की रफ्तार तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच और सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए विचलित करने वाले वीडियो के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर 6 और उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस जघन्य कांड में गिरफ्तार किए गए कुल आरोपियों की संख्या अब 8 पहुंच गई है। यह घटना 26 मार्च की शाम की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के बीच कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है कि कानून के हाथ उन तक पहुंचने में देर नहीं लगाएंगे।
घटना के विवरण के अनुसार, 20 वर्षीय पीड़िता 26 मार्च की शाम घर का राशन लेने के लिए पास की एक दुकान पर गई थी। वापसी के दौरान रास्ते में गांव के ही कुछ दबंगों ने उसे घेर लिया और उसके साथ अश्लील हरकतें करना शुरू कर दिया। उन दरिंदों ने न केवल महिला के कपड़े फाड़ने का प्रयास किया बल्कि उसके साथ दुष्कर्म की भी कोशिश की। सबसे विचलित करने वाली बात यह थी कि जब महिला अपनी जान और इज्जत की भीख मांग रही थी, तब वहां मौजूद भीड़ में से कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। इसके बजाय, कुछ लोग अपने मोबाइल फोन से इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए उन लोगों को भी चिन्हित किया है जो मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहे थे या वीडियो बनाने में व्यस्त थे, जिसके बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ।
नालंदा के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं कमान संभाली और सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम को अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगाया। शुरुआती दौर में पुलिस ने मुख्य आरोपी अशोक यादव और मटलु महतो उर्फ नवनीत कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद, तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो की फोरेंसिक जांच के जरिए उन अन्य चेहरों की पहचान की गई जो घटना के समय वहां मौजूद थे और अपराध को बढ़ावा दे रहे थे। हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान पुलिस ने 6 और लोगों को दबोचा है, जिन्होंने इस शर्मनाक कृत्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपनी भूमिका निभाई थी। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी कुछ और नामजद आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
पीड़िता का पति वर्तमान में रोजगार के सिलसिले में महाराष्ट्र के नासिक में कार्यरत है और घर में वह अपने दो छोटे बच्चों के साथ रहती थी। अपराधियों ने महिला की इसी मजबूरी और अकेलेपन का फायदा उठाने की कोशिश की। घटना के अगले दिन, यानी 27 मार्च को जब महिला ने हिम्मत जुटाकर स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, तो आरोपियों ने बदले की भावना से उस शर्मनाक वीडियो को इंटरनेट पर वायरल कर दिया। आरोपियों का उद्देश्य पीड़िता को मानसिक रूप से तोड़ना और उसे चुप रहने पर मजबूर करना था, लेकिन उनकी यही चाल उनके लिए गले की फांस बन गई। वीडियो वायरल होते ही प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ा और पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए मुख्य साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया। अब पुलिस उन डिजिटल प्लेटफार्मों की भी जांच कर रही है जहां इस वीडियो को साझा किया गया था।
बिहार पुलिस के महानिदेशक (DGP) ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल करने में कोई देरी न की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराधों में शामिल लोगों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन सख्त धाराओं के तहत मामला चलाया जाएगा जो महिलाओं की गरिमा से जुड़ी हैं। गिरफ्तार किए गए नए 6 आरोपियों से पूछताछ के दौरान कुछ और महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जिससे यह पता चलता है कि गांव के कुछ अन्य रसूखदार लोग भी अपराधियों को संरक्षण दे रहे थे। पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आरोपियों की मदद करने वालों पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद से पीड़िता और उसका परिवार गहरे सदमे में है। महिला का कहना है कि उसे अब भी डर लगता है कि जेल से बाहर आने के बाद ये अपराधी उसे फिर से परेशान कर सकते हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने और उसे सरकारी योजनाओं के तहत मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस केस को स्पीडी ट्रायल के दायरे में लाया जाएगा ताकि महीनों या सालों तक अदालती चक्कर काटने के बजाय आरोपियों को जल्द से जल्द उनके किए की सजा मिल सके। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून का साथ दें।
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