Ram Mandir Trust News: कांग्रेस का पीएम मोदी पर बड़ा हमला, रागिनी नायक बोलीं- चंदा चोरी पर मौन क्यों?
Congress on Ram Mandir: कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने राम मंदिर ट्रस्ट और चंदे को लेकर पीएम मोदी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
- Congress on Ram Mandir: 'सिर्फ चिंता जताने से काम नहीं चलेगा', राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर रागिनी नायक ने घेरा
- राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर कांग्रेस आक्रामक: रागिनी नायक ने पीएम मोदी से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
- राम मंदिर चंदा विवाद: कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक का तीखा हमला, कहा- पीएम मोदी धन की बात पर दें जवाब
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखे सियासी बाण छोड़े हैं। रागिनी नायक ने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पूरी तरह से भाजपा और आरएसएस के लोगों से भरा हुआ है। उन्होंने आरएसएस द्वारा इस मुद्दे पर केवल चिंता जताए जाने को नाकाफी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मन की बात' के बजाय सार्वजनिक रूप से 'धन की बात' और चंदा चोरी के आरोपों पर देश के नाम संदेश देना चाहिए। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की है।
यह पूरा मामला राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े ट्रस्ट की गतिविधियों में पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों से संबंधित है। कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर इस बात पर आपत्ति जताई है कि ट्रस्ट के भीतर केवल एक विशेष विचारधारा के लोगों को ही जगह दी गई है। उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार और संघ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ा वित्तीय और नैतिक मुद्दा बताया है। कांग्रेस इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर जवाबदेही तय करने का प्रयास कर रही है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से राम मंदिर निर्माण की देखरेख करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, जमीन खरीद और चंदे के पैसों के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दल लगातार हमलावर रहे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
नायक ने अपने संबोधन में कहा कि जब ट्रस्ट के गठन और उसके संचालन की बात आती है, तो उसमें किसी अन्य निष्पक्ष या गैर-राजनीतिक व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया। ट्रस्ट की संरचना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें केवल भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से जुड़े चेहरों को ही जगह मिली है। उन्होंने बीजेपी नेता विनय कटियार के संदर्भ में कहा कि इस मामले में अंदरखाने बातचीत और कानाफूसी से काम नहीं चलने वाला है। कांग्रेस का आरोप है कि चंदे के रूप में आई बड़ी राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव है, जिसके लिए सीधे तौर पर देश के शीर्ष नेतृत्व को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) केवल 'कड़ी निंदा' या 'चिंता' व्यक्त करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकता। रागिनी नायक के अनुसार, चूंकि इस व्यवस्था के पीछे सत्ताधारी दल की शक्ति है, इसलिए जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है।
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पूर्व में इस प्रकार के सभी आरोपों को हमेशा राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है। भाजपा का रुख रहा है कि मंदिर निर्माण और ट्रस्ट का सारा काम पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी नियमों के तहत हो रहा है। हालांकि, विनय कटियार और आरएसएस की तरफ से इस हालिया तीखे हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक या विस्तृत जवाबी बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के मुद्दे को दोबारा आक्रामकता से उठाने के दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। आस्था से जुड़े इस विषय पर जब भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो वह सीधे तौर पर आम जनता की भावनाओं को प्रभावित करता है। कांग्रेस इस रणनीति के जरिए बीजेपी के मजबूत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नैरेटिव के समानांतर 'पारदर्शिता और शुचिता' का मुद्दा खड़ा करना चाहती है। आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से यह बहस संसद से लेकर सड़क तक देखने को मिल सकती है।
कांग्रेस ने इस मामले में आगे की राह के लिए एक स्पष्ट कानूनी और प्रशासनिक मांग रखी है। प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि अब इस मामले की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की है कि पूरे विवाद की जांच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की प्रत्यक्ष निगरानी में होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। इसके अतिरिक्त, जो भी विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, उसकी जांच रिपोर्ट को बिना किसी देरी के सार्वजनिक पटल पर रखा जाना चाहिए ताकि देश की जनता यह जान सके कि राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए चंदे का वास्तविक सच क्या है। विपक्षी दल आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की अपनी रणनीति को और धार दे सकता है।
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