Agra Fake Medicine: आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर एफएसडीए का बड़ा छापा, 58 थोक लाइसेंस रद्द, करोड़ों की दवाएं जब्त

आगरा में नकली दवाओं के अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ एफएसडीए ने बड़ी कार्रवाई की है। 13 फर्मों पर छापे मारकर 3.63 करोड़ की दवाएं जब्त की गईं और 58 लाइसेंस रद्द हुए।

Jul 13, 2026 - 00:02
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Agra Fake Medicine: आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर एफएसडीए का बड़ा छापा, 58 थोक लाइसेंस रद्द, करोड़ों की दवाएं जब्त

उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के काले कारोबार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने आगरा जिले में अब तक के सबसे बड़े दवा सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। एफएसडीए आयुक्त डॉक्टर रोशन जैकब के सीधे नेतृत्व में 15 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने विभिन्न व्यापारिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की अवैध बिक्री, फर्जी बिल बनाने, दवाओं पर नए रैपर लगाने (री-लेबलिंग) और फिजीशियन सैंपलों को बाजार में बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग ने 14 व्यापार संचालकों के खिलाफ तीन नई प्राथमिकियां दर्ज कराने की तैयारी कर ली है, जिससे अब तक दर्ज मुकदमों की कुल संख्या नौ हो गई है। इसके साथ ही गड़बड़ी करने वाली 58 थोक दवा दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त या निलंबित कर दिए गए हैं।

प्रशासनिक टीम से मिली जानकारी के अनुसार, आयुक्त के निर्देश पर गठित जांच टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कुल 13 प्रमुख दवा फर्मों के दस्तावेजों और स्टॉक की सघन जांच की गई। इनमें मुख्य रूप से मोहन ट्रेडर्स, मनी मेडिकल, नीलकंठ, वंश फार्मा, प्रशांत मेडिकल, पोरवाल मेडकेयर, एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस, डॉली ड्रग हाउस, मनु फार्मा, आरडीएम फार्मास्युटिकल्स, इनाया फार्मा और नूर फार्मा शामिल हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के दुकानों को तुरंत सील कर दिया गया, जबकि कुछ अन्य प्रतिष्ठानों पर दवा अधिनियम के तहत तत्काल प्रभाव से काम रोकने की पाबंदी लगा दी गई है। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेज दिया है।

इस बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। जांच की शुरुआत टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स कंपनी की प्रसिद्ध दवाओं के नकली रूप में बाजार में बिकने की शिकायत के बाद हुई थी। शुरुआती जांच में अंशिका फार्मा के पास मिली दवाओं की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदी गई पाई गई, जिसे बाद में कोलकाता की एक फर्म को बेचा जाना था। जब जांच टीम ने विभोर मेडिकल एजेंसी के संचालक संजीव कुमार गुप्ता के यहां दस्तावेजों को खंगाला, तो खरीद के सारे बिल पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और गोरखपुर व आगरा की कुछ अन्य फर्मों के नाम भी सामने आए। जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी से सरकारी आपूर्ति वाली दवाएं मिलीं, जिन पर साफ लिखा था कि यह बिक्री के लिए नहीं है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी यह दवाएं नकली और घटिया पाई गईं। इसके बाद पुलिस ने संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल और अरुण कुमार गुप्ता सहित कोलकाता की फर्म के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। यह सिंडिकेट अस्पतालों और सरकारी विभागों को सप्लाई होने वाली जरूरी दवाओं को बिना बिल के खरीदता था। इसके बाद उन पर से 'बिक्री के लिए नहीं' का सरकारी ठप्पा रसायनों की मदद से हटा दिया जाता था और उन पर नए फर्जी लेबल व ज्यादा कीमत की नई पर्चियां चिपकाकर उन्हें खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। युग फार्मा, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा के परिसरों की जांच में बिना तय तापमान के रखे गए इंसुलिन के इंजेक्शन और बड़े पैमाने पर री-लेबलिंग का काम पकड़ा गया। इस मामले में गाजियाबाद एसटीएफ की मदद से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें कई बड़े खुलासे हुए। वी.ए. मेडिकोज नामक दुकान से भारी मात्रा में नामी कंपनियों की नकली दवाएं और लगभग पौने दो करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग पकड़ी गई। इस अवैध माल को वैध दिखाने के लिए कुछ खास वाहनों और ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल किया जा रहा था।

प्रशासनिक प्रमुख डॉक्टर रोशन जैकब के अनुसार, आगरा में इस अवैध धंधे के खिलाफ पिछले कुछ महीनों से चल रहे इस विशेष अभियान में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक की नकली, प्रतिबंधित और सरकारी विभागों की चुराई गई दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केवल दुकानों पर ताला लगाना नहीं है, बल्कि इस आपराधिक सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह से तोड़ना है। इसी वजह से अब तक 58 थोक दवा कारोबारियों के व्यावसायिक लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में नई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसके साथ ही विभाग को कुछ दवा संगठनों द्वारा छोटे व्यापारियों से डरा-धमकाकर अवैध वसूली करने की भी इनपुट मिले हैं। आयुक्त ने सख्त हिदायत दी है कि यदि किसी भी स्तर पर व्यापारियों के आर्थिक शोषण की बात सच पाई जाती है, तो वसूली करने वाले तत्वों के खिलाफ जबरन धन उगाही का मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

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