Lucknow: कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का होगा विलय, खाली स्कूलों में चलेंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं: संदीप सिंह
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों की जानकारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का निकटवर्ती विद्यालयों में विलय किया जाएगा। वहीं, जिन विद्यालयों में छात्र नहीं होंगे, वहां प्री-प्राइमरी (पूर्व-प्राथमिक) कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार पहली बार सरकारी स्तर पर प्री-प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था लागू कर रही है।
राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने के लिए पहले नकल अध्यादेश लाया गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में विभिन्न प्रतियोगी एवं शैक्षिक परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बजट और संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जहां पूर्ववर्ती सरकार के समय शिक्षा बजट लगभग ₹28,000 करोड़ था, वहीं वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹1.13 लाख करोड़ से अधिक कर दिया है।
उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालयों में छात्रों का विश्वास बढ़ा है। इसी का परिणाम है कि परिषदीय विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ तक पहुंच गया है। साथ ही, स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है, जो शिक्षा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को दर्शाता है।
राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पाठ्यक्रम को अधिक उपयोगी और आधुनिक बनाया है। इसके अलावा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण में व्यापक सुधार किया गया है। उन्होंने बताया कि 19 विभिन्न मानकों पर विद्यालयों की स्थिति 36 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।
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