Jantar Mantar Cleared After Protest: जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन खत्म, कल संसद में हंगामे के आसार?
जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन समाप्त होने के बाद क्षेत्र की सफाई कर दी गई है। अब सभी की निगाहें कल से शुरू होने वाले संसद के सत्र और उसमें उठने वाले मुद्दों पर हैं।
- Jantar Mantar protest: सीजेपी प्रदर्शन के बाद जंतर-मंतर की सफाई, अब संसद सत्र पर टिकीं नजरें
- जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन खत्म, सफाई के बाद अब संसद के आगामी सत्र पर क्यों बढ़ीं हलचलें?
- जंतर-मंतर से खाली हुआ सीजेपी का प्रदर्शन स्थल, कल संसद सत्र में मुद्दे पर घमासान के संकेत
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और सहयोगी संगठनों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की साफ-सफाई करवा दी है। कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन के समापन के बाद अब राजनीतिक हलचलों का केंद्र संसद भवन बनने जा रहा है। प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों को लेकर विपक्षी दल कल से शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। नागरिक अधिकारों और नीतिगत फैसलों से जुड़े इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संसद के पटल पर इन मांगों को किस तरह उठाया जाएगा।
राजधानी के प्रमुख धरना स्थल जंतर-मंतर पर बीते दिनों से चल रहा सीजेपी (CJP) आंदोलन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। आंदोलन की समाप्ति के तुरंत बाद नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर सफाई अभियान चलाया और पूरे परिसर को पहले की तरह सामान्य स्थिति में ला दिया है।
हालांकि, जंतर-मंतर पर शांति लौटने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों की गूंज अब देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में सुनाई देने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कल से शुरू हो रहे संसद सत्र में यह विषय प्रमुखता से गूंज सकता है।
सीजेपी के बैनर तले विभिन्न नागरिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटे और अपनी चिंताओं तथा मांगों को सरकार के समक्ष रखा।
आंदोलन के अंतिम चरण में आयोजकों ने अपनी मांगों का ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपा और नियमानुसार प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन खत्म होते ही दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा घेरा हटाया और सफाई कर्मचारियों ने मंच, बैनर व कचरे को हटाकर इलाके को साफ किया।
स्थल खाली होने के बाद अब मुख्य ध्यान संसद के आगामी सत्र पर केंद्रित हो गया है। विपक्षी सांसदों ने संकेत दिए हैं कि वे आंदोलनकारियों के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं होने देंगे और इसे संसद में नियमबद्ध तरीके से उठाएंगे।
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आंदोलनकारियों का पक्ष: CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर उनका धरना भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक दायरे में रहते हुए अपनी मांगों को लेकर आगे भी मुखर रहेंगे।
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सत्तापक्ष का रुख: सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार हर विषय पर कानून और संविधान के दायरे में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उनका तर्क है कि संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सभी दलों को सहयोग करना चाहिए।
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विपक्ष की रणनीति: विपक्षी खेमे के नेताओं ने बैठकें कर आंदोलन से जुड़े बिंदुओं पर आम सहमति बनाने की कोशिश की है। विपक्ष का कहना है कि जनता के ज्वलंत मुद्दों को संसद में उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है।
जंतर-मंतर पर हुए इस घटनाक्रम का सीधा असर राजधानी के राजनीतिक वातावरण पर देखा जा रहा है। सड़कों पर शुरू हुई बहस अब नीति-निर्धारण के सर्वोच्च मंच तक पहुंचने वाली है।
इससे एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर यातायात और कानून व्यवस्था सामान्य हुई है, वहीं दूसरी तरफ विधायी स्तर पर सियासी घमासान के आसार बढ़ गए हैं। जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित होने से आने वाले दिनों में नीतिगत चर्चाओं को नई दिशा मिल सकती है।
अब सभी की नजरें कल की बजने वाली संसद की घंटी पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विपक्षी दल सत्र की शुरुआत में ही इन मुद्दों को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाते हैं या फिर अन्य संसदीय माध्यमों से चर्चा की मांग करते हैं।
यदि सरकार और विपक्ष के बीच इन विषयों पर सहमति नहीं बनती है, तो सत्र के शुरुआती दिनों में हंगामे के आसार बन सकते हैं। बहरहाल, जंतर-मंतर का खाली होना इस बात का संकेत है कि अब आंदोलन का नया दौर संसद के भीतर देखने को मिलेगा।
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