Sambhal: 24 कोसीय परिक्रमा से छेड़छाड़ का आरोप, सीएम तक पहुंची गुहार; बोले- सम्भल की आस्था और पहचान से न करें खिलवाड़

सम्भल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली 24 कोसीय परिक्रमा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय

Jul 31, 2026 - 16:23
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Sambhal: 24 कोसीय परिक्रमा से छेड़छाड़ का आरोप, सीएम तक पहुंची गुहार; बोले- सम्भल की आस्था और पहचान से न करें खिलवाड़
सुमित कुमार रस्तौगी, जिलाध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार एसोसिएशन

उवैस दानिश, सम्भल

सम्भल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली 24 कोसीय परिक्रमा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुमित कुमार रस्तौगी ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि प्रशासन परंपरागत 24 कोसीय परिक्रमा के मार्ग में बदलाव कर उसकी दूरी कम करने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो सम्भल की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और पौराणिक महत्व को गहरा आघात पहुंचेगा।

रस्तौगी का दावा है कि परंपरागत 24 कोसीय परिक्रमा लगभग 77 किलोमीटर की मानी जाती है, लेकिन इसे घटाकर करीब 50 किलोमीटर करने की बात सामने आ रही है। उनका आरोप है कि इस बदलाव के कारण पिशाच मोचन तीर्थ और महर्षि दधीचि की समाधि जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल परिक्रमा मार्ग से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि महर्षि दधीचि की समाधि सम्भल की धार्मिक आस्था और पौराणिक इतिहास का प्रमुख केंद्र है, इसलिए इसे परिक्रमा से अलग करना उचित नहीं होगा। सुमित रस्तौगी ने कहा कि जब सरकार सम्भल को 'कल्कि नगरी' के रूप में विकसित करने की बात कर रही है, तब यहां की सबसे बड़ी धार्मिक परंपरा के साथ किसी भी तरह का बदलाव लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि 24 कोसीय परिक्रमा के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखा जाए और सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों को परिक्रमा मार्ग में शामिल रखा जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सम्भल के नाम पर मिलने वाली कई विकास योजनाओं का लाभ अन्य क्षेत्रों को दिया जा रहा है, जबकि जिला मुख्यालय और मूलभूत सुविधाओं के मामले में सम्भल की लगातार उपेक्षा हो रही है। उन्होंने अंतरराज्यीय स्तर के रोडवेज बस अड्डे और सम्भल–गजरौला रेलवे लाइन की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि सम्भल को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाना है तो मजबूत परिवहन व्यवस्था भी आवश्यक है। रस्तौगी ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजा है और रेलवे व रोडवेज अधिकारियों से भी मिलने का समय मांगा है। उन्होंने शासन और प्रशासन से अपील की कि सम्भल की धार्मिक विरासत, 24 कोसीय परिक्रमा और विकास से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से निर्णय लिया जाए।

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