Varanasi Smart City: काशी में AI से होगा भीड़ प्रबंधन, 4 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट और रंगीन लाइनें दिखाएंगी बाबा विश्वनाथ का रास्ता
Varanasi Smart City: वाराणसी में एआई सेंसर, कैमरे और कलर कोडिंग तकनीक से भीड़ प्रबंधन होगा। चार घंटे पहले ही प्रशासन को मिल जाएगा अलर्ट।
Varanasi Smart City: काशी में AI से होगा भीड़ प्रबंधन, 4 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट और रंगीन लाइनें दिखाएंगी बाबा विश्वनाथ का रास्ता
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अब तंग गलियों में भीड़ या लंबे ट्रैफिक जाम से परेशान नहीं होना पड़ेगा। वाराणसी के ऐतिहासिक महत्व और घनी आबादी को ध्यान में रखते हुए यहां एक बेहद आधुनिक तकनीकी प्रणाली लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई सेंसर, उन्नत कैमरों और डिजिटल साइनेज के जरिए पूरे शहर की यातायात और पैदल यात्रियों की व्यवस्था को संभाला जाएगा। इस खास प्रोजेक्ट के लिए टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन के वैश्विक 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज' में दुनिया भर के तमाम बड़े शहरों के बीच वाराणसी का चयन किया गया है। दो साल की लंबी प्रक्रिया के बाद चार विजेता कंपनियों के नामों की घोषणा की गई है, जो इस कायाकल्प योजना को धरातल पर उतारेंगी।
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रशासन को किसी भी मार्ग पर जुटने वाली संभावित भीड़ का पूर्वानुमान करीब चार घंटे पहले ही मिल जाएगा। सिटी डेटा के प्रमुख अपूर्व कुमार के अनुसार, सिटीफ्लो बिग डेटा और जेनरेटिव एआई की मदद से यातायात के तौर-तरीकों का अध्ययन किया जाएगा। वर्तमान में लगे 8 एआई सेंसरों की संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक की जाएगी। यह प्रणाली पल-पल की जानकारी सीधे काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भेजेगी, जिससे पुलिस विभाग को समय रहते रूट डायवर्जन करने और स्थिति को नियंत्रित करने में आसानी होगी। इसके अलावा, सड़कों और गलियों में यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए अनूठी कलर कोडिंग व्यवस्था की जा रही है। 'जनजात्रा' संस्था की वंशिका शाह ने बताया कि तीर्थयात्री सड़कों पर बनी पीले रंग की लाइन पर चलकर सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर और नीले रंग की लाइन के सहारे गंगा घाट तक पहुंच सकेंगे, जबकि लाल रंग की लाइन उन्हें वापस पिकअप पॉइंट तक ले जाएगी।
भीड़भाड़ से बचने और वैकल्पिक रास्तों की सटीक जानकारी के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। 'वोजिक एआई' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्जित विश्वास ने जानकारी दी कि उनका 'बेहतर-वे' ऐप आम रास्तों से हटकर यात्रियों को रियल-टाइम डेटा के आधार पर कम भीड़ वाली गलियों और पास के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की ओर निर्देशित करेगा। इससे स्थानीय दुकानदारों के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। दूसरी ओर, जंगमबाड़ी से मैदागिन तक डिजिटल बोर्ड और कैमरों का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि भारी भीड़ होने पर नियंत्रण कक्ष तुरंत सक्रिय हो सके।
इस पूरी विकास योजना में बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांगजनों की सहूलियत का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। 'प्रमेया कंसल्टिंग' की प्रमुख रिद्धि शाह ने बताया कि 'नई चाल' नामक एक डिजिटल इकोसिस्टम के जरिए अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक इन विशेष श्रेणियों के नागरिकों के लिए बाधा रहित आवागमन की सुविधा तैयार की जा रही है। शुरुआती चरण में गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट के बीच सूचना केंद्र बनाए गए हैं, जहां रैंप, व्हीलचेयर और चेंजिंग रूम जैसी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मिलेगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वाराणसी नगर निगम और स्मार्ट सिटी द्वारा वैश्विक संस्थाओं के सहयोग से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को अगले दो वर्षों के भीतर पूरी तरह पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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