चंदा चोरी मामले में VHP अध्यक्ष आलोक कुमार का बड़ा बयान, कहा- अब दर्ज हो FIR और फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले मुकदमा

चंदा चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत FIR दर्ज करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई की मांग की है।

By INA News Desk
Jun 25, 2026 - 11:47
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चंदा चोरी मामले में VHP अध्यक्ष आलोक कुमार का बड़ा बयान, कहा- अब दर्ज हो FIR और फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले मुकदमा
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार
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  • विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष की मांग: चंदा चोरी मामले में तुरंत दर्ज हो एफआईआर, दोषियों के लिए बने फास्ट ट्रैक कोर्ट
  • "अब FIR दर्ज की जानी चाहिए..." चंदा चोरी मामले में भड़के वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार, की ये बड़ी मांग
  • VHP Big Statement: चंदा चोरी मामले पर बोले वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार- दर्ज हो FIR, रोजाना हो सुनवाई

धार्मिक और सामाजिक संगठनों के चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चंदा चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने नई दिल्ली में एक प्रेस नोट जारी कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों से तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने की बड़ी मांग की है। जून 2026 में सामने आए इस विवाद पर वीएचपी प्रमुख ने कहा कि अब केवल शुरुआती जांच का समय बीत चुका है और सीधे आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की वकालत करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए और वहां रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई सुनिश्चित की जाए। इस बयान के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

यह पूरा मामला चंदे के रूप में एकत्रित की गई राशि में कथित हेरफेर, धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। संगठन के संज्ञान में जब यह बात आई कि कुछ तत्वों द्वारा कथित तौर पर चंदे की राशि का दुरुपयोग किया गया है या उसे सही जगह पहुंचाने के बजाय निजी हितों में इस्तेमाल किया गया है, तो वीएचपी ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। चूंकि मामला आस्था और लोगों के विश्वास से जुड़ा हुआ है, इसलिए विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। आलोक कुमार ने स्पष्ट किया है कि चंदे के नाम पर की जाने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या चोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानूनी तंत्र को अब इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कथित चंदा चोरी का यह मामला पिछले कुछ समय से आंतरिक जांच और चर्चाओं के दायरे में था। संगठन और कानूनी एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक स्तर पर साक्ष्यों और दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा था।

  • कथित अनियमितताओं का खुलासा: शुरुआती जांच में कुछ ऐसे वित्तीय लेन-देन और रसीदें सामने आईं, जो स्थापित मानदंडों के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद यह अंदेशा जताया गया कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत फंड में हेराफेरी की गई है।

  • आलोक कुमार की सख्त हिदायत: इस संवेदनशील मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में ढिलाई बरतने से जनता का भरोसा टूटता है। इसलिए, बिना किसी देरी के पुलिस प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच शुरू कर देनी चाहिए।

  • न्यायिक प्रक्रिया में तेजी की मांग: आलोक कुमार ने केवल पुलिसिया कार्रवाई पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि उन्होंने न्यायपालिका से भी विशेष आग्रह किया है। उनका मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों के मुकदमे सालों-साल अदालतों में लंबित रहते हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने त्वरित अदालत (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में प्रतिदिन सुनवाई की मांग उठाई है।

अपने आधिकारिक वक्तव्य में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, "यह मामला सीधे तौर पर लोगों की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान की पवित्रता से जुड़ा है। इसमें शामिल लोगों ने न केवल वित्तीय अपराध किया है, बल्कि विश्वासघात भी किया है। अब समय आ गया है कि इस चंदा चोरी मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। जांच में तेजी लाई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई कराई जाए।"

दूसरी तरफ, इस मामले में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों का कहना है कि किसी भी आरोप की सत्यता पूरी तरह निष्पक्ष जांच के बाद ही साबित हो सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि किसी भी मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने का अधिकार राज्य या केंद्र सरकार की सिफारिश पर संबंधित उच्च न्यायालय के पास होता है, और साक्ष्यों की प्रकृति के आधार पर ही यह तय किया जाता है।

देश के एक बड़े और प्रभावशाली संगठन के प्रमुख द्वारा सार्वजनिक रूप से एफआईआर की मांग किए जाने के बाद पुलिस और संबंधित जांच दल हरकत में आ गए हैं। इस घटनाक्रम ने देश के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक ट्रस्टों में चंदा एकत्रीकरण और उसके ऑडिट की व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। लोग अब डिजिटल और पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। संगठन के भीतर और बाहर उन संदिग्ध लोगों की धरपकड़ और पहचान तेज हो गई है, जो इस कथित चंदा चोरी के पीछे मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हैं।

आलोक कुमार के इस बड़े बयान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित पुलिस विभाग अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इस मामले से जुड़ी औपचारिक कानूनी प्रक्रियाओं को गति दे सकता है। यदि एफआईआर दर्ज होती है, तो कई संदिग्धों से पूछताछ की जा सकती है। इसके साथ ही, वीएचपी का एक प्रतिनिधिमंडल इस मांग को लेकर गृह मंत्रालय या संबंधित राज्य के मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात कर सकता है ताकि मुकदमे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की उनकी मांग को प्रशासनिक मंजूरी मिल सके।

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