Morinda Civic Polls: मोरिंडा नगर परिषद चुनाव पर पंजाब में भारी बवाल, BJP का आरोप- 'AAP ने लोकतंत्र को हाईजैक किया'
Morinda Civic Polls Dispute: पंजाब के मोरिंडा नगर परिषद चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर भाजपा ने 'आप' सरकार को घेरा है और राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है।
- Punjab Politics: मोरिंडा स्थानीय निकाय चुनाव में धांधली का आरोप, राजभवन पहुंची बीजेपी, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
- पंजाब में निकाय चुनाव के बाद घमासान: मोरिंडा में आप की जीत पर भड़की बीजेपी और कांग्रेस, पुलिसिया बल के दुरुपयोग का लगाया गंभीर आरोप
- पंजाब से बड़ी राजनीतिक खबर: मोरिंडा नगर परिषद चुनाव परिणामों पर तकरार, आप सरकार के खिलाफ बीजेपी ने खोला मोर्चा
पंजाब के मोरिंडा नगर परिषद (Morinda Municipal Council) के अध्यक्ष पद के चुनाव संपन्न होने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा मोरिंडा और अबोहर स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों पर कब्जा जमाने के तुरंत बाद मुख्य विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को सामने आए इस बड़े घटनाक्रम के तहत पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर लोकतंत्र का गला घोंटने और 'चुनाव को हाईजैक' करने का सीधा आरोप लगाया है। भाजपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में राज्यपाल से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चुनाव के दौरान हुई कथित प्रशासनिक धांधली और पुलिसिया बल के दुरुपयोग की शिकायत की गई है।
पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय और नगर परिषद चुनावों के बाद प्रशासनिक अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में रूपनगर (रोपड़) जिले के अंतर्गत आने वाले मोरिंडा नगर परिषद में अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ, जहां आम आदमी पार्टी समर्थित उम्मीदवार जगपाल सिंह जौली को विजेता और अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इस घोषणा के तुरंत बाद विपक्षी दलों भाजपा और कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। दोनों दलों का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के पास सदन में स्पष्ट बहुमत नहीं था, फिर भी सरकारी मशीनरी, स्थानीय विधायकों और पंजाब पुलिस के कथित गठजोड़ के दम पर विपक्षी पार्षदों को मतदान प्रक्रिया से दूर रखा गया और एकतरफा फैसला सुना दिया गया।
प्राप्त विवरण के अनुसार, मोरिंडा में कुल 15 वार्ड हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने दावा किया था कि 15 में से 12 सीटों पर कांग्रेस विचारधारा के उम्मीदवारों की जीत हुई थी और 'आप' का खाता भी नहीं खुला था। हालांकि, जब वास्तविक अध्यक्ष पद के चुनाव की बारी आई, तो समीकरण पूरी तरह बदल गए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब के इतिहास में पिछले 70 वर्षों में ऐसी धांधली कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन वार्डों और नगर निकायों में विपक्ष का बहुमत था, वहां मतदान के दिन पुलिस ने तानाशाही रवैया अपनाया। भाजपा का आरोप है कि विपक्षी पार्षदों को कमरों में बंद कर दिया गया, दरवाजे अंदर से बंद किए गए और अंदरूनी तौर पर वोटिंग दिखाकर सत्ताधारी दल के लोगों को विजयी घोषित कर दिया गया। यहाँ तक कि नामांकन दाखिल करने के दौरान भी कई वैध पर्चों को जबरन खारिज किया गया था। इन्हीं शिकायतों को लेकर भाजपा का शिष्टमंडल चंडीगढ़ स्थित राजभवन पहुंचा, जहां उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर पंजाब की मौजूदा कानून-व्यवस्था और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
इस बेहद तनावपूर्ण और हाई-प्रोफाइल राजनीतिक विवाद पर सभी प्रमुख दलों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं:
भाजपा का रुख (केवल सिंह ढिल्लों): "हमने महामहिम राज्यपाल को पूरे साक्ष्यों के साथ ज्ञापन सौंप दिया है। राजभवन से हमें बहुत सकारात्मक आश्वासन मिला है। आम आदमी पार्टी ने सरेआम लोकतंत्र की हत्या की है और जनमत को हाईजैक किया है। हम जनता के साथ सड़क से लेकर संसद तक खड़े हैं।"
कांग्रेस का पक्ष (चरणजीत सिंह चन्नी): "मोरिंडा मेरा गृह क्षेत्र है। हमारे पार्षदों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, उनके कपड़े फाड़े गए ताकि वे मतदान न कर सकें। यह सरासर असंवैधानिक है। हम इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती देने जा रहे हैं।"
आम आदमी पार्टी (AAP) का पलटवार: नवनियुक्त नगर परिषद अध्यक्ष जगपाल सिंह जौली और 'आप' प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जौली ने कहा, "सभी पार्षद अपनी मर्जी से आए थे और उन्होंने अपनी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए 'आप' के पक्ष में मतदान किया है। विपक्ष अपनी करारी हार को पचा नहीं पा रहा है, इसलिए हताशा में आकर बेबुनियाद और झूठे आरोप लगा रहा है।"
इस राजनीतिक गतिरोध का प्रभाव पंजाब की स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीति पर दूरगामी होने वाला है:
राजभवन और सरकार में टकराव: भाजपा के राज्यपाल के पास जाने और कांग्रेस द्वारा अदालत का रुख करने से राजभवन और पंजाब सरकार के बीच एक बार फिर प्रशासनिक खींचतान बढ़ने के आसार हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात: इन स्थानीय चुनावों को 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव का 'सेमीफाइनल' माना जा रहा था। इस विवाद के बाद तीनों दलों के बीच की खाई और गहरी हो गई है।
स्थानीय विकास पर असर: मोरिंडा नगर परिषद के भीतर मचे इस आंतरिक घमासान के कारण स्थानीय प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है।
भाजपा के ज्ञापन के बाद राजभवन इस मामले में राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त और स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस विधिक विशेषज्ञों की मदद से हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की तकनीकी रूपरेखा तैयार कर रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस कथित धांधली के खिलाफ मोरिंडा और रूपनगर जिलों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम कर सकता है। पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए निकाय कार्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है ताकि किसी भी हिंसक टकराव को रोका जा सके।
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