लखनऊ का 3000 साल पुराना हुलासखेड़ा बनेगा प्रमुख पर्यटन स्थल: 1.75 करोड़ से प्रथम चरण का संरक्षण कार्य पूरा, दूसरे चरण की तैयारी
लखनऊ के ऐतिहासिक हुलासखेड़ा पुरास्थल का 175 लाख रुपये से प्रथम चरण का संरक्षण पूरा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा- इसे प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा।
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में स्थित 3000 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पुरास्थल हुलासखेड़ा को एक विश्वस्तरीय विरासत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा प्रथम चरण के अंतर्गत 175 लाख रुपये की लागत से साइट संरक्षण का कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए ओपन एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, टॉयलेट ब्लॉक और आकर्षक लैंडस्केपिंग का निर्माण कराया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में द्वितीय चरण के विकास कार्यों के लिए 169 लाख रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। इसे जल्द ही मंजूरी देकर दूसरे चरण का काम शुरू कराया जाएगा। दोनों चरणों के संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास कार्य पूर्ण होने के बाद यह पुरास्थल शोधकर्ताओं, छात्रों और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हुलासखेड़ा में लगभग 1000 ईसा पूर्व यानी लौह युग से मानव बसावट के प्रमाण मिले हैं। वैज्ञानिक उत्खनन के दौरान यहां मौर्य, शुंग, कुषाण और गुप्त काल की सांस्कृतिक परतें प्राप्त हुई हैं। खुदाई में ईंटों से बनी प्राचीन सड़कें, उच्च कोटि के मृद्भांड, टेराकोटा की मूर्तियां, प्राचीन सिक्के और लौह उपकरण मिले हैं जो उस समय की उन्नत स्थापत्य और तकनीकी कला को दर्शाते हैं। यहां से मिली भगवान कार्तिकेय की सोने के पत्र पर उकेरी गई दुर्लभ आकृति सबसे विशेष खोज मानी जाती है, जिसे वर्तमान में लखनऊ के राज्य संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।
What's Your Reaction?




