Lucknow: यूपी में उर्वरकों की नहीं होगी कमी, किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध: कृषि मंत्री
प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को लेकर कृषि मंत्री ने बुधवार को प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि
लखनऊ। प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को लेकर कृषि मंत्री ने बुधवार को प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि राज्य में किसानों के लिए खाद एवं बीज की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और होरमुज़ जलडमरूमध्य में कई सप्ताह तक मार्ग प्रभावित रहने के बावजूद भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि 1 अप्रैल से 28 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 57 लाख 70 हजार मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया। इनमें से 28 लाख 88 हजार मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जबकि 28 लाख 82 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक अभी भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि अब तक किसानों को 20.26 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.04 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.45 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 2.18 लाख मीट्रिक टन एसएसपी तथा 25 हजार मीट्रिक टन एमओपी वितरित किया जा चुका है।
वर्तमान उपलब्ध स्टॉक की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में यूरिया 5.42 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 4.81 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 4.91 लाख मीट्रिक टन, एसएसपी 3.47 लाख मीट्रिक टन तथा एमओपी 1.11 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।
बीज वितरण और दलहन-तिलहन उत्पादन पर विशेष जोर
कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 1 लाख 73 हजार 641 क्विंटल बीज वितरित किए गए हैं। साथ ही दलहन, मूंगफली, सोयाबीन और तिल जैसी फसलों के रकबे में विस्तार करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों को निःशुल्क मिनी किट भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके तहत 9,893 क्विंटल दलहन बीज के मिनी किट 2 लाख 2 हजार 522 किसानों को वितरित किए गए। वहीं 2,926 क्विंटल तिलहन बीज 93,632 किसानों को तथा 5,671 क्विंटल ज्वार, बाजरा एवं सांवा के बीज भी किसानों में वितरित किए गए।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि खरीफ फसलों की बुआई एवं उत्पादन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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