Kalyan Banerjee Suspension: लोकसभा से निलंबित होने के बाद भी नहीं थमे कल्याण बनर्जी, संसद परिसर में अकेले दी आवाज
लोकसभा से शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित किए जाने के बाद भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी शांत नहीं हुए। उन्होंने संसद परिसर में अकेले ही नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया।
- Parliament Monsoon Session: निलंबन के बाद भी कल्याण बनर्जी का आक्रामक रुख जारी, संसद परिसर में अकेले किया विरोध प्रदर्शन
- लोकसभा से निलंबन भी नहीं रोक पाया! संसद भवन के बाहर अकेले ही नारेबाजी करने लगे टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी
- संसद परिसर में घमासान: लोकसभा से पूरे सत्र के लिए निलंबित होने के बाद अकेले ही विरोध प्रदर्शन पर उतरे कल्याण बनर्जी
संसद के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और पीठ के बीच जारी तनातनी ने एक नया मोड़ ले लिया है। सदन की मर्यादा से जुड़ी एक घटना को लेकर लोकसभा के पूरे शेष सत्र के लिए निलंबित किए जाने के बावजूद कल्याण बनर्जी के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। कार्यवाही से बाहर किए जाने के तुरंत बाद वे संसद भवन के परिसर में आ पहुंचे और वहां अकेले ही सरकार व व्यवस्था के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। अकेला होने के बावजूद संसद परिसर के मकर द्वार और महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप उनके तेवर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा राजनीतिक गतिरोध जल्द शांत होने वाला नहीं है।
लोकसभा में महिला सांसदों पर अनसंसदीय और अमर्यादित टिप्पणी करने के गंभीर आरोपों के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया था। पीठ के निर्देश पर जैसे ही उन्हें सदन कक्ष से बाहर जाना पड़ा, उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए संसद भवन परिसर को ही अपना मंच बना लिया।
निलंबन आदेश लागू होने के बावजूद कल्याण बनर्जी बिना किसी साथी सांसद के अकेले ही परिसर में खड़े होकर जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। उन्होंने अपनी निलंबन की कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाइयों से उनकी आवाज और विपक्ष के तेवर दबने वाले नहीं हैं।
सदन के भीतर हुई बहस और विवाद के बाद पीठासीन अधिकारी ने केंद्रीय मंत्री द्वारा लाए गए प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित करते हुए कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष बची बैठकों के लिए निष्कासित करने का आदेश सुनाया था। नियम के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से सदन कक्ष और गैलरी छोड़ने का निर्देश दिया गया।
सदन से बाहर निकलने के बाद कल्याण बनर्जी रुके नहीं। वे संसद परिसर के बाहर आए और अकेले ही हाथों में अपनी बात रखते हुए सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। परिसर में सुरक्षाकर्मियों और मीडियाकर्मियों की मौजूदगी के बीच वे अकेले ही नारेबाजी करते रहे। उनका कहना था कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया और उन पर एकतरफा कार्रवाई की गई है। कुछ देर तक अकेले ही विरोध जताने के बाद वे मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी बात पर डटे रहे और कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज उठाने से रोका जा रहा है।
कल्याण बनर्जी ने अपने निलंबन और उसके बाद परिसर में किए गए विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे संसदीय सिद्धांतों और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की मुखर आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन वे किसी भी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष और संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कल्याण बनर्जी के इस आचरण की कड़ी आलोचना की। सरकार का कहना है कि सदन के भीतर महिला जनप्रतिनिधियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पीठ द्वारा स्थापित नियमों और अनुशासन का पालन करना हर सांसद की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। सत्ता पक्ष ने कहा कि सदन से निलंबित होने के बाद भी परिसर में अकेले इस तरह का ड्रामा करना केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का एक माध्यम है।
विपक्षी गठजोड़ के अन्य नेताओं ने हालांकि कल्याण बनर्जी के प्रति सहानुभूति जताते हुए आरोप लगाया कि पीठ द्वारा अक्सर केवल विपक्षी सदस्यों पर ही त्वरित और कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाते हैं।
कल्याण बनर्जी द्वारा निलंबन के बाद संसद परिसर में अकेले नारेबाजी करने की इस घटना ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी ध्यान खींचा है। इस वाकये से संसद सत्र के दौरान जारी गतिरोध और गहरा गया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर पीठ और सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाने की रणनीति बना रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम के कारण सदन के भीतर कामकाज को सुचारू रूप से चलाने की कोशिशों को फिर से झटका लगा है।
कल्याण बनर्जी के निलंबन और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के बाद विपक्षी दल अब इस फैसले के खिलाफ अपनी रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर इस निलंबन वापस लेने का अनुरोध कर सकता है। हालांकि, अगर गतिरोध खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में विपक्ष संसद परिसर में ही गांधी प्रतिमा के समक्ष एकजुट होकर बड़ा समानांतर प्रदर्शन भी कर सकता है।
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