'सपा ने P का मतलब पिछड़ा से पंडित किया', मायावती का बड़ा आरोप, अखिलेश यादव की राजनीति को बताया छलावा

बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलती है और PDA का अर्थ बदल रही है।

Aug 9, 2026 - 00:06
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'सपा ने P का मतलब पिछड़ा से पंडित किया', मायावती का बड़ा आरोप, अखिलेश यादव की राजनीति को बताया छलावा
Mayawati Attacks Samajwadi Party
  • मायावती का सपा पर तीखा हमला: PDA के 'P' का मतलब बदलने पर घेरा, बोलीं- गिरगिट की तरह बदल रही रंग
  • "गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा": PDA के नए समीकरण पर मायावती का सपा पर बड़ा हमला, जानिए क्या कहा
  • यूपी राजनीति: मायावती ने सपा के PDA फार्मूले पर उठाया सवाल, बोलीं- 'P' का मतलब बदलकर राजनीति कर रही सपा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच जबानी जंग तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक लंबा बयान जारी कर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए 'गिरगिट की तरह रंग बदलती' रहती है। मायावती ने सपा के चर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले का जिक्र करते हुए दावा किया कि अब सपा 'P' का मतलब 'पिछड़े' से बदलकर 'पंडित' करने की कोशिश कर रही है। उनका यह बयान यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है और इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट साझा कर समाजवादी पार्टी की नीतियों और उसके राजनीतिक तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सपा द्वारा प्रचारित किए जा रहे 'PDA' फार्मूले के अर्थ में बदलाव का आरोप लगाते हुए कहा कि विरोधी दल चुनावी फायदे के हिसाब से अपने रुख में बदलाव करते रहते हैं। मायावती के मुताबिक, बीएसपी जहां 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर काम करती है, वहीं समाजवादी पार्टी केवल अपनी संकीर्ण जातीय राजनीति को साधने में जुटी हुई है।

अपने आधिकारिक बयान में मायावती ने लिखा कि बहुजन समाज पार्टी सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी नीति पर चलती है और इसी के आधार पर उसने उत्तर प्रदेश में चार बार अपनी सरकार चलाई है। इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते जगजाहिर तौर पर गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।

मायावती ने अपने बयान में खास तौर पर 'PDA' शब्द का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि पहले सपा ने 'P' शब्द से 'पिछड़ा' वर्ग का प्रचार-प्रसार किया था। लेकिन जब सपा ने देखा कि अपरकास्ट समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज, तेजी से बसपा के साथ जुड़ रहा है और बसपा उसी आधार पर उम्मीदवारों का चयन भी कर रही है, तो सपा इससे विचलित हो गई। बसपा सुप्रीमो का आरोप है कि इस बौखलाहट में अब सपा ने छल करते हुए 'P' का अर्थ 'पंडित' बताना शुरू कर दिया है। मायावती ने इसे जनता के साथ एक बड़ा राजनीतिक छल और छलावा करार दिया।

मायावती ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि इस तरह की छल-कपट वाली राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का थोड़े समय के लिए भले ही अस्थायी फायदा हो जाए, लेकिन इससे पूरे समाज का भला कभी नहीं हो सकता। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से अपील की है कि वे ऐसी छलावापूर्ण राजनीति से सावधान रहें। मायावती के इस बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, इस मुद्दे पर फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि सपा जल्द ही मायावती के इन आरोपों का जवाब दे सकती है।

मायावती के इस सीधे हमले के बाद आने वाले दिनों में बीएसपी और सपा के बीच जुबानी जंग और तीखी होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी को अब अपने PDA फार्मूले और उस पर लग रहे आरोपों को लेकर जनता के बीच स्थिति साफ करनी होगी। इसके अलावा, राज्य के आगामी उपचुनावों और सांगठनिक बैठकों में भी इस मुद्दे की गूंज देखने को मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी मायावती के इस 'गिरगिट और छल' वाले आरोप का किस तरह जवाब देते हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से बेहद अहम भूमिका निभाते रहे हैं। मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सभी राजनीतिक दल उच्च जातियों, विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की होड़ में लगे हैं। मायावती के इस आक्रामक रुख से यह साफ है कि बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ सर्वसमाज और विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं को साधे रखने के लिए सतर्क है। मायावती का यह सीधा हमला सपा के PDA नैरेटिव को कमजोर करने की एक रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है, जिससे पिछड़े और सवर्ण दोनों वर्गों के बीच सपा की नीयत को लेकर सवाल खड़े किए जा सकें।

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