Gorakhpur Railway News: पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारियों को 17 साल बाद मिलेगा वर्दी भत्ता, 290 कार्य सहायकों में खुशी
Gorakhpur Railway Uniform Allowance: पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के 290 कार्य सहायकों को 17 साल के लंबे इंतजार के बाद वर्दी भत्ता देने का ऐतिहासिक फैसला किया गया है।
- NER Gorakhpur: रेलवे कर्मचारियों का इंतजार खत्म, 17 साल बाद मंजूर हुआ यूनिफॉर्म अलाउंस, जानें किसे मिलेगा फायदा
- रेलवे कर्मचारियों की बड़ी जीत: 17 साल के लंबे इंतजार के बाद मिलेगा वर्दी भत्ता, आदेश जारी होते ही झूम उठे कर्मचारी
- रेलवे का बड़ा फैसला: गोरखपुर के 290 कार्य सहायकों को 17 साल बाद मिलेगा बकाया वर्दी भत्ता, प्रशासन ने दी मंजूरी
पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के मुख्यालय गोरखपुर से रेल कर्मचारियों के हित में एक बेहद ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आई है। रेलवे प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सालों से लंबित पड़े 290 कार्य सहायकों (Work Assistants) को आखिरकार वर्दी भत्ता (Uniform Allowance) देने की मंजूरी दे दी है। यह वित्तीय लाभ कर्मचारियों को करीब 17 साल के लंबे और थका देने वाले इंतजार के बाद मिलने जा रहा है। इस संबंध में रेलवे के सक्षम अधिकारियों द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद से ही तकनीकी और प्रशासनिक विंग में तैनात प्रभावित रेल कर्मियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। इस बहुप्रतीक्षित भत्ते की बहाली से न केवल कर्मचारियों का आर्थिक संबल मजबूत होगा, बल्कि रेलवे यूनियनों के लंबे संघर्ष को भी एक बड़ी सफलता मिली है।
भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर रेलवे क्षेत्र (गोरखपुर मुख्यालय) में तैनात कार्य सहायकों की एक बेहद पुरानी और न्यायसंगत मांग को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है। साल 2009 के बाद से ही कुछ तकनीकी विसंगतियों और पदनाम के बदलावों के चलते इन कर्मचारियों का वर्दी भत्ता अधर में लटका हुआ था। कई स्तरों की वार्ताओं और कानूनी व प्रशासनिक समीक्षाओं के बाद, अब रेल प्रशासन ने माना है कि ये कर्मचारी नियमानुसार यूनिफॉर्म अलाउंस के हकदार हैं। इस फैसले के तहत कुल 290 पंजीकृत कार्य सहायकों को उनके सेवा काल और नियमों के आधार पर सीधे उनके बैंक खातों में भत्ते की राशि हस्तांतरित की जाएगी।
इस पूरे विवाद की जड़ें लगभग डेढ़ दशक से भी ज्यादा पुरानी हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के विभिन्न विभागों जैसे सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल और सिग्नलिंग विंग में 'कार्य सहायक' के पद पर तैनात कर्मचारियों को फील्ड में काम करना पड़ता है, जहां सुरक्षा मानकों के तहत एक विशिष्ट यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य होता है। छठे और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के दौरान भत्तों के पुनर्गठन और पदनामों के विलय के कारण इन कर्मचारियों का वर्दी भत्ता तकनीकी फाइलों में उलझ कर रह गया था।
कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने इस मुद्दे को लगातार 'परमानेंट नेगोशिएटिंग मशीनरी' (PNM) की बैठकों में प्रमुखता से उठाया। हर बार वित्तीय घाटे या नियमों के पेंच का हवाला देकर मामले को टाल दिया जाता रहा। लेकिन हाल ही में रेलवे बोर्ड के नए दिशानिर्देशों और स्थानीय प्रशासनिक समीक्षा के बाद इस गतिरोध को तोड़ा गया। महाप्रबंधक कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद वित्त विभाग ने आवश्यक बजट आवंटित कर दिया है, जिससे 17 साल पुराना यह गतिरोध हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
इस फैसले के सार्वजनिक होते ही पूर्वोत्तर रेलवे मेंस कांग्रेस और अन्य संबंधित रेल यूनियनों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा, "यह उन 290 कार्य सहायकों के धैर्य और हमारे निरंतर संघर्ष की जीत है जो तपती धूप और कड़ाके की ठंड में रेलवे ट्रैक और परिसरों में पूरी मुस्तैदी से काम करते हैं। हम इस संवेदनशील फैसले के लिए रेल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हैं।"
वहीं दूसरी तरफ, रेल प्रशासन के एक वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी (Personnel Officer) ने बताया, "प्रशासन हमेशा से कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कुछ तकनीकी और ऑडिट संबंधी आपत्तियों के कारण इस भत्ते को जारी करने में देरी हुई थी। सभी विसंगतियों को दूर कर लिया गया है, और हमारा प्रयास है कि चालू वित्तीय वर्ष के भीतर ही सभी पात्र कर्मचारियों को उनके एरियर के साथ भुगतान सुनिश्चित कर दिया जाए।"
इस बड़े और सकारात्मक फैसले का व्यापक प्रभाव पूर्वोत्तर रेलवे की कार्यप्रणाली पर देखने को मिलेगा:
कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा: इतने लंबे समय बाद हक मिलने से ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले रेल कर्मियों का तंत्र के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
वित्तीय राहत: एरियर और भत्ते के रूप में मिलने वाली एकमुश्त राशि से कर्मचारियों के परिवारों को इस मंहगाई के दौर में बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
औद्योगिक शांति: रेल प्रशासन और यूनियनों के बीच लंबे समय से चल रहा एक बड़ा विवाद सुलझने से दोनों पक्षों के बीच मधुर संबंध स्थापित होंगे, जो सुचारू रेल संचालन के लिए आवश्यक है।
प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद अब संबंधित विभागों के क्लैरिकल स्टाफ को सभी 290 कार्य सहायकों के सर्विस रिकॉर्ड और उनके सेवा काल का डेटा तैयार करने को कहा गया है। इसके तुरंत बाद प्रत्येक कर्मचारी के हिस्से आने वाली वास्तविक राशि की गणना की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, आगामी दो से तीन महीनों के भीतर सैलरी बिल के साथ इस भत्ते को जोड़कर भुगतान की प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। अन्य संवर्गों के कर्मचारी भी अब अपनी इसी तरह की पुरानी लंबित मांगों को लेकर आशान्वित नजर आ रहे हैं।
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