वाराणसी से सीएम योगी ने किया शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का आगाज, 1.10 करोड़ बच्चों को भेजी डीबीटी राशि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से 12 लाख शिक्षकों व कर्मियों के लिए मुफ्त कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू की। साथ ही छात्रों के लिए 1320 करोड़ रुपये जारी किए।

Jul 8, 2026 - 23:06
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वाराणसी से सीएम योगी ने किया शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का आगाज, 1.10 करोड़ बच्चों को भेजी डीबीटी राशि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से दी शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा मुफ्त इलाज, करोड़ों छात्रों को मिली सरकारी मदद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान बड़ालालपुर स्थित टीएफसी सभागार से राज्य के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से कई बड़े कदमों की शुरुआत की। उन्होंने प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक स्कूलों के 12 लाख से अधिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के कल्याण के लिए बहुप्रतीक्षित 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही, उन्होंने प्राथमिक स्तर के एक करोड़ 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से कुल 1320 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की। इस कार्यक्रम में शिक्षकों को बेहतर इंश्योरेंस कवर प्रदान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।

सभागार में उपस्थित जनसमूह और प्रदेश भर से लाइव प्रसारण के माध्यम से जुड़े शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे अबोध होते हैं और उन्हें सही राह दिखाना शिक्षकों का राष्ट्रीय दायित्व होने के साथ-साथ उनका परम कर्तव्य भी है। समाज के हर नागरिक और शिक्षक की यह जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा बेहतर शिक्षा से वंचित न रहने पाए। उन्होंने कहा कि निपुण भारत अभियान के माध्यम से बुनियादी शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार आया है। यदि बच्चों की शैक्षिक नींव मजबूत होगी, तभी एक सशक्त भारत का निर्माण संभव हो सकेगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यालयों में एक अनुशासित, सुंदर और स्वच्छ वातावरण तैयार करें ताकि देश का भविष्य बेहतर ढंग से संवर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का सपना सिर्फ उच्च स्तरीय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही पूरा हो सकता है, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की व्यवस्थाओं ने उत्तर प्रदेश को एक बीमारू राज्य बना दिया था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में डबल इंजन सरकार के निरंतर प्रयासों से आज प्रदेश विकास की अग्रणी श्रेणी में शामिल हो चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया कोई भी प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज राज्य में पूरी तरह से पारदर्शी और नकल विहीन परीक्षा का माहौल तैयार किया गया है, और किसी को भी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार 'प्रोजेक्ट अलंकार' के माध्यम से माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पर्याप्त बजट दे रही है। सरकार शिक्षकों से केवल एक अनुशासित माहौल और बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाने की अपेक्षा करती है।

क्या है मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना?

इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, सहायता प्राप्त (अनुदानित) स्कूलों और स्ववित्त पोषित संस्थानों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का स्टाफ और मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइया व उनके परिवार के आश्रित सदस्य इसके वास्तविक लाभार्थी होंगे। योजना के तहत प्रति शिक्षक सालाना लगभग 3000 रुपये का प्रीमियम अनुमानित है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार अपने बजट से वहन करेगी। इसके लिए सरकार प्रतिवर्ष लगभग 447 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाएगी। इस योजना का संचालन 'साचीज' के माध्यम से किया जाएगा, जिसके तहत सभी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैंसर, हृदय रोग, किडनी और गंभीर सर्जरी सहित लगभग 1900 से अधिक प्रकार के उपचार पैकेजों का मुफ्त लाभ मिलेगा। हालांकि, इसमें सामान्य ओपीडी सेवाएं शामिल नहीं होंगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से 15 शिक्षकों को मंच पर बुलाकर स्वास्थ्य कार्ड सौंपे।

पारदर्शी डीबीटी प्रणाली से मिली सीधी मदद

राज्य सरकार ने छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली आवश्यक सामग्रियों में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए सीधे खातों में पैसे भेजने की ऐतिहासिक व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत वर्तमान में प्रति छात्र दो सेट स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये, स्कूल बैग के लिए 175 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये, जूता-मोजा के लिए 125 रुपये और कॉपी-किताब व स्टेशनरी के लिए 100 रुपये दिए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 1200 रुपये प्रति छात्र की दर से धनराशि सीधे माता-पिता के बैंक खातों में भेजी गई है। इस शैक्षिक सत्र के पहले चरण में शिक्षा विभाग ने एक करोड़ 10 लाख बच्चों के लिए कुल 1320 करोड़ रुपये सफलतापूर्वक जारी कर दिए हैं, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों को समय पर अपनी पढ़ाई की सामग्री मिल सकेगी।

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