Mussoorie : मूसलाधार बारिश के बीच मसूरी में गूंजी देशभक्ति की तान, पासिंग आउट परेड के बाद आईटीबीपी को मिले 133 नए जांबाज अधिकारी

दीक्षांत समारोह का सबसे भावुक और यादगार क्षण वह था जब देश सेवा की कसम खाने वाले इन युवा अफसरों के कंधों पर उनके माता-पिता और वरिष्ठ अधिकारियों ने गौरव के प्रतीक सितारे सजाए। इस पल को देखकर परेड मैदान में मौजूद परिजनों की आंखों में खुशी और गर्व

May 31, 2026 - 20:19
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Mussoorie : मूसलाधार बारिश के बीच मसूरी में गूंजी देशभक्ति की तान, पासिंग आउट परेड के बाद आईटीबीपी को मिले 133 नए जांबाज अधिकारी
Mussoorie : मूसलाधार बारिश के बीच मसूरी में गूंजी देशभक्ति की तान, पासिंग आउट परेड के बाद आईटीबीपी को मिले 133 नए जांबाज अधिकारी

रिपोर्टर : सुनील सोनकर

पहाड़ों की रानी मसूरी में स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी अकादमी में आयोजित एक भव्य पासिंग आउट परेड के बाद 133 युवा अधिकारी बल की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। पूरे पचास हफ्तों के अत्यंत कठिन, थका देने वाले और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 132 सहायक सेनानी और एक महिला विशेषज्ञ चिकित्सक अधिकारी ने देश की सेवा और सीमाओं की सुरक्षा की अटूट शपथ ली। दीक्षांत परेड के दौरान नए अधिकारियों की शानदार कदमताल, ऊंचे मनोबल और गजब के अनुशासन ने वहां मौजूद हर एक दर्शक का मन मोह लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

पहाड़ों में हो रही तेज बारिश के बावजूद दीक्षांत समारोह के दौरान देशभक्ति, समर्पण और गौरव का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत शामिल हुए। उन्होंने परेड की सलामी लेने के बाद नव नियुक्त युवा सैन्य अधिकारियों को संबोधित किया।

अपने प्रेरणाप्रद भाषण में उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर अत्यंत कठिन, विपरीत और बर्फीली परिस्थितियों में तैनात रहकर भारत मां की रक्षा करना जितने गौरव की बात है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि अब बल की गौरवशाली और ऐतिहासिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का पूरा दायित्व इन युवा कंधों पर है। इस विशिष्ट परेड में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी विशेष रूप से शिरकत की और देश के इन नए रक्षकों का हौसला बढ़ाया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्य के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी पास आउट हुए नए अफसरों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस देश की सुरक्षा का एक बेहद मजबूत और अभेद्य स्तंभ है। चीन सीमा की दुर्गम चोटियों की रक्षा करने से लेकर देश में आने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा के प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने तक, इस बल की भूमिका हमेशा सबसे आगे और अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

उन्होंने आगे कहा कि आज देश को इन युवा अधिकारियों के रूप में एक नई शक्ति मिली है, जिन्हें भविष्य में अपनी तैनाती के दौरान पूरी निष्ठा, अद्वितीय समर्पण और अटूट ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। उत्तराखंड को वीर सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों की पवित्र भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां के युवाओं की रगों में राष्ट्रप्रेम कूट-कूट कर भरा है और इस प्रतिष्ठित अकादमी से कड़ा प्रशिक्षण पाकर निकले यह जांबाज देश की सीमाओं पर तिरंगे का गौरव हमेशा ऊंचा रखेंगे।

दीक्षांत समारोह का सबसे भावुक और यादगार क्षण वह था जब देश सेवा की कसम खाने वाले इन युवा अफसरों के कंधों पर उनके माता-पिता और वरिष्ठ अधिकारियों ने गौरव के प्रतीक सितारे सजाए। इस पल को देखकर परेड मैदान में मौजूद परिजनों की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू छलक आए। कई माता-पिता ने बेहद भावुक होकर कहा कि आज उनके जीवन का सबसे बड़ा और सबसे सौभाग्यशाली दिन है, क्योंकि उनके जिगर के टुकड़े अब आधिकारिक रूप से भारतीय सीमाओं की रक्षा करने और देश के दुश्मनों को कड़ा सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।

तकनीकी और शैक्षणिक योग्यता के मामले में आईटीबीपी का यह नया बैच बेहद खास और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुकूल है। इस नए दस्ते में एमबीबीएस डॉक्टर, विभिन्न विधाओं के इंजीनियर, एमटेक, एमएससी और अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं से डिग्रियां प्राप्त करने वाले अत्यधिक शिक्षित युवा शामिल हैं।

लगभग एक साल चले इस बेहद कठिन बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान इन जांबाजों को अत्याधुनिक युद्ध कौशल, घातक शस्त्र संचालन, पहाड़ों में आपदा प्रबंधन की बारीकियों, मानवाधिकारों के सम्मान, सैन्य प्रशासन की कार्यप्रणाली और कठिनतम समय में कुशल नेतृत्व क्षमता का विशेष एवं गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है ताकि वे युद्ध और शांति दोनों ही समय में सटीक निर्णय ले सकें।

अकादमी की दहलीज पार कर देश सेवा के मैदान में उतरने वाले नव नियुक्त सैन्य अधिकारियों ने अत्यंत गर्व के साथ कहा कि यहां मिले कठिन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण ने उन्हें दुनिया की किसी भी विपरीत परिस्थिति या मौसम का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह फौलादी बना दिया है। उन्होंने देश के अन्य युवाओं को भी एक प्रेरक संदेश देते हुए आह्वान किया कि वे भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों का हिस्सा बनकर राष्ट्र सेवा के इस महान और गौरवशाली अभियान में अपना बहुमूल्य योगदान दें।

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