UPSRTC News: रोडवेज बसों में दिव्यांगजनों को QR कोड स्कैन कर मिलेगा जीरो फेयर टिकट, ETIM मशीनें हुईं अपग्रेड

यूपी रोडवेज की बसों में दिव्यांगजनों को क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे शून्य मूल्य का टिकट मिलेगा। 80% से अधिक दिव्यांगता पर सहयात्री को भी निशुल्क यात्रा का लाभ मिलेगा।

By INA News Desk
Sep 23, 2026 - 19:51
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UPSRTC News: रोडवेज बसों में दिव्यांगजनों को QR कोड स्कैन कर मिलेगा जीरो फेयर टिकट, ETIM मशीनें हुईं अपग्रेड

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने प्रदेश में दिव्यांगजनों की सार्वजनिक परिवहन यात्रा को अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण संकल्प के अंतर्गत अब रोडवेज की साधारण बसों में दिव्यांग यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग इशूइंग मशीन (ETIM) से सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके शून्य मूल्य (निशुल्क) टिकट जारी करने की व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू कर दी गई है। बुधवार से प्रभावी हुई इस डिजिटल प्रणाली के तहत परिचालक दिव्यांगजन पहचान पत्र (UDID कार्ड) पर अंकित क्यूआर कोड को ईटीआईएम मशीन के कैमरे से स्कैन करेंगे, जिससे कुछ ही सेकंड में बिना किसी कागजी औपचारिकता के वैध यात्रा टिकट जारी हो जाएगा।

इस नई तकनीकी व्यवस्था से एक ओर जहां दिव्यांग यात्रियों को पहचान पत्र दिखाने और विवरण दर्ज कराने में लगने वाले समय से मुक्ति मिलेगी, वहीं परिवहन निगम के पास भी निशुल्क यात्रा का सटीक, पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड केंद्रीय सर्वर पर स्वतः दर्ज हो सकेगा।

ईटीआईएम मशीन पर ऐसे काम करेगी नई व्यवस्था

यूपीएसआरटीसी प्रबंधन के अनुसार, प्रदेशभर के डिपो में संचालित टिकटिंग मशीनों के सॉफ्टवेयर को नवीनतम वर्जन में अपग्रेड कर दिया गया है।

टिकट जारी करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और त्रुटिहीन बनाया गया है:

  • रूट व गंतव्य चयन: परिचालक सबसे पहले यात्रा का प्रारंभिक स्टेशन (बोर्डिंग पॉइंट) और गंतव्य स्थल (अलाइटिंग पॉइंट) मशीन में दर्ज करेगा।

  • दिव्यांगजन विकल्प: इसके बाद स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाले विशेष 'दिव्यांगजन' मेन्यू का चयन किया जाएगा।

  • क्यूआर कोड स्कैनिंग: परिचालक मशीन के स्कैनर से पहचान पत्र पर बने क्यूआर कोड को स्कैन करेगा।

  • डेटा सत्यापन: स्कैन होते ही मशीन की स्क्रीन पर यात्री का पूरा अधिकृत विवरण विशिष्ट दिव्यांगता पहचान संख्या (UDID), नाम, जन्मतिथि, दिव्यांगता की श्रेणी, दिव्यांगता का प्रमाणित प्रतिशत तथा आधार संख्या स्वतः प्रदर्शित हो जाएगा। विवरण की पुष्टि होते ही शून्य मूल्य का टिकट प्रिंट होकर बाहर आ जाएगा।

दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर सहयात्री को भी निशुल्क यात्रा का संबल

शासन के नियमानुसार ईटीआईएम मशीन का सॉफ्टवेयर दिव्यांगता के प्रमाणित प्रतिशत के आधार पर स्वतः टिकटों की संख्या निर्धारित करने में सक्षम है।

  • 80 प्रतिशत से कम दिव्यांगता: सॉफ्टवेयर द्वारा संबंधित दिव्यांग व्यक्ति के लिए एक निशुल्क टिकट जारी किया जाएगा।

  • 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता: अत्यधिक दिव्यांगता की स्थिति में मशीन स्वतः दो शून्य मूल्य के टिकट जारी करेगी, जिससे दिव्यांगजन के साथ यात्रा कर रहे उनके सहायक (सहयात्री) को भी बिना किसी अतिरिक्त किराए के यात्रा करने की आधिकारिक अनुमति मिलेगी।

इस स्वचालित व्यवस्था से परिचालक और यात्री के बीच दिव्यांगता प्रतिशत या नियमों को लेकर होने वाले किसी भी प्रकार के संशय अथवा विवाद की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

परिचालकों को मिलेगा प्रोत्साहन, लोड फैक्टर में शामिल होंगे टिकट

परिवहन निगम ने इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए ग्राउंड स्टाफ यानी परिचालकों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा है। पूर्व व्यवस्था में कई बार परिचालकों द्वारा निशुल्क यात्रियों को बैठाने में लोड फैक्टर और राजस्व लक्ष्यों के चलते हिचकिचाहट देखी जाती थी।

अब नई व्यवस्था के तहत ईटीआईएम से जारी किए गए दिव्यांगजन निशुल्क टिकटों को भी बस के आधिकारिक 'लोड फैक्टर' में शामिल किया जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि इन टिकटों की संख्या के आधार पर परिचालकों की मासिक प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) में नियमानुसार वृद्धि होगी। इसके अलावा, ऑटोमेटेड फेयर कलेक्शन (AFC) सिस्टम में दिव्यांगजन यात्रा की अलग से डिजिटल रिपोर्ट तैयार होगी, जिससे शासन स्तर पर प्रतिपूर्ति (सब्सिडी क्लेम) की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

तकनीकी खराबी पर भी नहीं रुकेगी यात्रा, आलमबाग डिपो से जारी हुआ पहला टिकट

परिवहन निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी ग्रामीण क्षेत्र, नेटवर्क की समस्या अथवा पहचान पत्र पर बना क्यूआर कोड धुंधला होने के कारण स्कैन नहीं हो पाता है, तो किसी भी दिव्यांगजन को यात्रा से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में परिचालक पूर्व से चली आ रही पारंपरिक भौतिक सत्यापन व्यवस्था के अनुसार यात्री को ससम्मान निशुल्क यात्रा कराएंगे।

इस नई डिजिटल प्रणाली का पहला शून्य मूल्य का टिकट राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित आलमबाग बस डिपो से देवरिया के गौरी बाजार रूट पर चलने वाली नॉन-एसी साधारण बस सेवा के लिए सफलतापूर्वक जारी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में यह व्यवस्था सभी साधारण (नॉन-एसी) बस सेवाओं में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है।

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