लखनऊ मर्डर मिस्ट्री: नोवोटेल होटल में मृत मिले वैज्ञानिक राहुल सिंह, 85 लाख की डील और वॉट्सएप चैट खोलेंगे मौत का राज
Lucknow Novotel Hotel Death: लखनऊ के नोवोटेल होटल में मृत मिले महाराजगंज के वैज्ञानिक राहुल सिंह मामले में नोएडा के कारोबारी समेत चार पर केस दर्ज, पुलिस जांच तेज।
- Rahul Singh Death Case: लखनऊ के नोवोटेल होटल में युवा वैज्ञानिक की संदिग्ध मौत, बिजनेसमैन समेत 4 पर केस दर्ज
- Lucknow Scientist Death: ड्रोन प्रोजेक्ट के करोड़ों के विवाद में गई युवा वैज्ञानिक राहुल की जान, पुलिस ने खंगाले बैंक खाते
- Lucknow News: युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह मौत मामले में एफआईआर दर्ज, कारोबारी और उसके बच्चों से होगी पूछताछ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित प्रतिष्ठित नोवोटेल होटल में महाराजगंज के 22 वर्षीय उभरते हुए वैज्ञानिक राहुल सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से सनसनी फैल गई है। यह घटना बीते मंगलवार सुबह की है, जिसके बाद पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर नोएडा के एक बड़े व्यवसायी और उनके तीन बच्चों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। परिजनों का आरोप है कि एक ड्रोन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के सौदे को लेकर चल रहे विवाद और भारी मानसिक दबाव के कारण राहुल को जान गंवानी पड़ी। मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच सहित अपनी विवेचना को तेज कर दिया है।
यह मामला महाराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र के बीजापार असमन छपरा निवासी 22 वर्षीय युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। राहुल का शव गोमतीनगर के विभूतिखंड इलाके में स्थित नोवोटेल होटल के एक कमरे में बरामद हुआ था। मृतक के भाई रोहित और अन्य परिजनों ने नोएडा के सेक्टर-49 निवासी कारोबारी चंद्रभूषण मिश्रा, उनके बेटों तपिष व उदित मिश्रा और बेटी तारिणी मिश्रा पर राहुल को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने इन चारों नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने न आने की वजह से फिलहाल विसरा सुरक्षित रख लिया गया है और आगे की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
परिजनों के दावों के अनुसार, मृतक राहुल सिंह एक बेहद प्रतिभाशाली ड्रोन इंजीनियर थे। उन्होंने ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े एक एडवांस प्रोजेक्ट का सौदा नोएडा के व्यवसायी चंद्रभूषण मिश्रा से कुल 85 लाख रुपये में तय किया था। इस सौदे के तहत कारोबारी की ओर से राहुल को करीब 65 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका था। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ समय बाद कारोबारी पक्ष ने अचानक इस प्रोजेक्ट की डील को रद्द करने की बात कही और राहुल पर दिए गए 65 लाख रुपये वापस करने का चौतरफा दबाव बनाना शुरू कर दिया।
परिजनों का कहना है कि राहुल इतनी बड़ी रकम तुरंत लौटाने की स्थिति में नहीं थे, जिसके कारण आरोपियों द्वारा उन्हें लगातार गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही थीं। इस भारी वित्तीय और मानसिक तनाव के कारण राहुल काफी समय से अवसाद में चल रहे थे। परिजनों का यह भी आरोप है कि राहुल ने इस संबंध में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी, लेकिन तब उनकी बात पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई, जिसका अंततः यह दर्दनाक नतीजा सामने आया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया, "परिजनों की ओर से प्राप्त तहरीर के आधार पर चंद्रभूषण मिश्रा और उनके तीनों बच्चों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम मृतक के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खंगाल रही है।"
विभूतिखंड के इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के मुताबिक, "जांच प्रक्रिया के तहत मृतक राहुल के भाई रोहित से उनके सभी सक्रिय बैंक खातों का विवरण मांगा गया है। इसके साथ ही नामजद मुख्य आरोपी चंद्रभूषण मिश्रा के वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। आरोपियों की संलिप्तता की गहन जांच के लिए उन्हें जल्द ही कानूनी नोटिस जारी कर पुलिस पूछताछ के लिए तलब करेगी।"
इस दुखद घटना ने न केवल देश के उभरते हुए युवा तकनीकी जानकारों के बीच एक असुरक्षा की भावना पैदा की है, बल्कि कॉरपोरेट और स्टार्टअप डील्स में होने वाले विवादों के खौफनाक पहलू को भी सामने ला दिया है। एक प्रतिभावान वैज्ञानिक की इस तरह असमय मौत से उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनके गृह जनपद महाराजगंज में गहरा शोक है। इस घटनाक्रम का सीधा असर व्यापारिक अनुबंधों और स्टार्टअप इकोसिस्टम में युवाओं की सुरक्षा को लेकर होने वाली बहसों पर भी पड़ेगा। चूंकि मामला एक बड़े कारोबारी से जुड़ा है, इसलिए सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक इस केस में निष्पक्ष और त्वरित न्याय की मांग लगातार तेज हो रही है, जिससे पुलिस पर भी आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द पुख्ता सबूत जुटाने का दबाव है।
इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी हुई है। पुलिस को राहुल के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं, जिसमें आरोपी पक्ष के साथ हुई वाट्सएप चैट और रुपयों के लेन-देन से जुड़ी बातें स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इन साक्ष्यों को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। इसके अलावा, चूंकि डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम में मौत की मुख्य वजह का पता लगाने में असमर्थ रही, इसलिए पुलिस को अब फॉरेंसिक लैब से आने वाली विसरा रिपोर्ट का इंतजार है। विसरा रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के संदिग्ध पदार्थ या जहर की पुष्टि होते ही पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे सकती है।
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