ब्लिंकिट की एंट्री से भड़के मसूरी के व्यापारी, बोले- पहाड़ों की रानी का बाजार नहीं बनने देंगे ऑनलाइन कारोबार का शिकार
पहाड़ों की रानी मसूरी में क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट के संभावित संचालन की चर्चा के बीच स्थानीय व्यापारियों में भारी नाराजगी
रिपोर्टर सुनील सोनकर
पहाड़ों की रानी मसूरी में क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट के संभावित संचालन की चर्चा के बीच स्थानीय व्यापारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि ब्लिंकिट जैसी बड़ी कंपनियों को मसूरी में कारोबार की अनुमति मिली तो शहर के हजारों छोटे व्यापारियों और उनसे जुड़े कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इसे लेकर व्यापारियों ने मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन से तत्काल हस्तक्षेप कर कंपनी के संचालन को रोकने की मांग की है।
अतुल अग्रवाल उपाध्यक्ष मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन
व्यापारियों का कहना है कि मसूरी कोई महानगर नहीं, बल्कि सीमित आबादी और छोटे बाजार वाला पर्यटन नगर है। यहां वर्षों से छोटी-छोटी दुकानों के सहारे हजारों परिवार अपना जीवनयापन कर रहे हैं। यदि ग्राहक घर बैठे 10-15 मिनट में सामान मंगाने लगेंगे तो किराना, डेयरी, जनरल स्टोर, फल-सब्जी, कॉस्मेटिक और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की छोटी दुकानें सबसे पहले प्रभावित होंगी। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ेगा जो इन दुकानों में काम करते हैं और जिनकी आजीविका पूरी तरह स्थानीय व्यापार पर निर्भर है।
व्यापारियों का कहना है कि मसूरी का बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं बल्कि यहां की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। यदि स्थानीय व्यापार कमजोर हुआ तो रोजगार के अवसर घटेंगे और युवाओं के सामने बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो जाएगी। उनका कहना है कि बड़ी कंपनियां शुरुआती दौर में आकर्षक ऑफर देकर ग्राहकों को अपनी ओर खींचती हैं, लेकिन लंबे समय में इसका सबसे अधिक नुकसान स्थानीय दुकानदारों को उठाना पड़ता है।
मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अतुल अग्रवाल ने कहा कि ब्लिंकिट के संभावित संचालन को लेकर जल्द ही व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में सभी व्यापारिक संगठनों की राय लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो ब्लिंकिट का पुरजोर विरोध किया जाएगा और मसूरी में इसका संचालन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित विभागों ने व्यापारियों की भावनाओं की अनदेखी की तो शहर का समस्त व्यापारी वर्ग एकजुट होकर आंदोलन करेगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और आवश्यकता पड़ने पर मसूरी बाजार बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को स्थानीय रोजगार और छोटे व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका मानना है कि पर्यटन आधारित शहरों की अर्थव्यवस्था स्थानीय व्यापार पर टिकी होती है और यदि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना किसी संतुलित नीति के प्रवेश करते हैं तो इसका दूरगामी असर शहर की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ेगा। अब सभी की नजर मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन की प्रस्तावित बैठक और प्रशासन के रुख पर टिकी हुई है। यदि इस मुद्दे पर जल्द समाधान नहीं निकला तो मसूरी में ब्लिंकिट के विरोध को लेकर बड़ा व्यापारी आंदोलन खड़ा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
What's Your Reaction?




