Sudhanshu Trivedi Statement: NEET और शिक्षा पर चर्चा से भाग रही है कांग्रेस, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा हमला

भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एनडीए सरकार नीट और शिक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा चाहती है, लेकिन कांग्रेस इस पर बहस नहीं होने दे रही।

Jul 23, 2026 - 13:11
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Sudhanshu Trivedi Statement: NEET और शिक्षा पर चर्चा से भाग रही है कांग्रेस, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा हमला
BJP MP Sudhanshu Trivedi, Congress NEET debate issue
  • NEET Row in Parliament: NDA सरकार संवेदनशील, कांग्रेस नहीं चाहती शिक्षा प्रणाली पर बहस; बोले भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी
  • 'कांग्रेस नहीं चाहती संसद में NEET पर हो चर्चा': भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने खोला मोर्चा, NDA का बड़ा आरोप!
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देश भर में नीट (NEET) और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संसद के मानसून सत्र में जारी गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार शिक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के सांसद संसद भवन के बाहर केवल इसीलिए एकजुट होकर खड़े थे ताकि संसद के भीतर नीट परीक्षा और देश की शिक्षा व्यवस्था पर सार्थक चर्चा कराई जा सके। हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और उसका गठजोड़ इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर बहस कराने से लगातार पीछे हट रहा है और सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाल रहा है।

संसद के वर्तमान सत्र में नीट (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक संग्राम छिड़ा हुआ है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार पर ढिलाई का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर नीतिगत चर्चा से भागने का आरोप लगाया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने संसद परिसर से बयान जारी कर कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार छात्रों के हितों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए संसद में हंगामा कर रही है, जबकि सरकार हर सवाल का जवाब देने और सुधारों पर संसद में विस्तृत बहस कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए के कई सांसद संसद परिसर में एकत्र हुए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा परीक्षाओं में सुधार लाने के पक्ष में अपनी आवाज उठाई। इसके बाद जब सदन की बैठक प्रारंभ हुई, तो भाजपा प्रतिनिधियों का कहना था कि वे नियम के तहत नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं पर चर्चा करने का प्रस्ताव लाना चाहते थे।

हालांकि, सदन के भीतर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण चर्चा संभव नहीं हो सकी। इसी घटनाक्रम के बाद भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सार्वजनिक रूप से आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि एनडीए सांसद संसद परिसर में इसीलिए खड़े हुए थे ताकि देश के युवाओं को यह संदेश दिया जा सके कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी जानबूझकर ऐसा माहौल बना रही है जिससे संसद का समय बर्बाद हो और शिक्षा सुधारों पर कोई सकारात्मक संवाद न हो सके।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एनडीए सरकार देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर अत्यंत संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं और कठोर कानून भी बनाया है, लेकिन कांग्रेस इस गंभीर विषय पर संसद में स्वस्थ चर्चा नहीं होने देना चाहती। उनका दावा है कि विपक्ष केवल शोर-शराबा करके इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक मोड़ देना चाहता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने भाजपा के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे स्वयं नीट परीक्षा में हुई धांधली पर तत्काल और बिना किसी शर्त के विस्तृत चर्चा चाहते हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जिम्मेदारी तय करने से बचना चाहती है, इसलिए वह विपक्ष पर प्रक्रिया में बाधा डालने का मनघड़ंत आरोप लगा रही है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी इस जुबानी जंग का सीधा असर संसद की कार्यवाही पर पड़ रहा है। देश के लाखों छात्र और उनके अभिभावक जो संसद से परीक्षा सुधारों और पारदर्शिता को लेकर किसी ठोस कदम की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें इस राजनीतिक गतिरोध से निराशा हाथ लग रही है। सत्ता पक्ष द्वारा सीधे कांग्रेस को बहस न करने का जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हो गया है, जिससे सदन में सहमति बनने की संभावनाएं धुंधली पड़ रही हैं।

नीट और शिक्षा प्रणाली पर बने इस राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में संसदीय कार्य मंत्री और विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं के बीच बातचीत हो सकती है। यदि दोनों पक्ष नियमानुसार बहस करने पर सहमत होते हैं, तो लोकसभा या राज्यसभा में शिक्षा मंत्री द्वारा सरकार का रुख स्पष्ट किया जाएगा और परीक्षा सुधारों पर विधेयक या नई व्यवस्था पेश की जा सकती है। हालांकि, मौजूदा रुख को देखते हुए आने वाले सत्रों में भी इस मुद्दे पर घमासान जारी रहने के पूरे आसार हैं।

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