मुल्ला अफरोज पर एनएसए रद्द: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर मुशीर खान बोले- यह इंसाफ की बड़ी जीत

मुल्ला अफरोज पर एनएसए हटाने और यूपी शासन पर 10 लाख का जुर्माना लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का एआईएमआईएम नेता मुशीर खान ने स्वागत किया।

By INA News Desk
Sep 29, 2026 - 23:02
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मुल्ला अफरोज पर एनएसए रद्द: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर मुशीर खान बोले- यह इंसाफ की बड़ी जीत
चौधरी मुशीर खां, AIMIM वरिष्ठ नेता

Report  : उवैस दानिश, सम्भल

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुशीर खान का बड़ा बयान, बोले- यह न्याय की जीत, यूपी सरकार पर जुर्माना तानाशाही की गवाही
  • सम्भल में AIMIM नेता चौधरी मुशीर खान ने मुल्ला अफ़रोज़ पर NSA रद्द होने का किया स्वागत, कहा- अदालत के फैसले से इंसाफ और मानवाधिकारों में भरोसा मजबूत हुआ

मुल्ला अफ़रोज़ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) रद्द किए जाने और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने के फैसले पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM नेता चौधरी मुशीर खान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बताते हुए इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक है और इससे इंसाफ तथा मानवाधिकारों के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।

पत्रकार से बातचीत के दौरान चौधरी मुशीर खान ने कहा कि जब लोग सिस्टम से मायूस हो जाते हैं, तब उन्हें अदालतों से इंसाफ की उम्मीद रहती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला उसी भरोसे को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों को आधार बनाए जाने के मामले पर गंभीर टिप्पणी की है और इसी प्रकरण में NSA खत्म करते हुए राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मुशीर खान ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। उनके मुताबिक, अदालत का फैसला इंसानियत और मानवाधिकारों के पक्ष में है और हर धर्म को मानने वाले लोगों के लिए न्यायपालिका पर भरोसा महत्वपूर्ण है।

सरकार की तानाशाही की गवाही देता है जुर्माना

AIMIM नेता ने जुर्माने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार पर लगाया गया 10 लाख रुपये का जुर्माना उसकी तानाशाही को जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक है। मुशीर खान ने बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि वह उस फैसले का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का स्वागत किया जाना चाहिए, खासकर जब वे इंसानियत और मानवाधिकारों के पक्ष में हों।

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